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एक नजर देश को लूटने वाले कांग्रेस पार्टी के तरीकों पर

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आजादी के बाद से देश पर सबसे लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें सत्ता में रहीं, लेकिन गरीबी का रोग खत्म नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि यह रोग लाइलाज है। भारत जैसे ही विशाल जनसंख्या वाले देश चीन ने तो राजनीतिक नेतृत्व और इच्छाशक्ति के बल पर दशकों पहले गरीबी को खत्म कर दिया है। कांग्रेस सत्तर के दशक से ही गरीबी हटाओ का नारा देकर सरकारें बनाती रही है, लेकिन आज भी हम गरीबी से लड़ रहे हैं। कांग्रेस की सरकारों की नाकामी के पीछे वो कांग्रेसी संस्कृति है, जिसमें भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद और सब चलता है की प्रवृत्ति पोषित और पल्लवित होती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी में प्रवासी भारतीय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में सरकार ने गरीबों को 5 लाख 78 हजार करोड़ रुपये सीधे खाते में देकर, जनता का करीब 90 हजार करोड़ रुपया बचाया है। प्रधानमंत्री मोदी के कहने का मतलब था कि कांग्रेस की सरकारों में लाखों करोड़ रुपये बिना किसी जवाबदेही के गरीबों के नाम पर बांट दिए जाते थे, ये रुपये गरीबों को मिलते भी थे या नहीं यह सरकार को पता भी नहीं चलता था। सरकार की इस अक्षमता को कांग्रेस सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वीकार करते हुए कहा था कि दिल्ली से चलने वाले एक रुपये में 15 पैसा ही जरूतमंदों के पास पहुंच पाता है बाकी का 85 पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। इस तरह से देश में आजादी के बाद से सरकारी खजाने का 85 प्रतिशत कांग्रेस की सरकारों में लूटा जाता था।

कांग्रेसी सरकारों के दौरान खजाने की लूट के लिए कई तरीके ईजाद किए गये थे। आज, आपको कांग्रेस के भ्रष्टाचार के तरीकों के बारे में बताते हैं-

गरीबों को मिलने वाली सब्सिडी को हजम करना

देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के भोजन, मकान, रोजगार इतयदि को उपल्बध कराने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार अपने इस संवैधानिक कर्तव्य को पूरा करने के लिए आम बजट से लाखों करोड़ रुपये विभिन्न मंत्रालयों को आवंटित करती है। लेकिन कांग्रेसी सरकारों के दौरान गरीबों के लिए विभिन्न मंत्रालयों  को दिए गए लाखों करोड़ रुपये किसे दिए गए और कैसे दिए गए इसका कोई प्रमाणिक आधार नहीं होता था। सरकारी अधिकारी या किसी कांग्रेसी नेता के प्रमाण को आधार बनाकर ये लाखों करोड़ रुपये बांट दिए जाते थे। इसका सबसे ताजा उदाहरण है 2008 में कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार द्वारा किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ करना। इसमें 40 प्रतिशत ऋण ऐसे किसानों का माफ किया गया जो किसान थे ही नहीं, जिन्होंने खेती के अलावा मोटरसाइकिल, घर के सामान इत्यादि के लिए ऋण ले रखा था। दशकों तक ऐसे ही कांग्रेस की सरकारों ने गरीबों के नाम पर सब्सिडी या ऋण के धन को लुटाया और गरीबी हटाओ के नारे से देश की जनता को बेवकूफ बनाया।

रक्षा सौदों में दलाली करना

कांग्रेस की सरकारों के दौरान देश को सुरक्षित रखने के लिए जितने भी रक्षा सौदे हुए उनमें कंपनियों से शस्त्रों को खरीदने के लिए जमकर दलाली खाई जाती थी। बोफोर्स एक ऐसा घोटाला था जो राजनीतिक दलों के विरोध कारण जनता के सामने आया। यह ऐसा घोटाला था, जिसमें कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा। इससे पहले जितने भी रक्षा सौदे होते रहे थे, उनकी दलाली के बारे में जनता को पता नहीं चलता था। बोफोर्स के बाद स्कॉर्पियन पनडुब्बी का घोटाला भी जनता के सामने आया।

सरकारी नीलामी में कमीशनखोरी     

कांग्रेस की सरकारों ने देश की भूसंपदा को सार्वजनिक उपयोग के नाम पर अपने इकोसिस्टम के लोगों को अनाप-शनाप तरीके से बांटा। इस नीलामी में पहले आओ, पहले पाओ के नियम बनाए गए और सूचनाओं को उन्हीं लोगों को दिया जाता था, जो कांग्रेस के इकोसिस्टम के चहेते थे। 2जी घोटाला, आदर्श घोटाला, कोयला घोटला, जमीन आवंटन का घोटाला इत्यादि ऐसे घोटाले थे, जो राजनीतिक दलों के मुखर होने के कारण जनता के सामने आ सके। कांग्रेस इन भूसंपदाओं की नीलामी के एवज में पार्टी फंड चंदा लिया करती थी।

फर्जी कंपनियों से हवाला करना

रक्षा दलाली, गरीबों की सब्सिडी के पैसे, भूसंपदाओं की नीलामी में कमीशन से मिले पैसे को ठिकाने लगाने के लिए कांग्रेस के नेताओं और इसके इकोसिस्टम ने फर्जी कंपनियों का एक जाल बुन रखा था। इन फर्जी कंपनियों का देश को पता भी नहीं चलता यदि देश में प्रधानमंत्री मोदी ने 08 नवंबर 2016 को नोटबंदी न की होती। इस नोटबंदी के कारण देश में करीब तीन लाख फर्जी कंपनियों का पता चला। ये फर्जी कंपनियां सिर्फ कागजों पर थीं, जिनका उपयोग देश में भ्रष्टाचार से पैदा किए गये काले धन को विदेशों में पहुंचाने के लिए किया जाता था, जिसे हवाला व्यापार कहा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी कंपनियों को बंद करके, इनके निदेशकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया।

ये कांग्रेस के वे तरीके थे जिसने उसे अपने दशकों की सरकारों के दौरान बनाये थे। कांग्रेस को सत्ता में जनता के लिए बिना काम किए बने रहने के ये अचूक फार्मूले थे, जिसमें जनता को सब्सिडी और ऋण माफी का एक तरफ लालीपॉप दिया जाता तो दूसरी तरफ इससे सरकारी खजाने को लूटने का तरीका बना दिया जाता। इसमें जनता भी खुश रहती थी और कांग्रेस को भी बेतहाशा धन मिलता।

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