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राष्ट्रपति चुनाव ने खोली विपक्षी एकजुटता की पोल, क्रॉस वोटिंग से एंटी मोदी कैंप में हड़कंप

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राष्ट्रपति चुनाव में संसद से लेकर अधिकतर विधानसभाओं में जबर्दस्त क्रॉस वोटिंग हुई है। अगर इसके कारणों की पड़ताल करेंगे तो इसका जवाब भी मिल जाएगा। दरअसल क्रॉस वोटिंग करने वाले ये जनप्रतिनिधि वो लोग हैं, जिन्होंने देश की जनता का मूड भांप लिया है। यही कारण है कि जैसे-जैसे परिणाम का विश्लेषण हो रहा है अवसरवादी विपक्षी कैंप में हड़कंप मच गया है। गुजरात में तो कांग्रेस का दो फाड़ होना तय है। त्रिपुरा में टीएमसी विलुप्त हो गई है। ये तो सिर्फ उदाहरण हैं, कमोबेश ऐसी ही स्थिति देश के अधिकतर हिस्सों में बन चुकी है।

कहा जा रहा है कि एनडीए के उम्मीदवार और अगले राष्ट्रपति के तौर पर निर्वाचित श्री रामनाथ कोविंद को लगभग 115 विधायकों का अतिरिक्त समर्थन मिला है। यानी ये वो विधायक हैं जिन्होंने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान किया है। इसका असर संसद में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां विपक्षी खेमा 240 सांसदों के वोट की आस लगाये बैठा था, जबकि उसे सिर्फ 225 वोट से ही संतोष करना पड़ा। जबकि एनडीए प्रत्याशी को 522 वोट प्राप्त हुए।

एनडीए के पक्ष में कहां कितने विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग ?

राज्य क्रॉस वोटिंग             टिप्पणी
महाराष्ट्र 13 अधिकतर कांग्रेस विधायक
उत्तर प्रदेश 11 अधिकतर एसपी विधायक
गुजरात 10 कांग्रेस के 8 विधायक शामिल
कर्नाटक 08 अधिकतर कांग्रेस विधायक
त्रिपुरा 07 BJP का एक भी विधायक नहीं है
मध्य प्रदेश 06 कांग्रेस विधायक शामिल
राजस्थान 06 अधिकतर कांग्रेस विधायक
पश्चिम बंगाल 05 अधिकतर टीएमसी विधायक
हरियाणा 04 कांग्रेस विधायक शामिल
हिमचाल प्रदेश 04 अधिकतर कांग्रेस विधायक
असम 04 कांग्रेस विधायक शामिल
गोवा 03 कांग्रेस विधायक शामिल
दिल्ली 02 दोनों AAP विधायक
जम्मू-कश्मीर 02 —-
छत्तीसगढ़ 02 कांग्रेस विधायक शामिल

गुजरात में कांग्रेस का डब्बा गोल !
मोदी विरोधी गैंग गुजरात को लेकर बहुत आस लगाये बैठा था। लेकिन यहां वरिष्ठ कांग्रेसी शंकर सिंह वाघेला के औपचारिक विद्रोह से पहले ही कांग्रेस को 9 विधायकों ने जोरदार चपत लगाई है। कांग्रेस नेतृत्व माने या न माने लेकिन जनप्रतिनिधियों ने बता दिया कि उनकी नकारात्मक राजनीति अब जनता सहन नहीं करेगी।

राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस में हड़कंप
गुजरात में अपने विधायकों के मूड को देखकर कांग्रेस नेतृत्व के पैरों तले की जमीन खिसक गई है। 8 अगस्त को यहां राज्यसभा के लिये चुनाव होने हैं। अगर उस दिन भी कांग्रेस-एनसीपी के उन्हीं विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी निजी झटका लग सकता है। इसका कारण ये है कि कांग्रेस की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष के निकटतम सहयोगी अहमद पटेल चुनाव लड़ने वाले हैं। लेकिन क्रॉस वोटिंग के बाद उनका का सियासी खेल खत्म हो सकता है। ऊपर से वाघेला ने पार्टी नेतृत्व की नींद पहले से ही उड़ा रखी है।

त्रिपुरा में विलुप्त हुई टीएमसी!
कहा जाता है कि टीएमसी नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी छवि एक नकारात्मक नेता के रूप में विकसित कर ली है। ऐसा शायद इसीलिये हुआ है क्योंकि जनता ने उनपर बहुत भरोसा किया था, लेकिन वो चारों ओर से भ्रष्टाचार के दलदल में उलझती चली गईं। ऊपर से अपनी गलतियों को छिपाने के लिये उन्होंने पीएम मोदी का विरोध करना शुरू कर दिया। यही वजह है कि त्रिपुरा में उनकी पार्टी ने बगावत कर दिया है। यहां कोविंद को 7 वोट मिलने का महत्व इसीलिए भी है क्योंकि त्रिपुरा में बीजेपी का एक भी विधायक नहीं है।

पश्चिम बंगाल में भी हड़कंप
त्रिपुरा को छोड़िए पश्चिम बंगाल में भी धीरे-धीरे दीदी की सियासी जमीन खिसकती जा रही है। मुस्लिम तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार को दबाने के लिये उन्होंने जो मोदी विरोधी की नौटंकी चलाई है वैसी राजनीति अब जनता बर्दाश्त करने के लिये तैयार नहीं है।

AAP में भी फूटा विद्रोह
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों का क्रॉस वोटिंग करना साफ संकेत है कि पार्टी पर केजरीवाल की पकड़ ढीली पड़ चुकी है। पार्टी के दो सांसदों के क्रॉस वोटिंग की भी चर्चा है, हालांकि पार्टी उन्हें अपना मानने से ही इनकार करती है। दिल्ली में पहले एक विधानसभा सीट में बुरी तरह हारने और एमसीडी चुनावों में सफाये के बाद ये स्थिति साफ हो चुकी है कि राजधानी में पार्टी की जड़ें उखड़ती जा रही हैं। दरअसल नकारात्मकता की राजनीति में अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी के गुरु साबित हो चुके हैं।

अखिलेश के कुनबे में कलह बरकरार
यूपी में 11 विधायकों के क्रॉस वोटिंग के साफ मायने हैं कि समाजवादी पार्टी के जितने विधायक जीत कर आये हैं उनपर भी अखिलेश यादव की मजबूत पकड़ नहीं है। कहा जा रहा है कि शिवपाल यादव ने भतीजे का खेल खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके साथ चर्चा ये भी है कि अखिलेश अभी भी अपनी पसंद के मुताबिक ही चल रहे हैं, जनता की पसंद को समझने के लिये तैयार ही नहीं हैं।

कुल मिलाकर देश की स्थिति ऐसी लगती है जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के सामने कोई भी राजनीतिक चेहरा टिक ही नहीं पा रहा। कारण सिर्फ एक है पीएम मोदी देश संवारने में लगे हैं, लेकिन विपक्ष अपने ही देश पर कालिख पोछने में लगा रहता है। जनता इन बातों को अच्छी तरह समझ रही है। क्रॉस वोटिंग में जनता के उसी भाव को पढ़ा जा सकता है।

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