Home विचार साधु-संतों की हत्या पर बुद्धिजीवियों की ‘खामोश लिंचिंग’!

साधु-संतों की हत्या पर बुद्धिजीवियों की ‘खामोश लिंचिंग’!

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आठ दिनों के भीतर सात हिंदू साधुओं की नृशंस हत्या कर दी गई है। जिनका कत्ल किया गया है वे सभी संत थे, मंदिर के महंत थे। यूपी के औरेया में साधुओं की हत्या करने वाले जिन आरोपियों को पकड़ा गया है उनके नाम हैं- सलमान, नदीम, शहबाज, मजनू उर्फ नाजिम और गब्बर। दरअसल इन घटनाओं में गौतस्करों का कनेक्शन सामने आ रहा है, लेकिन मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग खामोश है। इसके उलट मुस्लिम गौतस्करों पर कोई ऊंगली तक उठा दे तो तथाकथित बुद्धिजीवी लिंचिंग-लिंचिंग की रट लगाने लगते हैं। परन्तु इन निरीह साधु-संतों की हत्या पर तो जैसे ये देश से गायब ही हो गए हैं।

आपको बता दें कि साधुओं की हत्या का सिलसिला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से शुरू हुआ है। 12 अगस्त की रात शिवमंदिर के पुजारी और महंत की सोते वक्त पीट-पीटकर हत्या की गई। इसके बाद 15 अगस्त को उत्तर प्रदेश के ही औरैया में बिधूना के भयानक नाथ मंदिर में तीन साधुओं का तालिबानी अंदाज में कत्ल किया गया। तालिबानी इसलिए कि पहले साधुओं की जीभ काटी गई और फिर गले काट दिए गए।

इसके बाद 19 अगस्त की रात करनाल में भाई-बहन मंदिर में चारपाई से बांधकर 2 साधुओं की हत्या कर दी गई। मंदिर के अन्य 3 सेवादारों को भी अधमरा कर दिया गया।

20 अगस्त को इलाहाबाद के करेलाबाग सुब्बनघाट पर एक मंदिर में कैलाश गिरी नाम के साधू को पेड़ से लटकाकर मार दिया गया।

दरअसल गौतस्करों के भीतर कानून को ठेंगा दिखाने का हौसला इसलिए आया है क्योंकि तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग और मीडिया का एक खास धड़ा गौरक्षकों को आतंकवादी बताकर गौतस्करों का समर्थन करते हैं। बहरहाल ‘मॉब लिंचिंग’ को लेकर महीनों हो हल्ला मचाने वाला यह वर्ग मौन है। न तो टीवी चैनलों पर डिबेट हो रही और न ही कोई मार्च निकाला जा रहा है।

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