Home विशेष प्रधानमंत्री मोदी के दस कदम, जिसने पाक प्रायोजित आतंकवाद को किया बेदम

प्रधानमंत्री मोदी के दस कदम, जिसने पाक प्रायोजित आतंकवाद को किया बेदम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू के दो सालों में भरपूर प्रयास किया कि पाकिस्तान अपनी आतंकवाद की नीति छोड़ कर, गरीबी के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो, लेकिन पाकिस्तान की सेना और सरकार मानने को ही तैयार नहीं थी। 2 जनवरी, 2016 को पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला और 2016 में ही 16 सितंबर को उरी के आतंकवादी हमले में 18 सैनिकों की शहादत की घटना ने प्रधानमंत्री मोदी को पाकिस्तान के आतंकवाद के समूल नाश के लिए कटिबद्ध कर दिया। पाकिस्तान के खिलाफ 29 सितंबर, 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक करके प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खात्मे की अपनी नई नीति को लागू करने की शुरुआत कर दी।इस नीति का मकसद एक तरफ आतंकवादियों का सफाया था तो दूसरी तरफ कूटनीति के जरिए पाकिस्तान को उसके मित्र राष्ट्रों से अलग-थलग करके, उस पर आर्थिक और नैतिक दबाव बढ़ाना शामिल था। साल 2018 के खत्म होने तक इस नीति के परिणाम सामने आने लगे। आइए, 2018 में उठे उन दस कदमों के बारे में बताते हैं, जिसने पाकिस्तान के आतंकवादियों के हौसले पस्त कर दिए हैं पाकिस्तान को फिलिस्तीन से दूर किया
2018 की शुरुआत हुई ही थी कि इस आक्रामक नीति का असर यह हुआ कि भारत के विरोध के मात्र कुछ घंटे के भीतर फिलिस्तीन को पाकिस्तान में अपने राजदूत वालिद अबू अली की छुट्टी करनी पड़ी। क्योंकि पाकिस्तान में फिलिस्तीन के राजदूत वालिद अबू अली ने  29 दिसंबर को रावलपिंडी में आतंकवादी हाफिज सईद के साथ एक कार्यक्रम में मंच साझा किया था। यही नहीं भारत में फिलिस्तीन के राजदूत हाइजा को कहना पड़ा कि हमारी सरकार हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन करती है और कहा कि पाकिस्तान में फिलिस्तीनी राजदूत वालिद अबू अली ने जो किया, वह फिलिस्तीन की सरकार को स्वीकार्य नहीं है। ईरान, अफगानिस्तान, यूएई और सऊदी अरब से करीबी रिश्ते बनाकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया
पाकिस्तान, इस्लामिक राष्ट्रों से अपने सबंधों के बल पर भारत को आंख दिखाता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान, यूएई और सऊदी अरब की यात्रा करके उनके साथ भारत के सामरिक रिश्तों को मजबूत किया। आज इस कूटनीति का ही परिणाम है कि यूएई और ईरान भारत को बेचे जाने वाले कच्चे तेल की कीमत डॉलर में न लेकर रुपयों में लेते हैं। यह इस बात को रेखांकित करता है कि इन देशों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के रिश्तों को एक नया आयाम दिया। हाल ही में यूएई ने भारत के अपराधियों को प्रत्यर्पण करने में पूरी मुस्तैदी दिखाई। आज कोई भी इस्लामिक राष्ट्र, जम्मू कश्मीर में मारे जा रहे पाकिस्तानी आतंकवादियों को लेकर भारत का विरोध नहीं करता और न ही पाकिस्तान का साथ देता है। इस तरह भारत ने इस समूह में पाकिस्तान को अलग कर दिया है। अफगानिस्तान के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रिश्ते बनाए हैं और अफगानिस्तान को सामानों की आपूर्ति करने के लिए ईरान से चाबहार बंदरगाह का उपयोग करने का समझौता करके पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से तोड़ दिया है। पाकिस्तान के मित्र राष्ट्रों के साथ दोस्ती करके प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की आतंकवादी नीति के नैतिक बल को ही खत्म कर दिया है।अमेरिकी प्रशासन में पाकिस्तान को आतंकवादी देश मनवाया
कभी अमेरिकी प्रशासन के लिए पसंदीदा रहे पाकिस्तान की हालत ऐसी हो चुकी है कि वह आतंकवादी देश घोषित होने के कगार पर पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति का परिणाम यह हुआ कि अमेरिका ने भारत के मोस्ट वाटेंड पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन और आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन पर प्रतिबंध लगा। 2018 में आई अमेरिकी रिपोर्ट में लिखा गया, ”ये आतंकवादी संगठन पाकिस्तान से चल रहे हैं। पाकिस्तान में इनको ट्रेनिंग मिल रही हैं और पाकिस्तान से ही इन आतंकवादी संगठनों की फंडिंग हो रही है।” रिपोर्ट में इस बात का साफ-साफ जिक्र था कि भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। इस तरह से पाकिस्तान को अमेरिका से दूर करके भारत ने पाकिस्तान की आतंकवादी नीति के जहर को ही सोखने का उपाय खोज निकाला।अमेरिकी राष्ट्रपति से पाकिस्तान को लताड़ लगवाई
पाकिस्तान की विश्व में आतंकवाद को लेकर फजीहत बढ़ने लगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नव वर्ष 2018 के पहले ही दिन ट्वीट करके पाकिस्तान की आतंकवाद को संरक्षण देने की नीति पर करारा हमला बोला दिया। ट्वीट में कहा, ‘अमेरिका ने मूर्खतापूर्ण ढंग से बीते 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर की सहायता दी। इस मदद के बदले में हमें झूठ और छल के अलावा कुछ भी नहीं मिला। हमारे नेताओं को मूर्ख समझा गया। वे आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह देते रहे और हम अफगानिस्तान में खाक छानते रहे। अब और नहीं।’
जी-20 में आतंकवाद पर पाकिस्तान के खिलाफ समर्थन प्राप्त किया
प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व के 20 सबसे बड़े देशों के समूह,जी 20, के शिखर सम्मेलन में आतंकवाद और पर्यावरण संतुलन को प्रमुख मुद्दा बनाया। आतंकवाद को गरीब के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी बाधा बताया और सभी राष्ट्रों को इसके खिलाफ एकजुट होकर जवाबी कार्रवाई करने के लिए कहा। सभी राष्ट्रों ने भारत का खुलकर समर्थन किया और गैरकानूनी ढंग से धन की आवाजाही को रोकने के लिए व्यवस्था स्थापित करने के लिए बाध्य किया। जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्विटजरलैंड, अमेरिका, रुस, चीन आदि जैसे देशों के साथ जी-20 में मिलकर भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद के नाम पर अलग-थलग कर दिया।पाकिस्तान के घनिष्ठ मित्र चीन को आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होने के लिए मजबूर किया
पाकिस्तान को All Weather Friend कहने वाला चीन भी आतंकवाद के नाम पर पाकिस्तान के साथ खुलकर, भारत के खिलाफ खड़े होने का हिम्मत नहीं रखता है। ब्रिक्स सम्मेलन में चीन को आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने मजबूर कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी के 27-28, अप्रैल 2018 में वुहान में चीन के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता का परिणाम हुआ कि चीन के साथ आर्थिक, समाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में रिश्ते गहरे हो रहे हैं, जो अमेरिका से आर्थिक युद्ध झेल रहे चीन के स्थायित्व के लिए बहुत जरूरी हैं। चीन के साथ बढ़ती घनिष्ठता, पाकिस्तान की आतंकवादी नीति की काट के लिए सबसे कारगर उपाय साबित हो रही है। अब चीन, भारत की पाकिस्तान के आतंकवादियों के खिलाफ की जा रही सैनिक कार्रवाइयों पर उसका साथ नहीं देता है और न ही विश्व मंच पर पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाता है। इससे पाकिस्तान और भी अकेला पड़ता जा रहा है।सार्क समूह में पाकिस्तान को अकेला कर दिया
वर्ष 2016 में पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में जब भारत ने शामिल नहीं होने की घोषणा की तो संगठन के अन्य कई देशों, जैसे – श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान ने भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। हालांकि पाकिस्तान ने अन्य देशों को बुलाने की कोशिश की, लेकिन वो विफल रहा और अंत में सार्क सम्मेलन रद्द करने को मजबूर होना पड़ा। आज तक पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बावजूद भी सार्क सम्मेलन नहीं हो सका है।बिम्सटेक को भी पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ खड़ा किया
नेपाल में 30-31 अगस्त, 2018 को संपन्न हुए हुए बिम्सटेक के चौथे शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने काठमांडू घोषणा पत्र को स्वीकार किया। इसके मुताबिक बिम्सटेक को एक शांतिप्रिय, समृद्ध और सतत् विकास के स्वरूप वाले क्षेत्र में विकसित करने के लिए सदस्य देशों ने सहमति व्यक्त की। घोषणा पत्र में बिम्सटेक चार्टर को जल्द से जल्द बनाने और गरीबी उन्मूलन, ऊर्जा, कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्‍यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड ने आतंकवाद को दरकिनार कर शांति के साथ प्रगति करने की अपनी मंशा जाहिर करते हुए पाकिस्तान की आतंकवादी नीति की जड़ें हिला कर रख दीं।पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की संदिग्धों की सूची यानि ग्रे लिस्ट में डलवाया
इसी साल अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए पाकिस्तान को फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। ग्रे लिस्ट का मतलब  है पाकिस्तान अब एक संदिग्ध देश है और उसके  क्रियाकलापों पर विश्व की एजेंसियों की नजर है। कुछ माह की निगरानी के बाद पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड करने का प्रस्ताव है। इस सूची में आने के बाद से पाकिस्तान को विश्व से मिलने वाली तमाम आर्थिक सहायता और ऋण पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए जायेगें, जिससे पाकिस्तान अपनी आतंकवादी नीति के चलते आर्थिक रुप से कमजोर होता जाएगा। उसे इस स्थिति से बचने के लिए हर हाल में अपनी आतंकवादी नीति छोड़नी ही पड़ेगी।आतंकवादियों के खिलाफ आपरेशन आल आउट से पाकिस्तान को क्लीन बोल्ड किया
प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरफ पाकिस्तान को विश्वस्तर पर घेरा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के आतंकवादियों को सेना से जम्मू-कश्मीर में चुन-चुन कर मरवाया है। ऑपरेशन ऑल-आउट के तहत 2018 में लगभग 250 आतंकवादी मार गिराए गए हैं। इन आतंकवादियों में जैश और लश्कर-ए-तैय्यबा के सभी बड़े कमांडरों को मार गिराया गया है। पाकिस्तान सेना की ओर से की जा रही गोलाबारी का भी जवाब जमकर दिया गया। उसी का परिणाम है कि पाकिस्तान बार-बार भारतीय सेना के कमांडरों को सैनिक कार्रवाई रोकने की गुहार लगाता है।

जम्मू-कश्मीर में विकास को रफ्तार देकर पाकिस्तान को लाचार किया
प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति पाकिस्तान की आतंकवादी नीति और उसके आतंकवादियों के सफाये के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के विकास को तेज करने की भी है, ताकि जिससे राज्य के शांतिप्रिय नागरिक खुशहाल जीवन जी सकें। जम्मू-कश्मीर में हर वर्ष 2 लाख से अधिक पर्यटक आते हैं, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने यहां कनेक्टिविटी की समस्या पर सबसे अधिक ध्यान दिया है। जम्मू-कश्मीर में 80,000 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसी क्रम में उन्होंने इसी वर्ष 19 मई को जम्मू-कश्मीर को लेह-लद्दाख क्षेत्र से जोड़ने वाली एशिया की सबसे लंबी टू-लेन जोजिला सुरंग परियोजना का शिलान्यास किया। इसके साथ ही श्रीनगर शहर के ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए 1860 करोड़ की लागत वाली 42.1 किमी लंबी चार लेन की रिंग रोड की भी आधारशिला रखी। जम्मू में 2,023 करोड़ की लागत से 58.25 किमी लंबी जम्मू रिंग रोड में आठ बड़े ब्रिज, 6 फ्लाइओवर, 2 टनल और 4 डक्ट का निर्माण हो रहा है। 19 मई को ही प्रधानमंत्री मोदी ने बांदीपुरा जिले में 330 मेगावाट किशनगंगा पनबिजली परियोजना का उद्घाटन कर पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उसकी आपत्तियों के कारण जम्मू-कश्मीर का विकास बाधित नहीं होने दिया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के लिए एक ऐसी नीति बनायी है, जिसमें आतंकवाद से निपटने से लेकर विकास को तेज गति से बढ़ाने पर एक साथ काम हो रहा है। जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य के लिए यही कारगर नीति है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 मेंं जमीनी स्तर पर लागू करके दिखा दिया है।

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