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नई शिक्षा नीति से खान मार्केट गैंग में हड़कंप

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देश को 34 साल बाद, नई शिक्षा नीति मिली है। कांग्रेस की यूपीए सरकार  अपने शासन के दस सालों में शिक्षा नीति पर सिर्फ चर्चा ही करती रह गई औऱ हाथ से समय निकल गया। देश का एक दशक बरबाद हो गया।

नई शिक्षा नीति ने शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यकताओं के अनुसार जिन क्रांतिकारी कदमों को उठाने का संकल्प लिया है उसका छात्र, अध्यापक, माता-पिता और उत्तर से लेकर दक्षिण तक की लगभग सभी राज्य सरकारों ने स्वागत किया है, लेकिन कांग्रेस और उसके पत्रकारों व बुद्धिजीवियों के गैंग ने नीति में भाषा का खोट निकाल लिया है।
कांग्रेस की कार्य संस्कृति रही है कि इस देश में पश्चिमी सभ्यता को अपनाने का माहौल बना रहे है और उसके लिए पहली शर्त यही है कि प्राइमरी से उच्च स्तर तक शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी ही हो। कांग्रेस के महान नेता और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने के पूर्ण खिलाफ थे लेकिन जवाहार लाल नेहरु की कांग्रेस ने सिर्फ महात्मा के नाम को ही अपनाया और बाकी सारी संस्कृति नेहरु की अपना ली।

कांग्रेस और नेहरु की इस अंग्रेजी संस्कृति को पोषित औऱ पल्लवित करने का काम खान मार्केट गैंग करता है। खान मार्केट गैंग, कुछ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का समूह है जो भारतीय परंपरा को पोषित और पल्लवित करने का पुरजोर विरोध करता है।नई शिक्षा नीति ने, शिक्षा की पुरानी व्यवस्था 10+2+3 को बदलते हुए 5+3+3+4 कर दिया है। इस नई व्यवस्था में पहले के पांच साल बच्चे के लिए प्राइमरी शिक्षा के साल होंगे जिसमें अंग्रेजी भाषा में शिक्षा प्राप्त करना अनिवार्य नहीं रह गया है, अब बच्चा अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण कर सकता है। इसके साथ ही संस्कृत भाषा को पढ़ने और पढ़ाने पर भी विशेष बल दिया गया है।प्रधानमंत्री मोदी के इस छोटे कदम ने खान मार्केट गैंग पर गंभीर घाव कर दिए हैं। इस गैंग को लग रहा है कि देश में अंग्रेजी भाषा ही नहीं रहेगी तो कांग्रेस का नाम लेने वाला कोई नहीं होगा, इनकी बौखलाहट सोशल मीडिया पर नजर आती है।अंग्रेजी टेलिविजन चैनेल के मूर्धन्य पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में अपनी मानसिकता को उड़ेल दिया। उनका अंग्रेजी भाषा से प्रेम, उनके दर्द के रुप में सामने आ गया-

एक और तेजस्वी महिला पत्रकार सागरिका घोष ने दावा कर दिया कि भारत को सबसे अधिक अंग्रेजी भाषा की जरुरत है

संजुक्ता बासु , कांग्रेस पार्टी का खुलेआम समर्थन करने वाली पत्रकार हैं, ये गैंग की ऐसी सदस्या हैं जो खुलेआम शाहीन बाग में धरना देने का दम भरा करती थी, इन्होंने लिखा है कि अंग्रेजी भाषा सरल है, इसको जानने वाला सब कुछ कर सकता है यहां तक कि माता पिता से संस्कृत के श्लोकों को सिखकर बोल सकता है। ये शब्द बताते हैं कि यह गैंग देश की भाषाओं को किस नजरिए से देखता है।

एनडीटीवी की एक बहुत ही काबिल पत्रकार नीधि राजदान हैं, वह कहती हैं कि उस बच्चे के लिए कौन सी मातृ भाषा होगी जिसके माँ बाप दो अलग अलग समुदाय से आते हों। इन्होंने बहुत ही व्यक्तिगत समस्या को पूरे देश पर थोप कर, अंग्रेजी भाषा का समर्थन कर दिया। ये गैंग ऐसे ही कुतर्कों को जन्म देता है, जिसको काटते काटते देश का सत्तर साल खराब हो गया।

पत्रकारिता के स्तम्भ माने जाने वाले इंडियन एक्सप्रेस की लिज मैथ्‍यू ने पूरी ही शिक्षा नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इनका कहना है कि यह शिक्षा नीति राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ का एजेंडा है। यह गैंग अपने एजेंडे को तार्किक बनाने के लिए ऐसे ही कुतर्कों को जन्म देता है और विरोध का माहौल पैदा करने का प्रयास करता है।

पिछली शिक्षा नीति जो 34 साल पहले आयी थी उनमें इस गैंग कोई एजेंडा नजर नहीं आता था, आज इनको हर नीति में एजेंडा नजर आता है, क्योंकि इनके पास कोई ठोस तर्क नहीं है।

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