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NCST की रिपोर्ट : बंगाल में चुनाव बाद हिंसा में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हिंदुओं के घरों को बनाया निशाना, आदिवासी डर के साये में जीने को मजबूर

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बाद अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई राजनीतिक हिंसा से संबंधित 11 पेज की रिपोर्ट राज्य के चीफ सेक्रेट्री और डीजीपी को सौंप दी। इस रिपोर्ट में ममता सरकार और टीएमसी कार्यकर्ताओं की जमकर लताड़ लगायी गई है। आयोग ने कहा कि बंंगाल में चुनाव के बाद अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोग डर के साये में जी रहे हैं। पीड़ित आदिवासी जब पुलिस के पास मदद के लिए जा रहे हैं तो उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आयोग को इस बात के सबूत मिले हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने चुनाव में जीत के बाद हिंदुओं के घरों को निशाना बनाकर लगातार हिंसा की। 

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, जातिगत भेदभाव के मामले सामने आए, जो काफी हैरान करने वाले हैं। आयोग के मुताबिक एक हिंसक भीड़ ने मिदनापुर जिले में मुंडा जनजाति के लोगों को निशाना बनाया। उन्हें घरों में दुबके रहने के लिए मजबूर किया गया। बीजेपी को समर्थन करने की वजह से उन्हें शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्हें बाजार में अपनी कृषि उपज बेचना भी मुश्किल हो गया।

आयोग के सामने प्रताड़ना और उत्पीड़न के कई ऐसे मामले सामने आए। आदिवासियों लोगों को सड़कों पर वाहन चलाने की मंजूरी नहीं दी गई। वहीं आदिवासी महिलाओं को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। हुगली में संतल जनजाति पर कई तरह के अत्याचार किए गए। वहां 25 संतल जनजाति वाले परिवारों पर हमला हुआ, जहां उनको उनके घरों में घुसे रहने को मजबूर किया गया, साथ ही महिलाओं पर भी अटैक हुए।

NCST टीम जब पूर्वी वर्धमान जिले में पहुंची तो स्थानीय लोगों ने उन्हें खुलकर अपनी आपबीती बताई। चुनाव नतीजे आने के बाद कई आदिवासियों के घरों में आग लगा दी गई। इसके अलावा क्षेत्र में अत्याचार, बलात्कार की भी घटनाएं हुईं। हमला करने वाले आस-पास के ही लोग थे। उनके खिलाफ पुलिस से शिकायत की गई लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

आयोग की टीम ने अपनी जांच में पाया कि पुलिस पूरी तरह हिंसा करने वालों के साथ थी। पीड़ितों ने बताया कि शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया। उलटा शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया। यहां तक कि आयोग से मिलने से भी रोका गया और धमकाया गया। जिसने साहस कर आयोग को अपनी आपबीती सुनाई उसके साथ मारपीट की गई।

हिंसा प्रभावित इलाके के दौरे के बाद आयोग ने पाया कि राज्य के हालात काफी खराब है। आयोग ने शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लेने और एसआईटी गठित करने मांग की है। साथ ही लोगों में व्याप्त डर को दूर करने के लिए हिंसा प्रभावित इलाकों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है।

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