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राजस्थान का काशी-कनेक्शन, श्री काशी विश्वनाथ धाम के चार दरवाजे जालोर में तैयार हुए, 12 टन वजनी गेटों को 1300 किमी दूर ले जाने में चार दिन लगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की भव्यता और दिव्यता लोकार्पण के बाद से ही सुर्खियों में है। पीएम मोदी की कल्पना और विजन को कारीगरों ने मूर्त रूप से साकार किया है। प्रधानमंत्री ने खुद काशी धाम का निर्माण करने वाले कई कामगारों पर पुष्पवर्षा कर सम्मान किया और दोपहर का खाना भी उनके साथ खाया था। काशी धाम निर्माण की बात करें तो इसमें राजे-रजवाड़ों की धरती राजस्थान का भी कनेक्शन है। यह कनेक्शन कॉरिडोर को भव्यता प्रदान कर रहा है।

सागवान की लकड़ी से बने दरवाजे शोभा में लगा रहे चार चांद
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में चार विशावकाय दरवाजे लगाए गए हैं। इन दरवाजों को बनाने का जिम्मा अहमदाबाद की जिस कंपनी को दिया गया था, उसने इसका काम राजस्थान के जालोर के कालूराम सुथार को दिया. सुथार ने अपनी टीम के साथ मिलकर ये दरवाजे तैयार किए। ऐसे 4 दरवाजे कॉरिडोर में अंदर जाने या बाहर निकलने वाले रास्तों पर हैं। सभी दरवाजों का वजन और लंबाई-चौड़ाई एक जैसी है। इसमें सागवान की लकड़ी से बने कई टन वजनी दरवाजे चार चांद लगा रहे हैं।

जालोर के 35 कारीगरों ने ढाई महीने तक 18-18 घंटे काम किया
दरअसल प्रधानमंत्री मोदी चाहते थे कि कॉरिडोर के दरवाजे भी भव्य हों, इसलिए राजे-रजवाड़ों की धरती राजस्थान के कारीगरों को इसे बनाने का काम दिया गया। इन्हें बनाने के लिए जालोर के 35 कारीगरों ने ढाई महीने तक 18-18 घंटे काम किया । इनकी नक्काशी देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कारीगरों की खूब तारीफ की। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की भव्यता के चर्चे आजकल हर जुबान पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया।

 

तीन टन वजनी दरवाजों पर 108 चौपड़ बनाए गए हैं
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मुख्य दरवाजे का एक पलड़ा 8 फीट चौड़ा है। प्रवेश करने और बाहर निकलने के लिए 4 दरवाजे हैं। चारों दरवाजों का वजन 3-3 टन है। चारों बड़े दरवाजे एक जैसे और एक ही वजन के हैं। पूरे दरवाजे में 108 चौपड़ या फूल बनाए गए हैं। मंदिर परिसर में ऐसे दो दरवाजे भी लगाए हैं। ये अंदर बने मंदिर में लगाए गए हैं। इनका वजन 2 क्विंटल है। इन पर शेर की आकृति बनाई गई है। 8 दिसंबर तक हमारे कारीगरों ने इन दरवाजों को तैयार कर मंदिर प्रशासन के सुपुर्द कर दिया।

गेटों को जालोर से काशी ले जाने में चार दिन का समय लगा
कालूराम सुथार के मुताबिक दरवाजे तैयार करने का पूरा काम जालोर के रामसीन गांव में हुआ। करीब 80 दिन में दरवाजे बनाने का काम पूरा हो पाया। इनमें 4 मुख्य दरवाजे हैं। इन दोनों ही दरवाजों का वजन करीब 3-3 टन है। बाकी 2 दरवाजे परिसर में लगाए गए हैं। उन्होंने बताया दरवाजों को तैयार करने में सागवान की लकड़ी का प्रयोग किया गया है। यह सुमेरपुर से मंगवाई गई है। तैयार होने के बाद सभी दरवाजे जालोर से ट्रक के जरिए वाराणसी पहुंचाए गए। करीब 1300 किलोमीटर का सफर चार दिन में पूरा हुआ।

ऐसे बने किले जैसे दरवाजे : 23 फीट ऊंचाई व 16 फीट चौड़े
काशी कॉरिडोर के लोकार्पँण से पहले आठ दिसंबर तक हमारे कारीगरों ने इन दरवाजों को तैयार कर मंदिर प्रशासन के सुपुर्द कर दिए। मुख्य दरवाजा 23 फीट ऊंचा और 16 फीट चौड़ा है। मुख्य दरवाजे का एक पलड़ा 8 फीट चौड़ा है। पूरे दरवाजे में 108 चौपड़ या फूल बनाए गए हैं। हर फूल में एक पीतल की कटोरी लगी हुई है। मुख्य दरवाजे में एक छोटा गेट भी बनाया गया है। इसकी ऊंचाई 6.5 फीट की है। कालूराम ने अनुसार कंपनी ने हमसे कहा था कि पुराने समय में जिस तरह किलों के दरवाजे होते थे, बिल्कुल वैसे ही दरवाजे चाहिए। कंपनी की इस डिमांड को ध्यान में रखते हुए ही सागवान की लकड़ी और पीतल के फूल का उपयोग कर इन्हें तैयार किया गया है।

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