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गरीब-गुरबों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार

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लोकसभा चुनाव जीतने के बाद 20 मई, 2014 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में नरेन्द्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना गया था। इसके बाद उन्होंने अपना संबोधन देते हुए कहा, ”सरकार वह हो जो गरीबों के लिए सोचे, सरकार गरीबों को सुने, गरीबों के लिए जिए, इसलिए नई सरकार देश के गरीबों को समर्पित है। देश के युवाओं, मां-बहनों को समर्पित है। यह सरकार गरीब, शोषित, वंचितों के लिए है। उनकी आशाएं पूरी हो, यही हमारा प्रयास रहेगा।”

बीते साढ़े तीन साल के प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल पर ध्यान दें तो उनकी कही गई बात अक्षरश: सही है। उन्होंने देश के गरीबों के उत्थान के लिए कई कार्यक्रम किए, नई योजनाएं बनाईं और यह भी ध्यान रखा कि गरीबों की आशा आकांक्षाएं पूरी हो सके। आइये मोदी सरकार द्वारा किए गए कुछ पहल और योजनाओं के बारे में जानते हैं जो पूर्णत: देश की गरीब जनता को समर्पित हैं-

2025 तक टीबी मुक्त होगा भारत
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी को 25 साल पहले आपातकाल वाली बीमारी घोषित किया था। शोषित और वंचित समाज के बीच इसका अधिक प्रसार है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे मिशन मोड में देश से निर्मूल करने के लिए 13 मार्च, 2018 को एक अभियान की शुरुआत की । दुनिया में इस बीमारी के निर्मूलन के लिए 2030 का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन पीएम मोदी ने इस लक्ष्य को 2025 तक कर दिया है।

इंद्रधनुष योजना से स्वस्थ होता समाज
देश में सभी बच्चों को टीकाकरण के तहत लाने के लिए 25 दिसंबर, 2014 को मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की। इसके तहत सरकार देश के उन इलाकों तक टीकाकरण अभियान को पहुंचा रही है, जहां पहले से चले आ रहे टीकाकरण अभियानों की पहुंच नहीं थी। पहले सरकार का लक्ष्य 2020 तक देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज को हासिल करना था अब इसे 2018 तक हासिल करने के लिए मिशन इंद्रधनुष के साथ ही ‘इंटेन्सिफाइड मिशन इंद्रधनुष’ की शुरुआत की गई है।

आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य क्रांति
वर्ष 2018 के आम बजट में आयुष्मान भारत के नाम से एक योजना का प्रावधान किया गया है। इससे देश के हर गरीब को इलाज की सुविधा मिलेगी। मोदी केयर के नाम से चर्चित इस योजना के अंतर्गत देश के 10 करोड़ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मुफ्त में पांच लाख रुपये का चिकित्सा बीमा उपलब्ध कराया जाएगा

जन धन योजना से आर्थिक सशक्तिकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को गरीबों को बैंकों से जोड़ने के लिए जन धन योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत न सिर्फ 30 करोड़ से ज्यादा गरीबों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया, बल्कि जुलाई, 2017 तक 64,431 करोड़ रुपये से अधिक उनके खाते में जमा हो गए।

जीवन ज्योति योजना से नई रोशनी
09 मई, 2015 को ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत 330 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख का बीमा दिया जाता है।  

सुरक्षा बीमा योजना से सुरक्षित भविष्य
9 मई, 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने तीन योजनाओं की शुरुआत की। इनमें सुरक्षा बीमा योजना है जिसका प्रीमियम मात्र 12 रुपये वार्षिक है। सुरक्षा बीमा योजना के तहत दो लाख तक का दुर्घटना बीमा मिलता है।

खुले में शौच से मुक्ति अभियान
देश में खुले में शौच एक बड़ी समस्या है। विशेषकर गरीबों के बस की बात नहीं होती थी कि वह शौचालय का निर्माण करा सके। केंद्र सरकार ने जरूरतमंदों को 12 हजार रुपये की सहायता दी जिसके बाद देश के ग्रामीण इलाकों में करीब 4 करोड़ से अधिक और शहरों में करीब 31 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया।

गरीबों के लिए सुनिश्चित आवास
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 2019 तक एक करोड़ गरीबों को पक्के मकान देने की तैयारी है। जबकि शहरों में 2022 तक दो करोड़ गरीबों को पक्का घर बना के दिया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्त्वाकांक्षी योजना को युद्धस्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके लिये सरकार युद्धस्तर पर जुट गई है। जाहिर है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मूल रूप से दलित, पिछड़े और आदिवासियों को ही इसका फायदा मिलेगा।

उज्ज्वला योजना से धुएं से मुक्ति
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कुल 8 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए जाने हैं। 1 मई 2016 को योजना शुरू होने के बाद से अब तक 3 करोड़ 28 लाख से ज्यादा महिलाओं को गैस कनेक्शन दिये जा चुके हैं। उज्ज्वला योजना ने ग्रामीण और गरीब महिलाओं के जीवन के प्रति नजरिये को सकारात्मक रूप से बदलने का काम किया है।

सुरक्षित मातृत्व अभियान में जननी की चिंता
वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) की शुरुआत हुई। इस अभियान के माध्यम से अब तक एक करोड़ से अधिक महिलाएं लाभांवित हो चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को पीएमएसएमए का लाभ मिला है। योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है।

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की शुरुआत
गरीबों को सस्ती और सुलभ दवाएं सुनिश्चित करना इस सरकार की प्राथमिकता में रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017) के तहत खोले गए प्रधानमंत्री जन-औषधि केंद्र के माध्यम से मामूली कीमतों पर जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं। जन औषधि स्टोर से गरीबों के लिए सस्ती दवाओं के साथ उन्हें मुफ्त जांच करवाने की सुविधा भी दी जा रही है।

एलईडी बल्ब योजना से दूर हो रहा अंधेरा
मोदी सरकार का लक्ष्य गरीबों तक बिजली के सस्ते संसाधन पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। इसी के तहत उजाला योजना की शुरात की गई। इस योजना के तहत आम घरों में एलईडी बल्ब बांटे जा रहे हैं। मोदी सरकार 27 फरवरी 2018 तक इस योजना के तहत 29,1,98,431 बल्ब बांट चुकी है। एलईडी बल्बों से जहां 37,687 मिलियन किलोवाट बिजली की खपत में कमी आई है, वहीं हर वर्ष 15,075 करोड़ रुपये भी बच रहे हैं। एलईडी बल्ब के प्रयोग से लगभग 25 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम बचाई जा चुकी है।

सौभाग्य योजना से घर-घर बिजली
मोदी सरकार ने आते ही यह पता लगाया कि 18, 452 गांवों में आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पहुंची है। 1 मई, 2018 तक हर गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पर 75, 600 करोड़ रुपये खर्च करना तय हुआ। बीते तीन सालों में 20 जुलाई, 2017 तक 13, 990 से ज्यादा गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के 5, 97, 464 गांवों में से 594,006 गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है। ये संख्या भारत के कुल गांवों का 99.4 प्रतिशत है। दलित-आदिवासी और पिछड़े जो अब तक अंधेरे में रहने को मजबूर थे, उन्हें रोशनी मिल गयी है। ये लोकप्रियता के लिये नहीं हो रहा है, ये गरीबों के कल्याण के लिये है।

100 पिछड़े जिलों का उत्थान योजना
पिछड़ों और गरीबों के कल्याण के लिये मोदी सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगता है कि सरकार ने सबसे पहले देश के सबसे पिछड़े 100 जिलों में ही पहले विकास की योजना बनाई है। इस योजना पर नीति आयोग बाकी संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से काम करेगा। ये बात किसी से छिपी नहीं कि सबसे पिछड़े जिलों का मतलब क्या है? ये वो जिले होते हैं जहां आम तौर पर दलित और आदिवासियों की तादाद अधिक होती है। यानी मोदी सरकार की नजर जरूरतमंदों के उत्थान पर है, अपनी लोकप्रियता पर नहीं।

आदिवासी कल्याण के लिए बजट में वृद्धि
केंद्रीय बजट 2018-19 में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आवंटन में वृद्धि का प्रस्ताव किया गया है। अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए धन के आवंटन को बढ़ाकर क्रमश: 56,619 करोड़ रुपये और 39,135 करोड़ रुपये किया गया। इससे पहले के भी बजट में आदिवासी कल्याण के लिए मोदी सरकार ने लगातार बजटीय वृद्धि की है। वर्ष 2016-17 में 4827.00 करोड़ से बढ़कर  वर्ष 2017-18 में  5329.00 करोड़ कर दिया गया।

72 नए एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी
पिछले तीन वर्षों में 51 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल  बनाए गए। 2017-18 में 14 ऐसे स्कूलों को मंजूरी दी गई जिसके लिए 322.10 करोड़ की राशि जारी की गई। अब 190 से बढ़ाकर ऐसे 271 स्कूलों की मंजूरी मंत्रालय दे चुका है । केंद्र में एनडीए सरकार बनने से पहले देश में महज 110 ईएमआरएस चल रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनजातीय शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के चलते महज तीन वर्षों में 51 ईएमआरएस शुरू हुए। इस वक्त देश के  कुल 161 ईएमआरएस विद्यालयों में 52 हजार से ज्यादा आदिवासी छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 72 नए ईएमआरएस विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की है।

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