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PM Modi के विजन से दिव्य और भव्य बन रहा भारत का आध्यात्मिक वैभव, अयोध्या में रामलला का मंदिर ही नहीं, अगले साल तक इन राज्यों में बन जाएंगे कई अद्भुत Temple Corridor

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सनातन संस्कृति में अटूट और अगाध श्रद्धा का ही सुफल है कि विश्व प्रसिद्ध अयोध्या में राम लला का भव्य और दिव्य मंदिर तो बन ही रहा है, इसके साथ ही देशभर में प्राचीनतम मंदिरों के जीर्णोंद्धार और मंदिर कॉरिडोर बनाने का काम भी जोरों पर है। बीते दो-तीन साल में सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ, महाकाल मंदिर कॉरिडोर बन चुके हैं। यूपी में मथुरा-वृंदावन, अयोध्या, मप्र के चित्रकूट में वनवासी रामपथ, ओरछा में रामराजा लोक, दतिया में पीतांबरा पीठ कॉरिडोर, इंदौर में अहिल्या नगरीय लोक, महू का जानापाव, असम के गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर, बिहार में उच्चैठ भगवती स्थान से महिषी तारास्थान को जोड़ने का काम शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में महालक्ष्मी तो नासिक से त्र्यंबकेश्वर तक कॉरिडोर बन रहा है। अगले साल आम चुनाव से पहले ही 12 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले इन मंदिर कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के लिए भक्त निवास, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, आकर्षक गार्डन, भव्य गौशाला और परिक्रमा पथ भी बनाए जाएंगे।

रामनवमी के दिन सूर्य की किरणें गर्भगृह में रामलला के ललाट को छुएंगी
अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बनने वाले राम मंदिर में स्तम्भों पर देवी देवताओं की 6000 से ज़्यादा मूर्तियां उकेरी जाएंगी। इसके साथ ही कांस्य पट्टिका में रामकथा के प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा. मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक में यह तय किया गया. इसके साथ ही जनवरी में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां तेज करने के लिए कई बातों कर मुहर लगायी गई. मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह को निर्विघ्न सम्पन्न करने के लिए वैदिक अनुष्ठान भी किए जा रहे हैं। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाली भगवान राम लला की मूर्ति का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। जनवरी 2024 में मकर संक्रांति पर गर्भगृह में यह मूर्ति स्थापित होगी। रामनवमी के दिन सूर्य की किरणें गर्भगृह में रामलला के ललाट को छुएंगी। इसके लिए खगोलशास्त्र और भौतिकी विज्ञान के विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई है। अयोध्या में 797.69 करोड़ में रामजन्म भूमि कॉरिडोर बन रहा है। इसके लिए 379 करोड़ जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे।श्री कृष्ण जन्मभूमि पर बनेगा 1000 हेक्टेयर में मथुरा-वृंदावन कॉरिडोर
पीएम मोदी के कार्यकाल में चर्चित धर्म स्थलों के जीर्णोद्धार जितना काम हो रहा है, वैसा आजादी के बाद कभी नहीं हुआ। सरकार खुद धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों की मॉनिटरिंग कर रही है और खास बात ये है कि सभी कॉरिडोर का काम अगले साल अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 2024 की शुरुआत में अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भगवान की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। अयोध्या की तरह ही श्री कृष्ण जन्मभूमि भी हिंदू जनमानस की आराध्य स्थली रही है। मोदी सरकार की पहल के बाद करीब 1000 हेक्टेयर के मथुरा-वृंदावन कॉरिडोर को 250 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसमें यमुना रिवर फ्रंट और बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर को भी शामिल किया गया है। कॉरिडोर से गोकुल, नंदगांव, बरसाना जोड़े जा रहे हैं।

भगवान कृष्ण की द्वारका में फोर लेन ब्रिज और आईलैंड पर एक हजार करोड़ खर्च होंगे
गुजरातः अद्भुत द्वारका नगरी इसमें ओखा से बेट द्वारका को जोड़ने वाले 2320 मी. लंबे फोर लेन ब्रिज पर 870 करोड़ खर्च हो रहे हैं। 138 करोड़ में बेट द्वारका आईलैंड में पहले फेज का काम जारी। इसी प्रकार महाराष्ट्र के नासिक में त्र्यंबकेश्वर कॉरिडोर बन रहा है। कोल्हापुर में 250 करोड़ रु. की लागत में महालक्ष्मी कॉरिडोर बन रहा है। भारतमाला धार्मिक संपर्क योजना के तहत उच्चैठ भगवती स्थान से महिषी तारास्थान को जोड़ने के लिए सरकार मधुबनी के उमगांव से सहरसा से महिषी तक नेशनल हाईवे को 160 किमी से बढ़ाकर 180 किमी कर रही है। इस पर 7000 करोड़ रु. खर्च होने हैं। असम में विख्यात कामाख्या मंदिर विकसित हो रहा है। इस पर 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस मंदिर के मौजूदा परिसर को 3000 वर्गफीट से 10 हजार वर्गफीट किया जाएगा।देश के दिल मध्य प्रदेश में बनेंगे सबसे ज्यादा धार्मिक कॉरिडोर
देशभर में मंदिरों पर जो कॉरिडोर बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, उसमें सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में हैं। एमपी के चित्रकूट में वनवासी रामपथ, ओरछा में रामराजा लोक, दतिया में पीतांबरा पीठ कॉरिडोर, इंदौर में अहिल्या नगरीय लोक, महू का जानापाव, बिहार में उच्चैठ भगवती स्थान से महिषी तारास्थान को जोड़ने का काम शुरू हो चुका है। छिंदवाड़ा में 314 करोड़ में हनुमान मंदिर लोक, सलकनपुर में श्रीदेवी महालोक, सागर में रविदास धाम, दतिया में पीतांबरा लोक, ओरछा में 176 करोड़ में रामराजा लोक, चित्रकूट में 100 करोड़ में रामपथ गमन लोक, इंदौर में 25 करोड़ में अहिल्यानगरी लोक, 10 करोड़ में जानापाव लोक, ओंकारेश्वर में 2200 करोड़ में ओंकारेश्वर लोक बन रहा है। ग्वालियर में शनि लोक और बड़वानी में नाग लोक की घोषणा हुई है।पीएम मोदी तीर्थयात्रा पर्यटन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार पर कर रहे हैं फोकस
विकसित राष्ट्र और समृद्ध भारत के संकल्प को साकार करने के लिए पीएम मोदी चौतरफा विकास पर ध्यान दे रहे हैं। देश की आर्थिक प्रगति के लिए पर्यटन के महत्व को समझते हुए वे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के साथ ही विरासत स्थलों के विकास पर खासा जोर दे रहे हैं। धार्मिक स्थलों के विकास से आई तरक्की काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से भी समझी जा सकती है जहां पिछले साल में ही सात करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचे। देश में हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, और सूफीवाद की तरह कई धर्मों का संगम है। वहीं उनके तीर्थस्थल भी हैं, ऐसे में घरेलू पर्यटन का विकास काफी हद तक तीर्थयात्रा पर्यटन पर निर्भर करता है, जोकि धार्मिक भावनाओं के द्वारा प्रेरित है। ऐसे में पीएम मोदी तीर्थयात्रा पर्यटन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार पर जोर दे रहे हैं। सालों से यह स्थल बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे थे। अब पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार इन स्थलों का पुरोद्धार कर रही है। लोग यहां धार्मिक भावनाओं की वजह से जाते रहे हैं। अब जब सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तो यहां पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

हिंदुस्तान ही नहीं, दुनिया के दूसरे देशों में भी मंदिरों को भव्य बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी मंदिरों को भव्य बनाने पर जोर दे रहे हैं। साल 2019 में पीएम मोदी की सरकार ने मनामा और अबू धाबी में भगवान श्रीकृष्ण श्रीनाथजी के पुनर्निर्माण के लिए 4.2 मिलियन डॉलर देने का ऐलान किया था। इसके साथ ही 2018 में उन्होंने अबू धाबी में बनने वाले पहले हिंदू मंदिर की आधारशिला रखी थी। उन्होंने 16 मई, 2022 को नेपाल के लुंबिनी में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेर बहादुर देवबा के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति और विरासत केंद्र का शिलान्यास किया। यही नहीं पीएम मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों से ऐसे सैकड़ों प्राचीन वस्तुओं एवं मूर्तियों को विदेशों से वापस लाने में सफलता मिली है, जिन्हें दशकों पहले चोरी और तस्करी के जरिए विदेश भेज दिया गया था। इसी तरह विरासत स्थलों की बात करें तो 2022 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल की सूची में भारत के तीन स्थलों को संभावित स्थलों की सूची में शामिल किया गया। पीएम मोदी के केंद्र की सत्ता में आने से पहले विश्व धरोहर स्थल में भारत के 30 स्थल थे जबकि 2014 के बाद 10 स्थलों को इस सूची में शामिल किया गया है। इससे साफ जाहिर है कि पीएम मोदी इन सांस्कृतिक स्थलों के उत्थान को लेकर कितने गंभीर हैं।

भारत में प्राचीन काल से एक अनोखी अर्थव्यवस्था रही है। वह है तीर्थक्षेत्र का अर्थशास्त्र। आजादी के बाद देश पर 60 सालों तक शासन करने वाली कांग्रेस ने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया और अंग्रेजों की मानसिकता के साथ देश पर शासन किया। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने जब देश की बागडोर संभाली तो तीर्थक्षेत्र के अर्थशास्त्र को नई ऊंचाई देने का काम शुरू किया। मोदी सरकार ने पिछले नौ साल के कार्यकाल में ऐसे कई तीर्थक्षेत्रों का विकास किया है जिससे न केवल देश में पर्यटन को नई ताकत मिली है बल्कि सनातन संस्कृति के उत्थान से अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है। पिछले कुछ सालों में तीर्थ क्षेत्रों में विस्तार और सुविधाओं में बढ़ोतरी से भक्तों की संख्या यहां इतनी अधिक हो गई है कि अब पर्यटन से इतर हिंदू तीर्थ क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में एक अलग आर्थिक क्षेत्र भी बनता दिख रहा है और इस पर न रिसेशन की माया है न ही NPA का काला साया। यह सब पीएम मोदी के विजन से संभव हो पाया है। भारत की यह अनोखी अर्थव्यवस्था सैकड़ों सालों से चली आ रही है और अब 2014 के बाद पीएम मोदी भारत को प्राचीन वैभव दिला रहे हैं।

पीएम मोदी बड़े मंदिरों के रेनोवेशन प्रोजेक्ट में रहे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की सनातन सभ्यता और संस्कृति के उद्धारक के रूप में सामने आए हैं। उनकी सरकार न सिर्फ देश का भौतिक विकास कर रही है, बल्कि सनातन संस्कृति को दुनियाभर में पहचान भी दिला रही है। दरअसल भारत के पवित्र मंदिर सनातन संस्कृति के मूर्त रूप होते हैं। इन मंदिरों ने आस्था और धर्म को बचाए रखने और समाज के फिर से उत्थान में बड़ी भूमिका निभाई है। इनको मोदी राज में प्राचीन और आधुनिक शैली के संगम से नये स्वरुप में ढाला जा रहा है। पिछले 9 सालों से प्रधानमंत्री मोदी प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत और धरोहर रहे मंदिरों का जीर्णोद्धार कर उन्हें अपनी पुरानी गरिमा वापस दिला रहे हैं। आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में जिनका प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा और प्रयास से जीर्णोद्धार किया गया है…

1. काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 दिसंबर, 2021 को 500 साधु संतों और मंत्रोच्चार के साथ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही काशी को उसके स्तर के मुताबिक बुनियादी ढांचा देने का ऐलान कर दिया। 8 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार का काम शुरु कर दिया और चार साल के रिकॉर्ड समय में यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया। वाराणसी से लोकसभा सांसद प्रधानमंत्री मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसके निर्माण में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस भव्य कॉरिडोर में छोटी-बड़ी 23 इमारतें और 27 मंदिर हैं। अब काशी विश्वनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को गलियों और तंग संकरे रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा। गंगा घाट से सीधे कॉ‍रिडोर के रास्‍ते बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं।2. महाकाल लोक कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगी

पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के नवविस्तारित क्षेत्र ‘श्री महाकाल लोक’ का लोकार्पण किया। महाकाल मंदिर के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान का उद्देश्य महाकाल मंदिर को पुरानी पहचान वापस दिलाना है। महाकाल लोक कॉरिडोर काफी भव्य है और अब ये मंदिर के क्षेत्र को 10 गुना तक बढ़ा देगा। कॉरिडोर में भगवान शिव से जुड़ी कई मूर्तियां लगाई गई हैं, जो अलग अलग कहानी बताती है और भक्तों को भगवान शिव से जोड़ती हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 300 मीटर में बना है, जबकि इसकी लंबाई 900 मीटर है। इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से भव्य माना जा रहा है। इस पर 856 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जितना भव्य यह कॉरिडोर बना है उससे पता चलता है कि आने वाले दिनों में यह धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगी। इसमें त्रिशूल के डिजाइन के 108 स्तंभ हैं। साथ ही शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 भित्ति चित्र बनाए गए हैं। उज्जैन में बना कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर से आकार में करीब 4 गुना बड़ा है। अभी महाकाल कॉरिडोर के पहले फेज का उद्घाटन किया गया है, जिसकी लागत 350 करोड़ रुपये है। दूसरे फेज की लागत 450 करोड़ रुपये होगी। 3. सोमनाथ मंदिर परिसर का विकास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 अगस्त 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर के पुननिर्माण के लिए विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में सोमनाथ समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ का पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं। इससे यहां का पर्यटन बढ़ा है और लोगों में समृद्धि आई है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्वती मंदिर की आधारशिला भी रखी। इसका निर्माण कुल 30 करोड़ रुपये के परिव्यय से किया जाना प्रस्तावित है। इसमें सोमपुरा सलात शैली में मंदिर निर्माण, गर्भ गृह और नृत्य मंडप का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत मंदिर के पीछे समुद्र तट पर 49 करोड़ रुपये की लागत से बना एक किलोमीटर लम्‍बा समुद्र दर्शन मार्ग, पुरानी कलाकृतियों से युक्‍त नवनिर्मित सभागार और मुख्‍य मंदिर के सामने बने नवीनीकृत अहिल्‍याबाई होल्‍कर मंदिर यानी पुराना सोमनाथ मंदिर को भी शामिल किया गया है।

महमूद गजनवी ने 1025 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया

सोमनाथ मंदिर हिंदुओं के लिए एक पावन स्थल है क्योंकि मिथकों के अनुसार इसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला माना जाता है। कहते हैं कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव सोमराज ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। गुजरात के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी। अरब यात्री अल बरूनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो महमूद ग़ज़नवी ने सन 1025 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे फिर गिराया गया। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और विनाश का सिलसिला जारी रहा। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इसके बाद पीएम मोदी ने इसकी सुध ली और अब इसका पुराना गौरव बहाल किया जा रहा है।

4. अयोध्या में राम मंदिर का पीएम ने किया भूमि पूजन, अब बह रही विकास की गंगा 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज, 5 अगस्त 2020 को विधि-विधान के साथ अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी ने भूमि पूजन के बाद अभिजीत मुहूर्त में श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किया। इसके साथ ही मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया। अब जल्द ही इसके बनकर पूरी तैयार हो जाने की संभावना है। पीएम मोदी के विजन से आज राम मंदिर के रूप में भारत के गौरव का प्रतिबिंब खड़ा हुआ है। इतिहास से सीखकर, वर्तमान को सुधारने की एक नया भविष्य बनाने की कहानी है। यह केवल भौगोलिक एवं वैचारिक निर्माण नहीं है। यह हमारे अतीत से जोड़ने का प्रकल्प है। हमने अतीत के खंडहरों पर आधुनिक गौरव का निर्माण किया है।अयोध्या में भव्य राम मंदिर के साथ विकास की योजनाएं परवान चढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अंतरराष्ट्रीय स्तर का बस स्टॉप, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, राम की पैड़ी, भजन संध्या स्थल जैसी विकास की योजनाएं लगातार चल रही है। अयोध्या में चौमुखी विकास की गंगा बह रही है। जिसको लेकर आम जनमानस उत्साहित है। धर्म नगरी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी कई विशेष सौगात है जैसे कि चौड़े मार्ग यात्री सुविधा युक्त यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं, राम नगरी की अपनी अमिट पहचान इन सब को विकसित और सुरक्षित करने का कार्य सरकार कर रही है।5. पावागढ़ के कालिका मंदिर में 500 साल बाद शिखर पर फहराया ध्वज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिन्दू स्वाभिमान के प्रतीक है। उनका शासनकाल हिन्दू धर्म के पुनर्जागरण का काल है। 18 जून, 2022 को हर हिन्दू गर्वान्वित महसूस किया, जब 500 साल बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी पर स्थित महाकाली मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उसके शिखर पर पताका फहराया। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से ही 11वीं सदी में बने इस मंदिर का पुनर्विकास योजना के तहत कायाकल्प किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकाली मंदिर के ऊपर पांच सदियों तक, यहां तक कि आजादी के 75 वर्षों के दौरान भी पताका नहीं फहराई गई थी। लाखों भक्तों का सपना आज उस समय पूरा हो गया जब मंदिर प्राचीन काल की तरह अपने पूरे वैभव के साथ खड़ा है। करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से महाकाली मंदिर का पुनर्विकास किया गया है, जिसमें पहाड़ी पर स्थित मंदिर की सीढ़ियों का चौड़ीकरण और आसपास के इलाके का सौंदर्यीकरण शामिल है। नया मंदिर परिसर तीन स्तरों में बना है और 30,000 वर्ग फुट दायरे में फैला है। 6. मोदी सरकार ने कश्मीर में किया मंदिरों का पुनरोद्दार

कश्मीर में 05 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद मोदी सरकार ने श्रीनगर में कई पुराने मंदिरों का पुनर्निर्माण शुरु किया। मंदिरविहीन हो चुकी घाटी में गुलमर्ग का शिव मंदिर ऐसा पहला मंदिर है, जिसे 1 जून, 2021 को जीर्णोद्धार के बाद जनता के लिए खोल दिया गया। इस दौरान सेना की गुलमर्ग बटालियन द्वारा एक भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया था। भारतीय सेना ने स्थानीय लोगों की मदद से गुलमर्ग के इस शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य किया है। सेना के जवानों ने मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों को भी नया रूप दिया है। शिव मंदिर को व्यापक जीर्णोद्धार की आवश्यकता थी, क्योंकि लंबे समय से इस मंदिर में कोई जीर्णोद्धार कार्य नहीं हुआ था। गुलमर्ग में आने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों की एक बड़ी संख्या ने मंदिर को उसकी मूल स्थिति में देखने की इच्छा व्यक्त की थी।

झेलम नदी के किनारे बने रघुनाथ मंदिर का फिर से निर्माण

मोदी सरकार के आकलन के मुताबिक कश्मीर में कुल 1842 हिंदू मंदिर या फिर पूजास्थल हैं। इनमें से 952 मंदिर हैं जिनमें 212 में पूजा चल रही है जबकि 740 जीर्ण शीर्ण हालत में है। मोदी सरकार ने सबसे पहले झेलम नदी के किनारे बने रघुनाथ मंदिर का फिर से निर्माण किया। भगवान राम का ये मंदिर महाराजा गुलाब सिंह ने 1835 में बनवाया था। इसके अलावा अनंतनाग का मार्तंड मंदिर, पाटन का शंकरगौरीश्वर मंदिर, श्रीनगर के पांद्रेथन मंदिर, अवंतिपोरा के अवंतिस्वामी और अवंतिस्ववरा मंदिर के पुनरोद्धार का काम चल रहा है। अनंतनाग जिले में एएसआई द्वारा संरक्षित मार्तंड सूर्य मंदिर में मई 2022 में सुबह 100 से अधिक तीर्थयात्रियों ने कुछ घंटों तक पूजा-अर्चना की। इस कार्यक्रम के जरिए सूर्य मंदिर में पहली बार शंकराचार्य जयंती मनाई गई है। कहा जाता है कि 8वीं शताब्दी के इस मंदिर को सिकंदर शाह मिरी के शासन के दौरान 1389 और 1413 के बीच नष्ट कर दिया गया था।

7. पीएम मोदी की पहल से चार धाम परियोजना का विकास

मोदी सरकार ने देवभूमि उत्तराखंड के लिए चार धाम परियोजना शुरू की है। केदारनाथ बद्रीनाथ की यमुनोत्री और गंगोत्री के चारधाम परियोजना- रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाली 900 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चारों धामों के लिए हर मौसम में सुलभ और सुविधाजनक रास्ता देना है। चारधाम परियोजना एक तरह से ऑल वेदर रोड परियोजना है, जो उत्तराखंड में केवल चार धामों को जोड़ने की परियोजना भर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इसके जरिए उत्तराखंड के गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा तो मिलेगा ही, साथ ही पड़ोसी चालबाज देश चीन को चुनौती देने के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है। इसके अलावा ऋषिकेश को रेल मार्ग से कर्णप्रयाग से जोड़ने का काम चल रहा है। ये रेलवे लाइन 2025 से शुरू हो जाएगी।

केदारनाथ, बद्रीनाथ में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की और विकास कार्यों का जायजा लिया। केदारनाथ में पीएम मोदी ने आदिगुरु शंकराचार्य समाधि स्थल के दर्शन किए। उन्होंने केदारनाथ, बद्रीनाथ व माणा में 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया। इनमें केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे और चीन सीमा से लगे माणा क्षेत्र में दो राजमार्गों से संबंधित योजनाएं शामिल हैं। बाबा केदार के भक्त प्रधानमंत्री ने सबसे पहले केदारनाथ पहुंचकर लगभग 946 करोड़ की लागत से बनने वाले अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 13 किमी लंबे सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास किया। साथ ही पुनर्निर्माण के तहत हो रहे कार्यों का जायजा लिया।7. हिंदू संत रामानुजाचार्य के सम्मान में स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2022 को हैदराबाद में 11वीं सदी के हिंदू संत रामानुजाचार्य के सम्मान में बनी 216 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी का उद्घाटन किया था। इस प्रतिमा में 120 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है। जिसकी लागत करीब 400 करोड़ रूपए है। यह 45 एकड़ जमीन पर बना है। मंदिर परिसर में करीब 25 करोड़ की लागत से म्यूजिकल फाउंटेन का निर्माण कराया गया है।

8. संत तुकाराम शिला मंदिर का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 जून 2022 को संत तुकाराम शिला मंदिर का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने विकास योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा, ‘संत ज्ञानेश्वर पालखी मार्ग का निर्माण 5 चरणों में होगा और संत तुकाराम पालखी मार्ग का निर्माण 3 चरणों में होगा। 350 किलोमीटर से ज्यादा बड़े हाइवे बनेंगे, इसमें 11000 करोड़ का खर्च होगा। संत तुकाराम एक वारकरी संत और कवि थे। उन्हें अभंग भक्ति कविता और कीर्तन के माध्यम से समुदाय-उन्मुख पूजा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर 36 चोटियों के साथ पत्थर की चिनाई से बनाया गया है। इसमें संत तुकाराम की एक मूर्ति भी स्थापित की गई है।

9. सरकार ने प्रसाद योजना का किया विस्तार, 12 और धार्मिक स्थल शामिल

सरकार ने धार्मिक स्थलों का विकास करने के शुरू की गई प्रसाद योजना का विस्तार किया है। फिलहाल इस योजना से 12 धार्मिक स्थलों को जोड़ा गया है। इनमें कामाख्या (असम), अमरावती (आंध्र प्रदेश), द्वारका (गुजरात), गया (बिहार), अमृतसर (पंजाब), अजमेर (राजस्थान), पुरी (ओडिशा), केदारनाथ (उत्तराखंड), कांचीपुरम (तमिलनाडु), वेलनकन्नी (तमिलनाडु), वाराणसी (उत्तर प्रदेश), मथुरा (उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। इन 12 स्थलों के अलावा प्रसाद योजना का दायरा और बढ़ा दिया गया है.योजना के तहत स्थलों की संख्या बढ़कर लगभग 41 हो गयी है। बौद्ध तीर्थ यात्रा के लिए कुशीनगर के अलावा झारखंड स्थित देवघर समेत कई तीर्थ स्थलों का प्रसाद योजना के तहत बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है। दूसरी तरफ रामायण सर्किट और बुद्ध सर्किट को भी जोड़ने का काम चल रहा है। देश में कोरोना की रफ्तार में कमी होने के बाद घरेलू पर्यटन में बढोतरी हुई है। पर्यटन मंत्रालय की माने तो दुर्गम इलाकों में कनेक्टिविटी में सुधार तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई विकास कार्य तेज कर दिया गया है, जिससे आने वाले यात्रियों को असुविधा न हो। बेहतर सुविधाएं मिलने से जहां पर्यटकों को सहुलियत होगी, वहीं रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय सरकार को इससे कमाई भी बढ़ेगी।

प्रसाद योजना में अब शामिल हुए 41 धार्मिक स्थल

पर्यटन मंत्रालय ने योजना में शामिल स्थलों की संख्या को अब बढ़ाकर 41 कर दिया है। यानि अब देश के 41 धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सेवाएं और जरूरी इंफ्रा को स्थापित किया जाता है जिससे यात्रियों को इन तीर्थ स्थलों तक पहुंचने और यहां रहने में सुविधा हो। इस स्थलों तक आवागमन बेहतर होने से न केवल टूरिज्म सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा वहीं भारी संख्या में तीर्थ यात्रियों के पहुंचने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। भारत सरकार की तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक, विरासत के विकास का राष्ट्रीय मिशन (प्रसाद) एक केंद्रीय योजना है, इसे पर्यटन मंत्रालय ने साल 2014-15 में शुरू किया था, केंद्र सरकार ने इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत संबंधित चयनित स्थलों और जिसमें तीर्थयात्रा और विरासत स्थलों के एकीकृत करने के लिए काम किया जाता है। इस योजना का मकसद बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाना है। प्रवेश स्थल (सड़क, रेल और जल परिवहन), आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी, पर्यटन की बुनियादी सुविधाएं जैसे सूचना केंद्र, एटीएम, मनी एक्सचेंज, पर्यावरण अनुकूल परिवहन के साधन, क्षेत्र में प्रकाश की सुविधा और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत से रोशनी, पार्किंग, पीने का पानी, शौचालय, अमानती सामान घर, प्रतीक्षालय, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, शिल्प बाजार, हाट, दुकानें, कैफेटेरिया, मौसम से बचने के उपाय, दूरसंचार सुविधाएं, इंटरनेट, कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं।

10. तीर्थ क्षेत्र का विकास मतलब समूची अर्थव्यवस्था का विकास

जब आप किसी तीर्थस्थल का विकास होता है तो उस शहर और क्षेत्र का विकास होता है। मसलन वहां फूल का कारोबार, विश्राम स्थल, होटल का कारोबार, प्रसाद की दुकानें, भोजनालय और कपड़ों से लेकर तमाम कारोबार में वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए प्रसिद्ध डेरी ब्रांड अमूल और कनफेक्शनरी ब्रांड नेस्ले की पहुंच उत्तर से लेकर दक्षिण के तीर्थस्थलों तक हो चुकी है और सागर रत्ना जैसे चर्चित रेस्टोरेंट तो वैष्णो देवी जैसे पावन तीर्थस्थल में भी दर्शनार्थियों की सुविधा और उनके विकल्पों के अनुसार भोजन तैयार करता है। 2021 में अयोध्या में राम मंदिर के लिए 5450 करोड़ रुपये का दान मिला, जो लगभग 5,000 करोड़ रुपये के रक्षा बजट के बराबर है। अन्य की बात करें तो तिरुमाला तिरुपति को रु. 3023 करोड़, वैष्णो देवी को 2000 करोड़ रुपये, अंबाजी को 4134 करोड़ रुपये (2019-20 में 5163 करोड़ रुपये), द्वारकाधीश को 1172 करोड़ रुपये, सोमनाथ को 1205 करोड़ रुपये, स्वर्ण मंदिर को 690 करोड़ रुपये दान मिला है। गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर, मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि, वृंदावन में बांके बिहार मंदिर, पद्मनाभ मंदिर, सिद्धिविनायक मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर की कमाई भी बढ़ी है।

मंदिर की अर्थव्यवस्था लगभग 40 अरब डॉलर हो गई, एक करोड़ रोजगार पैदा होंगे

एनएसएसओ के सर्वेक्षण के अनुसार मंदिर की अर्थव्यवस्था 3.02 लाख करोड़ रुपये या लगभग 40 अरब डॉलर हो गयी है और GDP में इसका हिस्सा 2.32 प्रतिशत हो गया है। इसमें फूल, तेल, दीपक, इत्र, चूड़ियां, सिंदूर, चित्र और पूजा के कपड़े से लेकर सब कुछ शामिल है और माना जा रहा है कि पीएम मोदी के विजन से यह जल्द ही और भी बड़ा हो सकता है पीएम मोदी के विजन से भारत में धार्मिक पर्यटन बढ़ने की वजह से होटल उद्योग, यातायात उद्योग, छोटे व्यवसायियों आदि को बहुत फायदा हो रहा है। इसलिए वर्ष 2028 तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में लगभग एक करोड़ रोजगार के नए अवसर निर्मित होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। नेशनल सैंपल सर्वे संगठन के अनुसार, भारत में करीब 5 लाख मंदिर और तीर्थस्थल हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था 3 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक की है। साथ ही देश में मस्जिदों की संख्या भी करीब 7 लाख और गिरजाघरों की संख्या 35,000 के आसपास है। यह भी एक तथ्य है कि दुनिया के जितने भी विकसित देश हैं उन्होंने अपने धार्मिक स्थलों को बेहद खूबसूरत बनाकर दूसरे धर्मों में विश्वास रखने वाले व्यक्तियों को आकर्षित कर अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है।

11. गुरु पर्व पर पीएम मोदी का सिख समुदाय को तोहफा, करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोला

मोदी सरकार ने कोरोना महामारी के कारण मार्च 2020 से बंद करतारपुर साहिब कॉरिडोर को बुधवार (17 नवंबर, 2021) से फिर से खोलने की घोषणा की। यह फैसला श्री गुरु नानक देव जी और सिख समुदाय के प्रति मोदी सरकार की अपार श्रद्धा को दर्शाता है। इससे बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालुओं को फायदा होगा। इस फैसले से जहां सिख श्रद्धालु काफी खुश है, वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने मोदी सरकार के इस फैसले की सराहना और स्वागत किया।

अब सिख श्रद्धालु पूरे कोरोना नियमों का पालन करते हुए शुक्रवार (19 नवंबर, 2021) को गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिए जा सकेंगे। पहले जत्थे में 250 श्रद्धालु जाएंगे और सभी यात्रियों के लिए टीकाकरण और निगेटिव आरटी पीसीआर रिपोर्ट जरूरी है। गौरतलब है यह कॉरिडोर सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के अंतिम विश्राम स्थल गुरुद्वारा दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ता है। गुरुद्वारा दरबार साहिब भारतीय सीमा से महज चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान में स्थित है। यह सिखों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थान है। कहा जाता है कि गुरुनानक देव जी अपने जीवन के 17 साल यहां गुजारे थे और यहीं पर अंतिम सांस ली थी।

 

 

 

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