Home नरेंद्र मोदी विशेष एक फोन और बदल गई 7,000 लोगों की दुनिया, देखिए कब-कब संकटमोचक...

एक फोन और बदल गई 7,000 लोगों की दुनिया, देखिए कब-कब संकटमोचक बने प्रधानमंत्री मोदी

276
SHARE

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक फोन कॉल और बदल गई करीब सात हजार लोगों की दुनिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब के शाह को एक फोन किया और फिर शुरू हो गया यमन में युद्ध की विभिषिका के बीच फंसे हजारों लोगों के लिए ‘ऑपरेशन राहत’। बात एक अप्रैल, 2015 की है। तब प्रधानमंत्री ने रियाद में शाह को सीधे कॉल कर एक हफ्ते के लिए बमबारी रोकने को कहा। सऊदी शाह एक हफ्ते तक सुबह नौ बजे से 11 बजे तक बमबारी रोकने पर राजी हो गए। जिसके बाद यमन से 4,800 से अधिक भारतीयों और 1,972 विदेशियों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन राहत’ शुरू किया था। सिंगापुर में आसियान-भारत प्रवासी भारतीय दिवस पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस बात का जिक्र किया।

बम गोलों और गोलियों के बीच हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को सुरक्षित निकालना मुश्किल लग रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का कुशल नेतृत्व और विदेश राज्यमंत्री जनरल (रि) वी के सिंह के प्रबंधन और अगुवाई ने कमाल कर दिया। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय से भारत के सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा 25 देशों के सैकड़ों नागरिकों की भी जान बचाने में भारत को कामयाबी मिली। इस सफलता ने दुनिया को विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए मजबूर कर दिया ।

यमन संकट हो या बाढ़-भूकंप या फिर कोई और प्राकृतिक आपदा… प्रधानमंत्री मोदी फैसले लेने में कतई देर नहीं करते हैं।

1. मालदीव के लोगों की प्यास बुझाई
दिसंबर 2014 में मालदीव का वाटर प्लांट जल गया और पूरे देश में पीने के पानी की किल्लत हो गई। वहां त्राहिमाम मच गया और आपातकाल की घोषणा कर दी गई। तब भारत ने पड़ोसी का फर्ज अदा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्वरित फैसला लिया। मालदीव को पानी भेजने का निर्णय कर लिया गया और इंडियन एयर फोर्स के 5 विमान और नेवी शिप के जरिये पानी पहुंचाया जाने लगा।

2. नेपाल भूकंप में राहत का अद्भुत उदाहरण
27 अप्रैल, 2015 को नेपाल की धरती में हलचल हुई और आठ हजार से ज्यादा जानें एक साथ काल के गाल में समा गईं। जान के साथ अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। हलचल नेपाल में हुई लेकिन दर्द भारत को हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और नेपाल के लिए भारत की मदद के द्वार खोल दिए। नेपाल में जिस तेजी से मदद पहुंचाई गई वो अद्भुत था। भारतीय आपदा प्रबंधन की टीम ने हजारों जानें बचाईं। सबसे खास रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय का नेपाल सरकार से बेहतरीन समन्वय रहा। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की पूरे विश्व ने सराहना की।

3. अफगानिस्तान में भूकंप में राहत
अक्टूबर 2015 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 7.5 तीव्रता के भूकंप के चलते 300 लोगों के मौत हो गई। पीएम मोदी ने तत्काल दोनों देशों को मदद की पेशकश की। अफगानिस्तान में भारतीय राहत टीम को बिना देर किए रवाना किया गया और मलबे में फंसे सैकड़ों लोगों को निकालने में सफलता पायी।

4. सऊदी अरब में फंसे हजारों भारतीयों को निकाला
सऊदी अरब में गलत हाथों में जाकर फंसे करीब 20 हजार भारतीय तीन महीने के भीतर अपने वतन वापस लौट पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयास से सऊदी अरब सरकार ने भारतीयों को 90 दिन के लिए ‘राजमाफी’ दी है। ‘राजमाफी’ के तहत 20 हजार से ज्यादा लोगों ने भारत लौटने के लिए अर्जी दाखिल की थी।

5. बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए भेजी राहत
सितंबर,2017 में भारत ने बांग्लादेश में म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए राहत सामग्री भेजी थी। बांग्लादेश के मदद मांगने पर बिना देर किए भारत ने चावल, गेहूं, दाल, चीनी, नमक, खाद्य तेल, नूड्ल्स, बिस्किट, मच्छरदानी वगैरह की पहली खेप के साथ वायु सेना का विमान भेज दिया। विदेश मंत्रालय की निगरानी में ‘ऑपरेशन इंसानियत’ नाम से वहां राहत कार्यक्रम चलाया गया।

6. श्रीलंका ईंधन संकट: संकटमोचक बनी मोदी सरकार
श्रीलंका को नवंबर, 2017 में पेट्रोल और डीजल की जबरदस्त किल्लत का सामना करना पड़ा। श्रीलंका में ईंधन की कमी के बीच राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बताया कि भारत, श्रीलंका को अतिरिक्त ईंधन भेज रहा है और विकास में सहयोग के लिए भारत के सतत समर्थन का भरोसा भी दिलाया। इसके पहले मई,2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकटग्रस्त श्रीलंका के लिए राहत भेजी थी। यहां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने भारी तबाही मचायी थी, जिसमें 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे और 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

7. बिहार में बाढ़ के खतरे को टाला
अगस्त 2014 में नेपाल में भू-स्खलन हुआ और भोटे कोसी नदी में मलबा जमा हो गया। नेपाल सरकार ने जमे मलबे को हटाने के लिए विस्फोट करने का फैसला किया। लिहाजा सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, अररिया, मधुबनी, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा की करीब पच्चीस लाख आबादी पर जल प्रलय का खतरा मंडराने लगा। लेकिन पीएम मोदी की पहल पर नेपाल सरकार ने विस्फोट टालने का फैसला किया और जमा 28 लाख क्यूसेक पानी को नियंत्रित विस्फोट के जरिये धीरे-धीरे निकाला गया।

8. कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों की मदद
सितंबर 2014 में कश्मीर में भयंकर बाढ़ आई। बारिश, बाढ़ और भू-स्खलन ने तबाही मचा रखी थी। सड़कें, पुल, घर, फसलें बुरी तरह तबाह हो गईं थीं। घाटी में कई स्थानों पर 30 से 40 फुट तक पानी जमा हो गया था। हाहाकार मच गया, लोगों की जान पर बन आई थी। बाढ़ के पहले दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई सर्वेक्षण किया किया और तुरंत स्वर्ग को सैलाब के कहर से मुक्ति दिलाने का निर्णय किया। पीएम मोदी ने इस कार्य में सेना को लगा दिया और सेना ने देवदूत बनकर लगभग पांच लाख लोगों की जान बचाई।

9. आंध्र-ओडिशा में ‘हुदहुद’ से बचाव
अक्टूबर 2014 में हुदहुद चक्रवाती तूफान ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तबाही मचाई, लेकिन मौसम विभाग की सटीक जानकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अग्रिम रणनीति ने जानमाल का नुकसान बेहद कम कर दिया। समय रहते तटीय इलाकों को खाली करा लिया गया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्राकृतिक आपदा में केंद्र और राज्य सरकार दोनों ‘कंधे से कंधा मिलाकर’ काम किया और एक ‘मुश्किल’ समस्या से सफलतापूर्वक निपटा जा सका।

10. पूर्वोत्तर के भूकंप में भी संकटमोचक बने
4 जनवरी, 2016 को पूर्वोत्तर राज्यों में 6.7 तीव्रता का तेज भूकंप आया, जिसमें कम-से-कम 8 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए। मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में कई इमारतें या तो ध्वस्त हो गईं या क्षतिग्रस्त हो गईं। पूरा पूर्वोत्तर भूकंप की जद में था। प्रधानमंत्री के निर्देश पर सेना और वायु सेना राहत कार्य संभाला और एनडीएमए के कई दलों को मणिपुर, असम भेजा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को राहत कार्य का जिम्मा सौंप दिया लेकिन स्वयं मॉनिटरिंग करते रहे। इसी का नतीजा रहा कि शुरुआती दौर में नुकसान के बाद कोई हानि नहीं होने दी गई।

11. उत्तराखंड बाढ़ में राहत पहुंचाई
अगस्त 2016 में उत्तराखंड में प्रलयकारी बाढ़ आई। तब केंद्र की सरकार ने एनडीआरएफ और सेना की मदद से राहत अभियान चलाया। इस अभियान में दूर-दराज के इलाकों में फंसे लोगों को बचाने में सफलता मिली। कई दिनों से भूखे प्यासे लोगों को एम-17 हेलीकॉप्टर की मदद से सेना ने सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया और उनकी जान बचायी।

12. चेन्नई में वरदा का कहर से बचाया
दिसंबर 2016 में चेन्नई में वरदा तूफान ने तबाही मचाई, 100 किलोमीटर की तेज रफ्तार से हवाएं चलीं, हजारों पेड़ उखड़ गए। दरअसल समय पूर्व आपदा प्रबंधन की वजह से तटीय इलाके के लोगों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे बहुत सारे लोगों की जान बच गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इसकी मॉनिटरिंग की और जानी नुकसान को कम करने में कामयाबी पायी।

LEAVE A REPLY