Home समाचार पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर शोध पुस्तक ‘ब्लीडिंग बंगाल’ का विमोचन

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर शोध पुस्तक ‘ब्लीडिंग बंगाल’ का विमोचन

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नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक समसामयिक शोध पुस्तक ब्लीडिंग बंगाल का विमोचन राजधानी के नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में किया गया। यह पुस्तक मई 2019 से अबतक राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का तथ्यात्मक ब्यौरा सामने रखती है और राजनीतिक तथा प्रशासन के गिरते स्तर को ठोस घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। पुस्तक के विमोचन पर वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने कहा कि देश में फासीवाद का कोई खतरा है तो पश्चिम बंगाल में है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि बंगाल में अधिकांश मीडिया बिना कहे ही सरकार के आगे समर्पण कर गया है और सत्तारूढ़ दल की गलतियों को छापा नहीं जा रहा है। सुश्री बनर्जी का भतीजा मानो नवाब सिराजुद्दौला बन गया है। वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने कहा कि राजनतिक हिंसा के चलते बंगाल की जो छवि बन रही है उसे देख कर सुन कर शर्म आती है। लोकतंत्र में हिंसा का न तो कोई स्थान हो सकता है और न ही कोई उसका समर्थन कर सकता है। एनयूजे आई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा कि मीडिया समाज का आइना है और यदि किसी राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा की घटनाएं हो रही है उसे देखकर मीडिया मूक दर्शक बना नहीं रह सकता।श्री वर्मा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि बंगाल की स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चिन्ता का विषय है। एनयूजे आई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा एनयूजे आई ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर ‘ब्लीडिंग बंगाल’ नाम से जो पुस्तक रूपी दस्तावेज तैयार किया है उसमें घटनाओं का संकलित करने का काम किया है। मनोज वर्मा ने कहा सम सामायिक विषयों पर एनयूजे आई इस प्रकार की शोध परख रिपोर्ट समय समय पर जारी करता रहा है।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने कला, साहित्य, दर्शन, संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना वाले इस राज्य को अफगानिस्तान में तब्दील कर दिया है जहां समाज को राजनीतिक कबीलों में बांट कर खूनी खेल खेला जा रहा है। मेदिनीपुर से सांसद एवं भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने दस्तावेज रिपोर्ट ‘ब्लीडिंग बंगाल’ के विमोचन के मौके पर उक्त विचार व्यक्त किये। इस पत्र में 19 मई 2019 के बाद राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का तथ्यात्मक विवरण दिया गया है जिसमें हिंसा का शिकार सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं,आम नागरिकों एवं एक पत्रकार का विवरण भी शामिल है। विमोचन समारोह में वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता, गौतम लाहिड़ी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे। एनयूजेआई के महासचिव मनोज वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने संचालन किया।

श्री घोष ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुश्री बनर्जी कहा करतीं थीं कि वह दार्जिलिंग को स्विट्ज़रलैंड, दीघा को गोवा और कोलकाता को लंदन बना देंगी। लेकिन आज हालत यह है कि उन्होंने बंगाल को अफगानिस्तान बना दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में फिल्म कलाकार, डॉक्टर, वकील, पत्रकार सभी राज्य की सत्ता से भयभीत हैं और उससे घृणा करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि देश के अनेक राज्यों में राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है। यह हिंसा चुनावों के लिये होती रही है। मगर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विचारधारा के लिए हत्याएं हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सामाजिक जातपात नहीं है लेकिन राजनीतिक दलों से प्रतिबद्धताओं के हिसाब से समाज में भी ध्रुवीकरण हो गया है। विराेधी विचारधारा की हत्या एवं उत्पीड़न जायज ठहराया जाता है। उन्होंने कहा कि वामपंथी शासन में शुरू हुई इस बुराई के खिलाफ जीत कर सत्ता में आयीं सुश्री बनर्जी भी इसी राह में चलने लगीं हैं।

एनयूजे आई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राकेश आर्य ने भ्राी पश्चिम बंगाल में राजनीति हिंसा और मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखी।‘ब्लीडिंग बंगाल’ के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा टीवी के सीईओ राहुल महाजन,लोकसभा टीवी के संपादक श्याम सहाय, पंचजन्य के संपादक हितेश शंकर,वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार,वरिष्ठ पत्रकार संध्या जैन,वरिष्ठ पत्रकार अजय सेतिया, वरिष्ठ पत्रकार राम नारायण श्रीवास्तव,वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद मुजुमदार,वरिष्ठ पत्रकार योजना गोसाई,वरिष्ठ पत्रकार आलोक गोस्वामी,वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडे,वरिष्ठ पत्रकार अतुल गंगवार, वरिष्ठ परिजात कौल,दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश शुक्ला,उपाध्यक्ष अनुराग पुनेठा, सचिव सचिन भदौलिया,सचिव संजीव सिन्हा,सचिव मंयक सिंह,डीजेए की कार्यकारिणी के सदस्यआदित्य भारद्धाज,राज कमल, उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश वत्स, महामंत्री प्रदीप शर्मा सहित अनेक पत्रकारों ने भाग लिया।

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