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मोदी कूटनीति का असर: पाक को आर्थिक मदद रोकने की तैयारी में अमेरिका

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक रणनीति रंग ला रही है। आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई ना किए जाने से असंतुष्ट अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार पाकिस्तान को दी जाने वाले 25 करोड़ 50 लाख डॉलर (करीब 16 अरब 27 करोड़ रुपये) की सहायता राशि रोकने पर विचार कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध तब से तनावपूर्ण बने हुए है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि पाकिस्तान अराजकता, हिंसा और आतंकवाद फैलाने वाले लोगों को पनाहगाह देता है। अखबार ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्कों के खिलाफ उसके कार्रवाई ना करने पर असंतोष के रूप में 25 करोड़ 50 लाख डॉलर की सहायता राशि रोक दी जाए।

पिछले साढ़े तीन साल में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को एक के बाद एक कई बड़े झटके दिए हैं जिससे पाकिस्तान विश्व बिरादरी में एक आतंकवादी देश के तौर पर स्थापित हो गया है और अलग-थलग पड़ता जा रहा है।

आतंकियों के लिए स्वर्ग पाकिस्तान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान को यह कहते हुए फटकार लगाई थी कि पाकिस्तान आतंकियों के लिए स्वर्ग बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अक्सर अराजकता, हिंसा और आतंकवाद के एजेंटों को सुरक्षित पनाह देता है। पाकिस्तान में लोग आतंकवाद से पीड़ित हैं, लेकिन आज पाकिस्तान आतंकियों के लिए सेफ हैवन भी है। अगर पाकिस्तान आतंकी संगठनों का साथ देता रहा तो हम इस पर चुप नहीं बैठेंगे।

हिजबुल मुजाहिदीन पर लगा प्रतिबंध
पिछले 17 अगस्त को अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन को आतंकी संगठन करार दिया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हिजबुल मुजाहिद्दीन को आतंकवादी संगठन घोषित करने से इसे आतंकवादी हमले करने के लिए जरूरी संसाधन नहीं मिलेगा, अमेरिका में इसकी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी और अमेरिकी नागरिकों को इससे संबद्धता रखने पर प्रतिबंधित होगा। अमेरिका ने यह भी कहा है कि हिजबुल कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है। दरअसल जम्मू कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्थानीय युवकों की भर्ती करता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध के बाद उसके वित्तीय नेटवर्क को बड़ा नुकसान हुआ है।

हिजबुल मुजाहिदीन के लिए चित्र परिणाम

आतंक की फैक्ट्री चलाता है पाकिस्तान
लश्कर ए तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे जितने भी आतंकवादी संगठन है उन्हें पाकिस्तान अपनी धरती पर या अपने कब्जे वाले कश्मीर में प्रशिक्षण देता है। इस काम में आतंकवादी संगठनों के मुखिया तो केवल मुखौटे की तरह इस्तेमाल होती हैं। असल में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के अफसर इस ट्रेनिंग में सीधे तौर पर जुड़े रहते हैं। जब सैकड़ों ट्रेनिंग कैंप्स में आतंकवादियों को हिंसा की ट्रेनिंग दे दी जाती है तो उन्हें हथियारों और बाकी सामानों के साथ भारत में भेजने का खेल चलता है। इस काम में भी पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स का सक्रिय योगदान होता है। भारत ही नहीं, अफगानिस्तान और ईरान में सक्रिय अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादियों को भी उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के कबिलाई इलाकों में ट्रेनिंग दी जाती है।

हिजबुल मुजाहिदीन के लिए चित्र परिणाम

पाकिस्तान नहीं आतंकिस्तान कहिए…!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के चलते पाकिस्तान तब एक बार फिर बेनकाब हो गया जब अमेरिका ने बीते 20 जुलाई को पाकिस्तान को आतंकवादियों की शरणस्थली वाले देशों की सूची में डाल दिया था। अमेरिका ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण और बढ़ावा देता है। पाकिस्तान में इनको ट्रेनिंग मिलती हैं और पाकिस्तान से ही इन आतंकवादी संगठनों की फंडिंग हो रही है। दरअसल भारत लंबे समय से इसकी मांग करता आया था लेकिन अमेरिकी प्रशासन इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले से भारत का पक्ष पूरी दुनिया में मजबूत हुआ है।

हिजबुल मुजाहिदीन के लिए चित्र परिणाम

सैयद सलाहुद्दीन पर अमेरिकी प्रतिबंध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत से ठीक पहले 26 जून को अमेरिका ने हिजबुल सरगना सैयद सलाउद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। जम्मू-कश्मीर में कई हमलों के पीछे उसका हाथ रहा है। पाकिस्तान हिजबुल को कश्मीरी युवाओं की आवाज बताता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हिजबुल के स्थानीय कमांडर बुरहान वानी को शहीद बताकर तारीफ की थी। आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर चलाए जा रहे अभियान की यह एक बड़ी सफलता है।

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