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अब भ्रष्ट अफसरों की बारी, 15 अगस्त के बाद मोदी सरकार कर सकती है कड़ी कार्रवाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अब भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है। जानकारी के अनुसार सरकार ऐसे दागी अफसरों की लिस्ट बना रही है और 15 अगस्त के बाद उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी जायेगी। दरअसल मोदी सरकार ने तीन साल से कुछ अधिक के अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार के अलावा सामाजिक, आर्थिक और सैन्य क्षेत्र में चुन-चुनकर सर्जिकल स्ट्राइक किये हैं। लगता है कि अबकी बार पीएम मोदी ने भ्रष्ट अफसरों को सबक सिखाने का फैसला कर लिया है।

15 अगस्त से दागी अफसरों पर गिरेगी गाज !
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मोदी सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी की है। इसके लिये सभी मंत्रालयों और विभागों से 5 अगस्त तक हर हाल में ऐसे लोगों की लिस्ट मांगी गई है। इस लिस्ट के साथ उन अफसरों से जुड़े आरोप, उनके खिलाफ हुई जांच और उनपर पहले हुई कार्रवाई का दस्तावेज भी देने को कहा गया है। ये पूरा दस्तावेज केंद्रीय सतर्कता आयोग की देखरेख में तैयार होगा। इस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र भी होगा कि क्या संबंधित अफसर के खिलाफ पहले कोई विभागीय कार्रवाई हुई है और क्या पहले किसी ने उन्हें बचाने का भी प्रयास किया है ? खबरें हैं दस्तावेज तैयार होने के बाद उसे सीबीआई जैसी संबधित एजेंसियों के पास भेजा जायेगा, जो उन दागी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।

भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कानून को किया सख्त
दरअसल मोदी सरकार इस तरह की कार्रवाई के लिये पहले से ही तैयारी कर रही है। खबरों के अनुसार हाल ही में दागी सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिये 50 साल पुराने कानून को सख्त किया गया है। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच होती है तो उसे 6 महीने में पूरा करना आवश्यक है। जाहिर है कि इस निर्णय से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई है। अब ऐसे अफसरों के खिलाफ तुरंत मुकदमा किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर जुर्माना, बर्खास्तगी या डिमोशन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

100 से अधिक दागी IAS पर भी नजर
नवभारत टाइम्स पोर्टल में छपी खबर के अनुसार खराब प्रदर्शनों के चलते कई IAS और IPS अफसरों की छुट्टी करने के बाद लगभग 110 और ऐसे ही अफसर सरकार की नजरों में हैं। माना जा रहा है कि इन अफसरों पर या तो भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं या फिर ये कानून को नजरअंदाज करके अपनी मनमानी करते हैं। बड़ी बात तो ये है कि करीब 25 IAS तो ऐसे हैं तो पिछले कई सालों से बिना जानकारी के ड्यूटी से ही गायब हैं। गौरतलब है कि पीएम मोदी बार-बार आगाह करते रहे हैं कि वो भ्रष्टाचारियों को कत्तई छोड़ने वाले नहीं हैं।

बेनामी संपत्तियों पर बड़ी मार
कालेधन और बेनामी संपत्ति के विरुद्ध मोदी सरकार का अभियान लगातार जारी है और इसमें लगातार सफलताएं मिल रही हैं। बीते 15 महीने में ही लगभग 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। जबकि इस साल 30 जून तक कुल 22,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं। इसके अलावा ऐसे संपत्ति रखने वाले कई हाई प्रोफाइल लोगों की गिरफ्तारियां भी की गई हैं।

नोटबंदी और GST भ्रष्टाचार पर बड़ी मार
नोटबंदी, कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार का सबसे बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक साबित हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था से अलग 5 लाख करोड़ रुपये के दबे हुए नोट बाहर आ गये। कैश की जमाखोरी से अर्थव्यवस्था बिगड़ने लगी थी। यही नहीं जानकारी के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में ही करीब 560 करोड़ रुपये के कालेधन का खुलासा हुआ है। इसी तरह GST ने लागू होने के एक महीने के भीतर ही हर दिशा में क्रांतिकारी बदलाव लाने शुरू कर दिये हैं। इसने सरकार को अप्रत्यक्ष कर की चोरी रोकने का एक बड़ा हथियार दिया है, जिससे सरकारी खजाने में आमद काफी बढ़ गई है। गरीबों की चीजें सस्ती हुईं हैं और टोल नाके खत्म होने से प्रदूषण पर भी लगाम लग गया है।

गैस सब्सिडी की चोरी रुकने का प्रतिफल है उज्जवला योजना
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना मोदी सरकार की ऐसी योजना है, जिसने सामाजिक क्षेत्र में गरीबों के जीवन में क्रांति तो ला ही दी है। इसने सरकार के खजाने से गैस सब्सिडी के नाम पर मची लूट को खत्म कर दिया है। जब से मोदी सरकार ने गैस सब्सिडी को सीधे खाते में ट्रांसफर करने की मुहिम शुरू की है, गैस सब्सिडी की चोरी 100 प्रतिशत रुक गई है। इसका नतीजा ये हुआ है कि मोदी सरकार बीपीएल परिवारों को फ्री गैस कनेक्शन और चूल्हे दे पा रही है। अब तक 2.55 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल चुका है। हर बीपीएल परिवार को LPG गैस कनेक्शन खरीदने के लिए 1600 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इनमें बड़ी तादाद दलितों और पिछड़ों की है।

भारतीय सेना का सर्जिकल स्ट्राइक
मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक सबसे पहले तब चर्चित हुई जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी कैंप्स को नेस्तनाबूद करने का पराक्रम दिखाया। आजादी के समय से ही पाकिस्तान अपने सैनिकों और आतंकवादियों के माध्यम से भारत में अस्थिरता फैलाने का काम करता रहा है। लेकिन इससे पहले किसी सरकार ने सेना को पाकिस्तान के घर में घुसकर मारने का आदेश नहीं दिया था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशहित में निर्णय करके दिखा दिया कि हम शांति चाहते हैं, लेकिन जब कोई हमें आंख दिखाएगा तो हम उसकी आंखें निकालना भी जानते हैं।

वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली सर्जिकल स्ट्राइक का संदेश तो सत्ता संभालने के पहले ही दिन दे दिया था। उन्होंने कैबिनेट की पहली ही बैठक में ही विदेशी बैंकों में जमा कालेधन का पता लगाने के लिये SIT का गठन कर दिया था। पीएम मोदी का ये भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ पहला सर्जिकल स्ट्राइक था। तब से लेकर अबतक सरकार ने ऐसा कोई क्षेत्र खाली नहीं छोड़ा है, जिसमें इस तरह के सख्त कदम नहीं उठाया गये हों।

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