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ये हैं असहिष्णुता के असली खलनायक!

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देश में जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, विरोधियों ने एक शब्द पर सबसे अधिक छाती पीटा है। ये शब्द है ‘असहिष्णुता’। एक तरफ पीएम मोदी तीन साल से बिना रुके, बिना कोई छुट्टी लिए देश को जोड़ने में लगे हैं। लेकिन विरोधी गैंग देश को तोड़ने के लिए तिकड़म पर तिकड़म रचे जा रहे हैं। कभी याचक की भूमिका में वो पाकिस्तान पहुंच जाते हैं, तो कभी भारत की अस्मिता की प्रतीक गो माता की सरेआम हत्या कर देते हैं। अगर इस गैंग की चाल-ढाल पर बारीकी से नजर दौड़ाएं तो पता चलेगा कि असल में यही लोग देश की वसुधैव कुटुंबकम वाली संस्कृति में ‘असहिष्णुता की विचारधारा के जनक’ हैं।

मोदी विरोध की बड़ी साजिश

करीब दो साल पहले की बात है। पूरे देश में अचानक से एक नकारात्मक माहौल पैदा होना शुरू हो गया। फ्री स्पीच के नाम पर देश के टुकड़े करने के नारे लगाए जाने लगे। देश को तोड़ने वालों के समर्थन में मानवाधिकार संगठनों के लोग, तथाकथित बुद्धिजीवी और मीडिया वालों ने रोना-पीटना चालू कर दिया। इसी कोलाहल के बीच कुछ तथाकथित साहित्यकारों और विद्वानों ने विरोध के नाम पर अपने अवॉर्ड लौटाने शुरू कर दिए। बताया जाने लगा कि देश में असहिष्णुता बढ़ती जा रही है। इस शब्द का अर्थ निकालें तो ‘दूसरों के विचार, विश्वास और व्यवहार को स्वीकार नहीं करना है’। लेकिन अगर हम इतिहास को टटोलों तो ऐसी स्थिति तो मुस्लिम आक्रमणों के बाद से लेकर कांग्रेस के शासनों में ही अधिक रही है। फिर इतना हंगामा क्यों काटा जा रहा है ? यानी कुछ न कुछ गड़बड़ है? पड़ताल करने पर साफ हो जाता है कि असहिष्णुता के नाम पर देश को बदनाम करने की पूरी साजिश में उन्हीं लोगों का हाथ है, जो मोदी सरकार के आने से पहले तक किसी न किसी रूप में सत्ता से उपकृत हो रहे थे। उनकी असली असहिष्णुता मोदी सरकार से थी, जिसके चलते उनका गोरखधंधा चौपट हुआ था।

असहिष्णुता के असली खलनायक
दो साल पहले असहिष्णुता के नाम पर जिन लोगों ने देश को बदनाम करने वालों का साथ दिया था। अभी हाल के दिनों की घटनाओं पर गौर करें तो आपको पता चलेगा कि असल में वही असली असहिष्णुता की मानसिकता से ग्रसित हैं। ये असहिष्णुता है देश को तोड़ने वालों की, देश के लिए जिंदगी दांव पर लगाने वाले जवानों को अपमानित करने वालों की, आस्था का गला रेतकर कुत्सित मानसिकता का नंगा नाच करने वालों की।

कांग्रेस
हत्या के लिए पशुओं की खरीद-बिक्री रोकने का विरोध करने का जो तरीका कांग्रेस ने अपनाया असहिष्णुता का उससे बड़ा उदाहरण शायद कोई हो ही नहीं सकता। इसमें पार्टी नेतृत्व के एक करीबी नेता ने तसल्ली से सोच-विचार कर सरेआम एक गाय को इसीलिए काट दिया क्योंकि उसे सरकार के फैसले का विरोध करना था।

राहुल गांधी
कांग्रेस उपाध्यक्ष का हिंदुओं के प्रति उदासीनता का भाव किसी से छिपा नहीं था। हो सकता है कि पारिवारिक परिस्थितियों के चलते ये उनकी मजबूरी रही हो। लेकिन अब उन्होंने स्वयं ही स्वीकार कर लिया है कि वो बीजेपी और आरएसएस को जवाब देने के लिए गीता और उपनिषद पढ़ने को भी तैयार हैं। राहुल की इस स्वीकारोक्ति में भी असहिष्णुता की झलक साफ है। वो अभी भी हिंदू धर्म और हिंदुओं को समझने के लिए ऐसा नहीं कर रहे हैं, वो तो अपने राजनीतिक भाग्य चमकाने की उम्मीदों से एक कोर्स पूरा करना चाहते हैं।

मणिशंकर अय्यर
कांग्रेस के इस नेता की असहिष्णता का स्तर देखिए कि प्रधानमंत्री मोदी का विरोध जताने के लिए पाकिस्तान के सामने याचक बनकर पहुंच चुके हैं। इनकी नसों में इनकी पार्टी की संस्कृति ही दौड़ती है। यही नहीं अभी हाल ही में इस नेता ने कश्मीरी अलगाववादियों की पैरोकारी में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन इनकी ढिठई देखिए कि जब एक पत्रकार ने इनसे इनकी मानसिकता पर सवाल किया तो वो अपने ही देश के पत्रकार को राष्ट्रद्रोही कह बैठे। अपने ही देश के प्रति ऐसी असहिष्णुता का उदाहरण क्या दुनिया में कहीं भी देखने को मिल सकता है?

संदीप दीक्षित
दुनिया जानती है कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की चालबाजियों और कुछ मुट्ठीभर देशद्रोहियों का हमारी सेना किस तरह से सामना कर रही है। अपने देश के किसी आम नागरिक का बाल भी बांका न हो इसीलिए वो अपनी जान पर खेल जाती है, फिर भी शक्ति का प्रयोग करने से बचती है। लेकिन सोनिया-राहुल एंड फैमिली की पार्टी का ये नेता अपने ही सेनाप्रमुख की तुलना सड़क छाप गुंडे से कर देता है। इनकी परेशानी ये है कि जिन आतंकवादियों और देशद्रोहियों की ये अब तक हौंसला बढ़ाते रहे हैं, हमारी सेना उन्हें गिन-गिन कर ठिखाने लगा रही है। जो नेता या पार्टी देश के प्रति सहिष्णु नहीं हो सका वो कितना बड़ा असहिष्णु होगा इसकी कल्पना की जा सकती है।

प्रकाश एवं बृंदा करता
ये नेता उस सीपीएम का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो राजनीतिक हत्या करवाने के लिए कुख्यात रही है। लेकिन इनके लिए आतंकवादियों के खिलाफ सेना की कार्रवाई असहिष्णुता है। इसके लिए ये सेनाप्रमुख को भी अपमानित करने से नहीं चूकते। दरअसल इनकी ये करतूत ही वास्तव में असहिष्णुता है।

फारूक अब्दुल्लाह
ये साहब कई बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। इनके परिवार का अधिकतर समय यूरोप में बीतता आया है। लेकिन अब इनको लगता है कि जम्मू-कश्मीर में देश के जवानों पर पत्थरबाजी करने वाले भारत के विरोध में लड़कर सही कर रहे हैं। अपने देश के सैनिकों के साथ ऐसी गद्दारी असहिष्णुता नहीं तो क्या है ?

लालू यादव
देश के सबसे भ्रष्टाचारी नेता के रूप में कुख्यात लालू यादव सवाल पूछने वालों को नहीं छोड़ते। वो अपने घोटालों के बारे में सवाल पूछने पर पत्रकार को पीटने की धमकी देते हैं। आतंकवादियों से साठगांठ रखने वाला हत्या का एक मुजरिम इनके दिल में बसता है। लेकिन फिर भी इनसे सवाल पूछना गुनाह है, जेल में पड़े शहाबुद्धीन जैसे अपराधियों के दम पर ये कुछ भी करने का हौंसला रखते हैं। अगर ये असहिष्णुता नहीं तो क्या है?

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