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धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम तो आप करते रहे हैं राहुल जी

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कहते हैं कि चोर चोरी से जाय, लेकिन हेराफेरी से न जाय। कांग्रेस के नये-नवेले अध्यक्ष राहुल गांधी की ताजा-तरीन हरकतें इसी मुहावरे को चरितार्थ करती हैं। राहुल गांधी ने भारत से बाहर यानी बहरीन में जाकर यह कहा है कि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ‘लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांट रही है।’ इसलिए यहां राहुल गांधी को आईना दिखाना जरूरी हो गया है। असल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने नहीं, बल्कि खुद उन्होंने और उनकी कांग्रेस पार्टी ने ही देश को हमेशा बांटने का ही काम किया है। जबकि, मोदी जी की सरकार तो सिर्फ एक मंत्र के साथ जनता की सेवा में जुटी हुई है; और वह मंत्र है, ‘सबका साथ-सबका विकास’।

अपने फायदे के लिए जातियों को लड़ाया
राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस के दोगलेपन को बेनकाब करने के लिए ज्यादा दूर जाने की भी जरूरत नहीं है। हाल में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाज में जाति-वादी भावना भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस ने हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर जैसे लोगों से साठगांठ कर लिया, जिनका इरादा ही समाज में जातियों के नाम पर तनाव पैदा कर अपना निहित स्वार्थ सिद्ध करना है।

भाई से भाई को लड़ाया:

* महाराष्ट्र के पुणे में भीमा-कोरेगांव में हिंसा कराकर दलित-मराठा को लड़ाने की साजिश रची।

*दिल्ली के प्रेस क्लब में जिग्नेश मेवाणी का एजेंडा प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कराया।

*लगभग दो दशकों बाद फिर से गुजरात के समाज में जातिवाद का जहर घोल दिया।

*यूपी चुनाव में भी समाज को जातियों के नाम पर बांटने की साजिश रची।

*हमेशा जातिवादी राजनेताओं के साथ चले और उनके मंसूबों को आगे बढ़ाने का काम किया।

*हरियाणा में जाट आंदोलन के नाम पर जातिवादी हिंसा को भड़काने का काम किया ।

*बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी जातिवादी उन्माद भड़काने के साजिश में शामिल रहे।

*महाराष्ट्र में भी जाति आधारित आरक्षण की आग भड़काकर मराठा-गैर मराठाओं को बांटने की कोशिश की।

मुस्लिम तुष्टिकरण कर धर्मों को बांटा
वोट के लिए राहुल गांधी ने अपनी पार्टी की तर्ज पर मुस्लिम तुष्टिकरण का कोई मौका नहीं गंवाया। यही नहीं उन्होंने हिंदुओं को बरगलाने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा।

धर्म के नाम पर समाज को लड़ाया:

*गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेसी वकील ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई टलवाने की साजिश रच डाली।

*सोमनाथ मंदिर में राहुल ने पहले खुद को गैर-हिंदू स्वीकार किया। बाद में तिलक लगाकर खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण साबित करने के लिए मंदिर-मंदिर घूमना शुरू कर दिया।

*गुजरात चुनाव से पहले सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से जुड़ा एक संदिग्ध आतंकवादी गिरफ्तार किया गया था। उसने खुलासा किया था कि वह चुनाव से पहले एक हिंदू धर्मगुरु और एक यहूदी धर्मस्थल में घुसकर खून-खराबे की साजिश रच रहा था।

*हलाला के चक्कर बैठे मौलानाओं को खुश करने के लिए ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा में लटका दिया। कांग्रेसी वकील ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक को धार्मिक आस्था तक साबित करने की कोशिश की।

*रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर भी राहुल गांधी की पार्टी ने सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण का ध्यान रखा और देश की लाइन से तालमेल रखने को तैयार नहीं हुई।

*यूपी विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने धार्मिक दोगलापन दिखाया। एक तरफ तुष्टिकरण की नीति साधते रहे। दूसरी तरफ मंदिर में जाकर नमाज की तर्ज पर बैठकर पूजा की नौटंकी करते दिखाई दिए।

*खुद राहुल गांधी ने जेएनयू जाकर वहां देश के टुकड़े करने का मंसूबा रखने वाले गद्दारों का समर्थन किया।

*राहुल-सोनिया की अगुवाई वाली कांग्रेस ने ही सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम और रामसेतु के अस्तित्व को नकार दिया था।

*राहुल-सोनिया की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने ही ‘भगवा आतंकवाद’ की परिभाषा को जन्म दिया। राष्ट्रभक्तों को झूठे मामले में फंसाने के लिए हलफनामे तक में जालसाजी करवाई।

*राहुल-सोनिया की अगुवाई में ही कांग्रेस ने हाफिज सईद, ओसामा बिन लादेन और अफजल गुरु जैसे आतंकवादियों को सम्मानित करने का काम किया।

*कांग्रेसियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट से दोषी ठहराये गए आतंकवादी याकूब मेनन की फांसी टलवाने की साजिश रची गई।

*राहुल गांधी के गुरु कहलाने वाले दिग्विजय सिंह ने खुलकर कट्टरपंथी इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक का महिमामंडन किया। उसने राजीव गांधी ट्रस्ट को 50 लाख रुपये भी दिए थे।

*राहुल-सोनिया की अगुवाई वाली कांग्रेस मुस्लिमों को आरक्षण देने की भी वकालत कर चुकी है।

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