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न्यूयॉर्क टाइम्स ने फिर फैलाई भारत के बारे में झूठी खबर: खतरे में अमेरिकी अखबार की साख, पिट रही है भद

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अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की साख खतरे में है। ऐसा लगातार  बार-बार फेक और पक्षपाती खबरों के छापने के कारण हो रहा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अब एक ताजा फेक न्यूज में कहा है कि अफगानों के लिए भारत द्वारा जारी ई-वीजा नीति मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि भारत ने अफगानिस्तान के संकटग्रस्त नागरिकों को शरण देने के लिए एक ‘धार्मिक’ मानदंड अपनाया है, जो तालिबान संचालित राष्ट्र से हिंदुओं और सिखों के प्रत्यावर्तन को प्राथमिकता देगा।

शुरू से ही भारत विरोधी अप्रोच रखने वाले न्यूयॉर्क टाइम्स की यह खबर पूरी तरह से गलत, निराधार और झूठी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि ई वीजा में धार्मिक आधार पर हिंदुओ और सिखों को प्राथमिकता दी जा रही है जबकि ई-वीजा फॉर्म में धर्म का कोई कॉलम ही नहीं है। उसमें सिर्फ नागरिकता की बात की गई है। ये ई-वीजा अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखते हुए शुरू किया गया है और इसमें देश छोड़ने वाले अफगान नागरिकों के लिए धर्म से संबंधित कोई मानदंड रखा ही नहीं गया है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता ने न्यूयॉर्क टाइम्स की इस फेक खबर पर आपत्ति जताते हुए इसे दुष्प्रचार करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ना सिर्फ अपने अफगान साथियों के साथ खड़ा है, बल्कि सभी के लिए तुरंत ई-वीजा की व्यवस्था भी कर रहा है। अच्छा होता कि न्यूयॉर्क टाइम्स भारत के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने की जगह अफगानियों को अपने भाग्य पर छोड़कर भागने वाले अमेरिका पर ध्यान केंद्रित करता।

हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स ने विज्ञापन निकाला था जिसमें कहा था कि उसे भारत में ऐसा पत्रकार चाहिए जो मोदी और हिंदुओं का विरोधी हो। भारत विरोधी मानसिकता रखने वाले इस अखबार की क्रेडिबिलिटी निचले स्तर पर पहुंच गई है। अब इस फेक न्यूज के बाद लोग इसी पर चर्चा कर रहे हैं।

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