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तुष्टिकरण के बगैर मोदी राज में अल्पसंख्यक समुदाय का हो रहा है विकास

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर काम कर रही है। इसी सोच के साथ मोदी सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के विकास और बेहतर जीवन के लिए एक के बाद एक कई योजनाएं ला रही है। अल्पसंख्यकों के कल्याण और समावेशी विकास के लिए डेडिकेटेड अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय बनाया हुआ है। मोदी सरकार की योजनाओं का ही असर है कि बिना तुष्टिकरण के अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति बेहतर हो रही है।

सरकारी नौकरी में अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़ी
मोदी सरकार के आने से पहले वर्ष 2014 में सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी मात्र पांच फीसदी थी। मोदी सरकार आने के तीन साल बाद सरकारी नौकरी में 2017 में अल्पसंख्यकों की भागीदारी नौ फीसदी से भी अधिक हो गई।

पहली बार सिविल सेवा में चुने गए सर्वाधिक अल्पसंख्यक
सिविल सेवा परीक्षा में अल्पसंख्यक वर्ग के सफल उम्मीदवारों की संख्या में लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष सिविल सेवा में 120 से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के युवा चयनित हुए हैं जिनमें से 52 मुस्लिम समुदाय से हैं। आजादी के बाद पहली बार अल्पसंख्यक समुदाय के इतने उम्मीदवार सिविल सेवा में चयनित हुए हैं।

सीखो और कमाओ योजना
अल्पसंख्यक समुदाय के रोजगार के लिए सरकार ‘सीखो और कमाओ’ योजना लेकर आई। इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं की योग्यता, बाजार में संभावना को देखते हुए उनकी कौशल क्षमता को और बढ़ाना है। ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को बेहतर रोजगार प्राप्त हो सके। इस योजना के तहत कम से कम 75 प्रतिशत प्रशिक्षुओं का रोजगार सुनिश्चित किया गया है और इसमें से कम से कम 50 प्रतिशत नियोजन संगठित क्षेत्र में होगा। योजना का कार्यान्वयन केरल सहित पूरे देश में चुनिंदा परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईएज) के माध्यम से किया जाता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान अकेले केरल से 1700 अल्पसंख्यक युवाओं को पीआईएज ने प्रशिक्षित किया है।

प्रोग्रेस पंचायत योजना
साल 2016 को हरियाणा के मेवात जिले से ‘प्रोग्रेस पंचायत’ की शुरुआत हुई। हरियाणा के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों में यह आयोजित हुई। प्रोगेस पंचायत के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी पंचायत के लोगों तक पहुंचाई जाती है।

उस्ताद योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अल्पसंख्यकों की पारंपरिक कला और समुदाय से संबंधित हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास तथा प्रशिक्षण योजना ‘उस्ताद’ शुरू की गई। इस योजना उद्देश्य अल्पसंख्यक कामगारों को बड़े बाजार नेटवर्क का हिस्सा बनाना है।

उड़ान योजना
अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ्री कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए ‘नई उड़ान’ योजना लागू की गई। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार के ग्रुप ‘A’, ‘B’, ‘C’ सहित बाकी सभी समकक्ष पदों के लिए तैयारी भी इस योजना में शामिल है। स्कीम के अंतर्गत लोकल छात्रों को 1,500 रुपये और घर से बाहर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को 3,000 रुपये दिए जाते हैं।

नई मंजिल योजना
नई मंजिल योजना 8 अगस्त, 2015 से शुरू हुई। उसका उद्देश्य उन अल्पसंख्यक युवाओं को लाभ पहुंचाना है जिनके पास औपचारिक स्कूल प्रमाणपत्र नहीं है, बीच में स्कूल छोड़ दिये या फिर मदरसों जैसे सामुदायिक शिक्षा संस्थानों में पढ़े हैं। उन्हें औपचारिक शिक्षा तथा कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से तथा उनको संगठित क्षेत्र में बेहतर रोजगार प्राप्त करने के योग्य बनाने के लिए सरकार ने योजना बनाई। इसके तहत एक कोर्स शुरू किया गया जो एक साल का है। इस कोर्स में अल्पसंख्यक छात्रों में निखार लाया जाएगा और उन्हें अन्य छात्रों की तरह बोर्ड परीक्षा देने योग्य बनाया जाएगा। यह कोर्स सभी विश्वविद्यालयों में मान्य होगा।

नए शिक्षा और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना
देशभर में 100 गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र खोले गए जहां अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के लिए विभिन्न रोजगार आधारित पाठ्यक्रम कराए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक आबादी बहुल इलाकों में गुरुकुल की तरह 39 आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। साथ ही, सद्भाव मंडप बनवाए गए हैं, जिसके तहत 809 विद्यालय भवन, 10 डिग्री कॉलेज, 371 छात्रावास, 1392 शौचालयों व पेयजल सुविधाओं के अलावा 53 आईटीआई और बहुउद्देशीय समुदाय केंद्रों का निर्माण कराया गया है।

थ्री ई – एजुकेशन, इम्पलायमेंट एवे इम्पावरमेंट
मोदी सरकार का नारा है सबका साथ, सबका विकास। इसी मंत्र को साकार करने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने समावेशी विकास की कई नीतियां और योजनाएं धरातल पर उतारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों की बुनियादी विकास की नीतियों को ‘3ई’ के जरिये गति प्रदान की है। एजुकेशन, इम्पलायमेंट एवं इमपावरमेंट- को आधार बनाकर विकास की मुख्यधारा में अल्पसंख्यक समुदायों के गरीबों, पिछड़ों तथा निर्बल वर्गों को शामिल करने की सोच के साथ कई योजनाएं आगे बढ़ रहीं हैं।

मुस्लिम लड़कियों के लिए शादी शगुन योजना
अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को उच्च शिक्षा के मकसद से प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार उन अल्पसंख्यक लड़कियों को 51,000 रुपये की राशि बतौर ‘शादी शगुन’ देगी जो स्नातक की पढ़ाई पूरी करेंगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ (एमएईएफ) ने मुस्लिम लड़कियों की मदद के लिए यह कदम उठाने का फैसला किया। एमएईएफ का कहना है कि इस योजना का मकसद सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम लड़कियों और उनके अभिभावकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है कि लड़कियां विश्वविद्यालय या कॉलेज स्तर की पढ़ाई पूरी कर सकें। इस कदम को अभी आरंभिक तौर पर ‘शादी शगुन’ नाम दिया गया है।

टॉयलेट, टिफिन और टीचर
मुख्यधारा की शिक्षा देने वाले मदरसों की मदद करने और पारंपरिक शिक्षा केंद्र को आधुनिक बनाने के लिए सरकार थ्री टी योजना लागू की है। थ्री टी यानी टॉयलेट, टिफिन और टीचर। इस वित्तीय वर्ष में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने देशभर के मदरसों में एक लाख से ज्यादा शौचालय बनवाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यधारा की शिक्षा देने वाले मदरसों में बच्चों को ‘मिड डे मील’ या ‘मध्याह्न भोजन योजना’ शुरू कर दिया है। इसके अलावा मंत्रालय ने मदरसा टीचरों के लिए ‘अपग्रेड कौशल योजना’ भी शुरू करने का फैसला किया है, इससे शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्हें समय की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित भी किया जा सके। 

अल्पसंख्यकों की योजना के लिए बढ़ाया बजट 
अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक सशक्तिकरण के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बड़ी वृद्धि की। 2017-18 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 4195 करोड़ रुपए कर दिया गया। पिछले साल बजट 3800 करोड़ रूपए के मुकाबले 9.6 प्रतिशत अधिक है। बजट में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए 2014-15 में 3411 करोड़, 2015-16 में 3712 करोड़, 2016-17 में 3800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था।

यूएसटीटीएडी – परंपरागत कलाओं के विकास और प्रशिक्षण का उन्नयन 
अल्पसंख्यकों की परंपरागत कलाओं के संरक्षण के लिए 14 मई, 2015 को यूएसटीटीएडी योजना शुरू की गई। इसके तहत मास्टर शिल्पियों और कर्मकारों के परंपरागत कौशल को state of the art बनाना तथा क्षमता निर्माण करना, अल्पसंख्यकों की चिन्हित परंपरागत कलाओं\शिल्पों का प्रलेखन, परंपरागत कौशलों के मानक निर्धारित करना, मास्टर शिल्पियों के माध्यम से पहचान की गयी विभिन्न परंपरागत कलाओं/शिल्पों में अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षण देना तथा राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय बाजार संपर्क बढ़ाना है।

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