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रोजगार सृजन में अव्वल है मोदी सरकार

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अमेरिका के प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में छात्रों से मुलाकात के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार रोजगार पैदा करने में फेल रही है। लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ अलग है।

दरअसल पिछली यूपीए सरकार के दौर में अर्थव्यवस्था की मंदी और रोजगार के कम अवसर के कारण मोदी सरकार के समक्ष बड़ी चुनौतियां थीं, लेकिन मोदी सरकार ने प्रत्यक्ष रोजगार सृजन के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर नीतियां बनाईं हैं और उन्हें जमीन पर उतारा भी है। आइये देखते हैं कि मोदी सरकार में किस तरह से बढ़े रोजगार के अवसर-

मुद्रा योजना से बढ़े स्वरोजगार के अवसर
मुद्रा योजना के तहत अगस्त के आखिरी हफ्ते तक 8.19 करोड़ लोगों ने ऋण लिया है। यदि कम से कम एक व्यक्ति के रोजगार मिलने का भी औसत मान लिया जाये तो 8.19 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। इस योजना के तहत अब तक 3.42 लाख करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं जिनमें ज्यादातर लघु उद्यमी हैं। इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है जो इससे पहले किसी भी प्रकार के व्यवसाय से नहीं जुड़े थे। मुद्रा ऋण 10 लाख रुपए तक के गैर-कृषि कार्यकलापों के लिए उपलब्ध है।

मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। इस योजना के तहत 30 अगस्त तक 8,63,78,23 लोग लाभ ले चुके हैं, इनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। यानि लगभग छह करोड़ से अधिक महिलाओं ने इसका लाभ उठाया है।

IT सेक्टर में अपार नौकरियां
NASSCOM ने दावा किया कि अगले दशक तक IT सेक्टर 20 से 25 लाख नौकरियों के अवसर बनाने जा रहा है। 2001 में जहां महज 4.3 लाख लोग IT सेक्टर से जुड़े थे, आज IT कंपनियों से जुड़े लोगों की तादाद बढ़कर 40 लाख हो गयी है। 2025 तक यह संख्या 60 से 65 लाख हो जाने का अनुमान है।

दरअसल 154 करोड़ डॉलर का आईटी क्षेत्र देश के लगभग 40 लाख युवाओं को नौकरी देने की क्षमता रखता है। NASSCOM का अनुमान है कि 2025 तक देश में आईटी क्षेत्र का कारोबार 350 करोड़ डॉलर का होगा। आईटी के नये क्षेत्रों जैसे साइबर सुरक्षा, मोबाइल एप, सोशल मीडिया प्लेटफार्म, इंजीनियरिंग, बिग डाटा ऐनालिटिक्स, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश, मशीन लर्निंग और नैचुरल लैग्वेंज प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में अधिक संभावनाएं हैं।

घर से रोजगार कर रहीं 20 लाख महिलाएं
एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में घर से बैठकर कम से कम 20 लाख महिलाएं 8 से 9 अरब डॉलर का व्यापार कर रही हैं, जिसमें आने वाले समय में और वृद्धि होने की संभावना है। डिजिटल लेनदेन के सरकार के प्रयासों में अब होममेकर्स भी बढ़-चढ़कर हाथ बंटा रही हैं। व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वो अपने द्वारा बनाये गए सामान को लोगों तक पहुंचा रही हैं। ऑनलाइन रीसेलिंग का व्यापार करने वाली महिलाओं की संख्या में अगले पांच सालों में हर वर्ष 50 से 60 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसके साथ ही 2022 तक ये व्यापार 48 से 60 अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है।

ग्रामीण रोजगार के लिए ‘आजीविका एक्सप्रेस’
आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है, इस योजना के तहत पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं परिचालित करने के सुविधा प्रदान करवाना है। यह उप-योजना 2017-18 से 2019-20 तक 3 वर्षों की अवधि के लिए एक पायलट आधार पर देश के 250 ब्लॉकों में लागू की गई है।

इस योजना के मुख्य उद्देश्य डीएवाई-एनआरएलएम के तहत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों को आजीविका के वैकल्पिक स्रोत उपलब्‍ध कराना है। इसके तहत उन्‍हें पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं परिचालित करने की सुविधा प्रदान की जाएगी। इससे ई-रिक्शा, 3 और 4 व्हीलर मोटर परिवहन वाहनों जैसी सुरक्षित और सस्‍ती सामुदायिक निगरानी वाली ग्रामीण परिवहन सेवाएं उपलब्ध होंगी।

स्किल डेवलपमेंट से बढ़े रोजगार के अवसर
कौशल विकास के तहत अब तक 56 लाख से ज्यादा युवा प्रशिक्षित किये जा चुके हैं जिनमें से करीब 24 लाख अपने हुनर से जुड़े क्षेत्र में रोजगार पा चुके हैं। दरअसल देश में पहली बार मोदी सरकार ने ही स्किल डेवलपमेंट को लेकर एक समग्र और राष्ट्रीय नीति तैयार की। इसके लिए 21 मंत्रालयों और 50 विभागों में फैले कौशल विकास के कार्य को विशेष तौर पर गठित हुए कौशल विकास मंत्रालय के अधीन लाया गया है। 12,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू हुई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चार साल में एक करोड़ युवकों को प्रशिक्षित करना है। आंकड़े बताते हैं कि रियल एस्टेट और रिटेल समेत देश के कम से कम 24 सेक्टरों में आने वाले पांच सालों में करीब 12 करोड़ स्किल्ड कामगारों की आवश्यकता होगी, जहां सरकार की योजनाओं के तहत प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर होंगे।

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