Home नरेंद्र मोदी विशेष मोदी शासन की डोर से भारतीय टेक्सटाइल की नई उड़ान

मोदी शासन की डोर से भारतीय टेक्सटाइल की नई उड़ान

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एसोचैम तथा रिसर्जेंट ने हाल ही में अपने संयुक्त अध्ययन के आधार पर जारी की रिपोर्ट में यह बात कही है कि अगले दो वर्षों में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग नई ऊंचाइयों को छूता हुआ 250 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा, जो कि वर्तमान में 150 अरब डॉलर है। इस अध्ययन से इस बात की पुष्टि होती है कि नोटबंदी के कारण जो तात्कालिक प्रभाव पड़े थे, अब यह उद्योग उससे उबर चुका है। यह तथ्य उस दूरदर्शितापूर्ण निर्णय की जीत है, जो मोदी सरकार ने देशहित में लिया था। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार के और कई ऐसे प्रयास हैं, जिनसे भारतीय वस्त्र उद्योग को नई दिशा-दशा मिली।

रोजगार की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र
भारत में कपड़ा उद्योग एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें बड़ी संख्या में समान रूप से स्त्री-पुरुष कार्यरत हैं। उल्लेखनीय है कि भारत में सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्योगों में टेक्सटाइल उद्योग का दूसरा स्थान है। निर्यात से होने वाली आय में 13 प्रतिशत सहभागिता रखते हुए, संपूर्ण जीडीपी में इसका योगदान 5 प्रतिशत है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2015-16 में 5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष रूप से तथा 68 करोड़ लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए थे। यहां इस बात का भी बहुत महत्त्व है कि कम पूंजी निवेश, मूल्य वृद्धि के उच्च अनुपात तथा देश के लिए निर्यात और विदेशी मुद्रा आय के सशक्त साधन के रूप में कपड़ा एवं हस्तशिल्प का क्षेत्र अपार संभावनाशील है

बनारसी साड़ियों को मिले अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व
मोदी सरकार अपनी योजनाओं द्वारा इस क्षेत्र के विकास के प्रति आरंभ से ही कटिबद्ध रही है। प्रधानमंत्री पद संभालने के कुछ ही समय बात नरेन्द्र मोदी ने बनारसी साड़ियों के लिए प्रख्यात वाराणसी के लालपुर में व्यापार सुविधा केंद्र एवं शिल्प संग्रहालय की आधारशिला रखी। अपनी अतुलनीय सुंदरता, रंगों एवं बनावट के लिए पहचानी जाने वाली बनारसी साड़ियां देश का गौरव हैं। इसके महत्त्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना ही इस केंद्र की स्थापना का उद्देश्य था। यह प्रयास मोदी सरकार ही था, अन्यथा पूरवर्ती सरकार के पास तो इस केंद्र को बनाने के लिए देने लायक जमीन भी नहीं थी, जिसके चलते इसे शहर के बीच बनाए जाने की बजाय शहर से दूर बनाना पड़ा। सरकारी उपेक्षा का शिकार रहा यह उद्योग भयानक बदहाली झेल रहा था। मोदी सरकार के प्रयासों से इस उद्योग और इसके बुनकरों को बड़ी राहत मिली।

मोदी सरकार के प्रयासों से बदली दशा-दिशा
बनारसी साड़ी बनाने के अतिरिक्त यहां और भी कई लघु एवं कुटीर उद्योग थे, जिन्हें सरकारी सहायता की घोर आवश्यकता थी। मोदी सरकार ने इन सभी के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए 347 करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाओं का मूल भी ऐसे ही वर्गों का विकास है। यहां के हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को तकनीकी व विपणन संबंधी सहयोग प्रदान करने के लिए यहां 305 करोड़ की लागत से टेक्सटाइल फैसिलिटेशन की शुरुआत हुई। बुनकरों की विशेष सुविधा के लिए कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर खोले गए। वाराणसी में 6 करोड़ रुपये की लागत वाला नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की शाखा स्थापित हुई। रीजनल सिल्क टेक्नोलॉजिकल रिसर्च स्टेशन भी शुरू हुआ। इन सभी के साथ-साथ 31 करोड़ की लागत वाली हस्तशिल्प उद्योग सर्वांगीण विकास योजना आरंभ की गई।

प्रधानमंत्री के आह्वान से और बढ़ा खादी का गौरव
भारतीय खादी व हस्तशिल्प की दिशा में किए गए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से शायद ही कोई देशवासी होगा, जो परिचित न हो। रेडियो पर ‘मन की बात’ से लेकर अपनी अनेक योजनाओं तक प्रधानमंत्री ने इस उद्योग के उत्थान के लिए अनेक प्रयास किए। उन्होंने सभी देशवासियों को भी इस के लिए प्रेरित किया कि वे अपने निजी जीवन में खादी को और अन्य हस्तशिल्प की वस्तुओं को अवश्य स्थान दें, चाहे वह कितने भी छोटे से छोटे रूप में क्यों न हो। दूसरों को उपहार आदि देते समय भी वे इसी प्रकार की वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं।

दोतरफा नीतियों का चौतरफा लाभ
यह स्थिति भी संतोषजनक है कि भारतीय खादी और हस्तशिल्प के प्रति विदेशों में भी रुझान देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय में दोतरफा नीति अपनाई। एक ओर तो उन्होंने वस्त्र उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल के उत्पादन के लिए किसानों को प्रेरित किया, ताकि उन्हें बड़ा लाभ मिल सके। दूसरी ओर उन्होंने इस उद्योग से जुड़े लोगों को नई से नई तकनीक और व्यवसायगत प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित किया। इस संबंध में उन्होंने समय-समय पर राज्य सरकारों से भी संपर्क बनाए रखा और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। कभी स्वतंत्रता संग्राम में देश का गौरव बढ़ाने वाली खादी को आज अपना अस्तित्व बचाने के लिए देश से सहयोग की अपेक्षा है, जिसे सशक्त स्वर दिया प्रधानमंत्री मोदी ने।

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