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मोदी सरकार ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए राज्यों को जारी किए 17,287 करोड़ रुपये

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोरोना महामारी के खिलाफ जंग का कुशलता से नेतृत्व कर रहे हैं। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत किया है, वहीं गरीबों, मजदूरों के लिए गरीब कल्याण पैकेज लेकर आए हैं। अब मोदी सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए राज्यों को 17,287 करोड़ रुपये जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने राज्य आपदा खतरा प्रबंधन फंड (एसडीआरएमएफ) से 11,092 करोड़ रुपये राज्यों को देने को मंजूरी दी। इसके साथ ही वित्त मंत्रालय ने 14 राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान के तहत 6,195 करोड़ रुपये जारी किए हैं।


बताया जा रहा है कि राज्यों को रकम देने का वादा पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान किया था। गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि केंद्र ने एसडीआरएमएफ में वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अपने हिस्से की 11,092 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। इधर, वित्त मंत्रालय ने भी15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंजाब, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु और त्रिपुरा को राजस्व अनुदान घाटे का 6,195 करोड़ रुपये जारी किया है। राज्यों को इस पैसे का उपयोग क्वारंटीन के अलावा, कोरोना संदिग्धों के सैंपल लेने, स्क्रीनिंग, अतिरिक्त लैब बनाने, स्वास्थ्य, पालिका, पुलिस और दमकल कर्मियों के निजी सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) की खरीद में करना होगा।

2 अप्रैल को पीएम मोदी ने किया था मुख्यमंत्री से संवाद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस से निपटने के उपायों पर चर्चा करने के लिए 2 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद किया। इस वीडियो संवाद में प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बीमारी को फैलने से रोकने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि अगले कुछ हफ्तों में सभी का ध्यान कोरोना वायरस से जुड़ी जांचों, संक्रमितों का पता लगाने, उन्हें अलग-थलग रखने पर केंद्रित रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के निर्णय का समर्थन करने के लिए राज्यों का धन्यवाद किया, जिसकी बदौलत भारत ने कोविड-19 के फैलाव को सीमित करने में कुछ हद तक सफलता हासिल की है। उन्‍होंने सराहना करते हुए कहा कि कैसे सभी राज्यों ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए एक टीम के रूप में एक साथ मिलकर काम किया है। हालांकि, उन्‍होंने आगाह करते हुए कहा कि वैश्विक स्‍तर पर स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है और इसके साथ ही उन्‍होंने कुछ देशों में वायरस के फैलने का एक और संभावित कष्‍टदायक दौर शुरू होने की अटकलों के बारे में बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कम-से-कम लोगों की जान जाए। अगले कुछ हफ्तों के दौरान भी परीक्षण, मरीजों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने, आइसोलेशन और क्‍वारंटाइन पर निरंतर फोकस होना चाहिए। उन्होंने आवश्यक चिकित्सा उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने और दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों के निर्माण के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोविड-19 रोगियों के लिए अलग और विशेष अस्पताल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राज्यों से आयुष डॉक्टरों के संसाधन पूल का इस्‍तेमाल करने, ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित करने और सहायक स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों, एनसीसी तथा एनएसएस के स्वयंसेवकों का उपयोग करने को कहा।

उन्होंने जिला स्तर पर ‘संकट प्रबंधन समूहों’ का गठन करने और ‘जिला निगरानी अधिकारियों’ की नियुक्ति करने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि परीक्षण के लिए मुख्‍यत: मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से ही डेटा लिया जाना चाहिए। इससे जिला, राज्य और केंद्र के डेटा में एकरूपता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बैंकों में भीड़ से बचने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत लाभार्थियों को धनराशि क्रमिक रूप ही से जारी की जाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह फसलों की कटाई का समय है, इसे ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने लॉकडाउन से कुछ छूट दी है, लेकिन निरंतर निगरानी और यथासंभव सामाजिक दूरी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अनाज खरीदने के लिए राज्यों से एपीएमसी के अलावा अन्य प्लेटफॉर्मों के बारे में भी विचार करने और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राइड शेयरिंग एप जैसे पूलिंग प्लेटफॉर्म बनाने की संभावनाओं का पता लगाने को कहा, जिसका उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। मुख्यमंत्रियों ने संकट के इस समय में नेतृत्व करने, निरंतर मार्गदर्शन और आवश्‍यक सहयोग देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने उचित समय पर लॉकडाउन का साहसिक निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की जिससे देश में वायरस को फैलने से रोकने में काफी मदद मिली है। मुख्यमंत्रियों ने सामाजिक दूरी बनाए रखने, संदिग्ध मामलों का पता लगाने, निजामुद्दीन मरकज से जुड़े संदिग्ध मामलों की पहचान करने एवं उन्‍हें क्‍वारंटाइन में रखने, समुदाय में संक्रमण को फैलने से रोकने, चिकित्सा संबंधी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने, चिकित्सा कार्यबल को मजबूत करने, टेली-मेडिसिन की व्‍यवस्‍था करने, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की व्‍यवस्‍था करने, जरूरतमंद लोगों के बीच भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्‍तुओं का वितरण करने और प्रवासी श्रमिकों की देखभाल करने से संबंधित अपने प्रयासों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। राज्यों ने संकट को कम करने के लिए वित्तीय के साथ-साथ चिकित्सीय संसाधनों को भी जुटाने के महत्व के बारे में चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों के सुझावों के साथ-साथ जमीनी स्थिति से अवगत कराने के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि युद्ध स्तर पर काम करना, वायरस के हॉटस्पॉट (ज्‍यादा संक्रमण वाले क्षेत्र) की पहचान करना एवं उन्हें घेरना या निर्दिष्‍ट करना और वायरस को फैलने से रोकना अत्‍यंत आवश्‍यक है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बिल्‍कुल उचित है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने हमारे विश्वास एवं धारणाओं पर हमला किया है और इसके साथ ही हमारे जीवन जीने के तरीके को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से राज्य, जिला, शहर एवं ब्लॉक स्तरों पर विभिन्‍न समुदायों के प्रमुखों एवं समाज कल्याण संगठनों से संपर्क करने की अपील की, ताकि महामारी के खिलाफ लड़ाई में सामुदायिक-दृष्टिकोण के आधार पर एकजुट मोर्चा बनाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों और केंद्र को ‘लॉकडाउन समाप्त होने’ के बाद फिर से सड़कों पर लोगों की आवाजाही क्रमबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के बारे में साझा रणनीति अवश्‍य तैयार करनी चाहिए। उन्होंने राज्यों से विचार-मंथन करने और इस रणनीति के बारे में सुझाव भेजने को कहा। उन्होंने कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने के महत्व को दोहराया।

 

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