Home विपक्ष विशेष देखिए किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी और वामदलों का दोगलापन

देखिए किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी और वामदलों का दोगलापन

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अभी कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र में किसान आंदोलन की खबरें छाई हुई थीं। कांग्रेस, लेफ्ट समेत तमाम दलों के नेता महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार के खिलाफ आग उगल रहे थे, बीजेपी को किसान विरोधी बता रहे थे। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडण्नवीस ने मुंबई पहुंचने पर किसानों की सभी मांग मान ली और किसान भी संतुष्ट होकर लौट गए। महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन के समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किए थे, और राज्य की बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार को घेरने की कोशिश की थी।

ओडिशा के किसान आंदोलन पर राहुल गांधी की चुप्पी
अब इसी तरह का आंदोलन ओडिशा में चल रहा है, 15 हजार के अधिक किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने, पेंशन, कर्ज माफी जैसी मांगों को लेकर राजधानी भुवनेश्वर में डेरा डाले हुए हैं। चूंकि ओडिशा में बीजेपी की सरकार नहीं है, इसलिए इस राज्य के किसानों की समस्या से कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को कोई मतलब नहीं है। वजह साफ है, ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार है, बीजेपी का विरोध करने वाली पार्टियां बीजेडी को अपने पाले में मानती हैं। कांग्रेस और वामदलों की इस दोगली राजनीति को देश की जनता बाखूबी समझती है और इसे लेकर अपना गुस्सा भी दिखा रही है।

केरल में किसानों पर लेफ्ट कार्यकर्ताओं का हमला
महाराष्ट्र में आपको याद होगा कि सभी किसान लाल टोपी लगाए थे और लाल झंडे हाथ में लिए थे। साफ है कि पूरे आंदोलन को वामदल ही संचालित कर रहे थे। महाराष्ट्र में वामदलों ने यह दिखाने की कोशिश की वे किसानों के सबसे बड़े हमदर्द हैं। अब आपको इनकी असलियत से रूबरू कराते हैं। केरल में वामदलों की सरकार है और वहां कन्नूर जिले में बड़ी संख्या में किसान नेशनल हाईवे के लिए अपनी खेती जमीन के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। ये किसान सड़क के किनारे टेंट लगाकर डटे हुए थे। पहले राज्य की लेफ्ट सरकार ने आंदोलनकारी किसानों को पुलिस से गिरफ्तार करा के उन्हें डराने की कोशिश की। इस पर भी किसान नहीं माने तो सीपीएम के कार्यकर्ता गुंडई पर उतर आए और किसानों को टेंटों में आग लगा दी। यही है वामदलों का दोगलापन, जो पूरा देश देख रहा है।

इन दो वाकयों से स्पष्ट है कि कांग्रेस, लेफ्ट और दूसरी तमाम पार्टियां सिर्फ उन्हीं राज्यों में किसानों के मुद्दे उठाती हैं, जहां बीजेपी की सरकार है, बाकी राज्यों में इन्हें किसानों की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है।

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