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बिहार के रोहित के लिए संकटमोचक बने पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 साल के रोहित कुमार के लिए संकटमोचक बनकर सामने आए हैं। ऐसे समय में जब रोहित के परिवार को मदद की सख्त जरूरत थी, प्रधानमंत्री ने महज एक खबर का संज्ञान लेकर उन्हें ये मदद पहुंचाई। हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में खबर आने पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एम्स में रोहित का इलाज कर रहे डॉक्टर से बात की। जिसके तुरंत बाद 13 फरवरी को रोहित के इलाज और पोर्टेबल वेंटिलेटर खरीदने के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपए जारी कर दिए गए।

एम्स में भर्ती बिहार के सीवान का रोहित कुमार अब घर जा सकता है। रोहित को एम्स के न्यूरो सर्जरी वार्ड तीन के 19 नंबर बेड पर पिछले एक साल से रखा गया है। स्पाइनल सर्जरी होने पर एक जनवरी 2016 के बाद उसे कभी भी डिस्चार्ज किया जा सकता था। इसके लिए रोहित को एक पोर्टेबल वेंटिलेटर चाहिए। लेकिन प्रोटेबल वेंटिलेटर को खरीदने के लिए उसके परिवार के पास जरूरी 1 लाख रुपए नहीं होने के कारण वह साल भर से एम्स में ही है। ऐसे में पीएमओ से मदद किसी वरदान से कम नहीं है।

दो साल पहले एक हादसे में रोहित के रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। डाक्टरों ने सर्जरी के बाद उसकी जिंदगी तो बचा ली, लेकिन 14 साल के रोहित के कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। ऐसे में मरीज को कई बार सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की जरुरत होती है खासतौर पर सोने के समय।

रोहित किसान परिवार से हैं। उसके परिवार की मासिक आमदनी मुश्किल से छह-सात हजार रुपए है। ऐसे में आर्थिक लाचारी के कारण एक लाख रुपए की पोर्टेबल वेंटिलेटर मशीन ना खरीद पाने के कारण वह एक साल से एम्स में पड़ा है। एम्स के डॉक्टर दीपक अग्रवाल का कहना है कि अब हम वेंटिलेटर के आने का इंतजार कर रहे हैं और हो सकता है कि एक हफ्ते के भीतर रोहित को यहां से डिस्चार्ज कर दिया जाए।

प्रधानमंत्री से मदद पाकर रोहित का परिवार बेहद खुश है। वे प्रधानमंत्री मोदी को दुआएं दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार मानवता की मिसाल पेश की है। आइए नजर डालते हैं उनमें से कुछ पर-

इसके पहले प्रधानमंत्री ने 12 साल के पार्थ और उसके परिवार को महज एक खत का संज्ञान लेकर मदद पहुंचायी। गुजरात के भावनगर में रहने वाले पार्थ के पिता को अपने बेटी की बीमारी का पता महज पांच महीने पहले चला। स्कूल से होमवर्क नहीं करने, लड़खड़ा कर गिर पड़ने जैसी बातें जब उन तक पहुंची तो उन्होंने भावनगर में स्थानीय डॉक्टरों की सलाह पर राजकोट, अहमदाबाद और मुम्बई में इलाज कराया। ऐसा करते हुए सारी जमा पूंजी खत्म हो गयी। पार्थ की मां को गहने तक बेचने पड़े। बावजूद इसके इलाज होता मुमकिन नहीं दिख रहा था।

एसएसपीई यानी सब एक्यूट स्किलिरोजिंग पेन इन्सेफलाइटिस नामक बीमारी लाइलाज बन चुकी थी। पार्थ के पिता ने इस मुश्किल हालात में पीएम नरेन्द्र मोदी से गुहार लगायी। खत मिलते ही प्रधानमंत्री ने तुरंत मदद भेजी। पार्थ को एम्स में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को इस मामले को खास तौर से देखने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री ने सौंपी।

पार्थ के पिता का कहना है कि प्रधानमंत्री की मदद से शुरू हुए इलाज से अब पार्थ की स्थिति में सुधार हो रहा है। डॉक्टर भी कह रहे हैं कि ये बीमारी गम्भीर है। इसमें याददाश्त कमजोर होती चली जाती है। इलाज किया जा रहा है। फिलहाल पार्थ की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

डोरिस को दी आर्थिक मदद, डॉक्टरों से भी की बातचीत

दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले की डोरिस फ्रांसिस को प्रधानमंत्री कार्यालय से तीन लाख रुपए की मदद मिली। डोरिस एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से नेशनल हाइवे 24 पर ट्रैफिक संभालती है। वह जहां ट्रैफिक संभालती हैं, वहीं उनकी 17 साल की बेटी का सड़क हादसे में निधन हो गया था। वह इन दिनों कैंसर से जूझ रहीं हैं।

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तैयबा का सहारा बने ‘मोदी अंकल’
आगरा की तैयबा का परिवार तो निराश हो चला था। महज 12 साल की उम्र में तैयबा के दिल का एक वॉल्व खराब हो गया। इलाज बेहद खर्चीला था। कैसे होगा इलाज। तभी तैयबा को मोदी अंकल का ध्यान आया। क्यों न उनसे मदद मांगी जाए। तैयबा ने पीएम को चिट्ठी लिखी और नतीजा दुनिया के सामने है। तैयबा का दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में इलाज चल रहा है।

तैयबा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा कि वह जन्म से ही दिल की बीमारी से पीड़ित है और उसके मजदूर पिता के पास 15 से 20 लाख रुपये नहीं कि इलाज करा सकें। तैयबा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उन्हें पीएमओ से जवाबी चिट्ठी मिली। उसी खत में दिल्ली सरकार को निर्देश भी दिया गया था कि खर्च की परवाह किए बिना तैयबा का उचित इलाज करवाया जाए। दिल्ली सरकार ने भी इस पत्र पर कार्रवाई करते हुए गुरु तेग बहादुर अस्पताल को तैयबा के इलाज का निर्देश दिया और इलाज शुरू हो गया।

पीएम की मदद के बाद अब तैयबा को कोई चिंता नहीं। वह खुश है कि अब उसके परिवार को किसी परेशानी का सामना करना नहीं पड़ रहा है। महज तीसरी क्लास में पढ़ने वाली तैयबा जीना चाहती है, बड़ी होकर बैंकर बनना चाहती है। मोदी अंकल को वो बार-बार थैक्यू कहना नहीं भूलती।

समाचार पत्र से मिली जानकारी के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें आर्थिक सहायता मुहैया कराई । मदद के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने डोरिस के परिजनों से भी बात की। कार्यालय की तरफ से एम्स के डॉक्टरों से भी बात की गई। डोरिस की हालत में अब काफी सुधार है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत खतरे से बाहर है और उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

सांसद की अनुशंसा पर कैंसर पीड़ित की मदद

पटना के बीएम दास रोड निवासी सुमित रंजन सिन्हा को कैंसर इलाज के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपए दिए गए। राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा की अनुशंसा पर पीएम नरेंद्र मोदी ने सहायता राशि को स्वीकृति दी। पीएम ने सुमित को एक शुभकामना संदेश भी भेजा, जिसमें उनके रोगमुक्त होने की कामना की। इसके अलावा सांसद की अनुशंसा पर कुर्जी के सना अर्फी को कैंसर के इलाज के लिए तीन लाख रुपए जबकि दिल्ली के प्रमोद जैन को भी पीएम राहत कोष से गंभीर बीमारी के इलाज के लिए 50 हजार रुपए दिए।

नन्ही परी रिद्धि को 3 लाख की मदद

बुलंदशहर की कैंसर पीड़ित नन्ही बच्ची रिद्धि को प्रधानमंत्री ने 3 लाख रुपए की मदद दी है। बुलंदशहर के हाजीपुर गांव के रहने वाले रिद्धि के पिता प्रयमेंद्र दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन अपनी इकलौती बेटी को कैंसर से निजात दिलाने के संघर्ष में उनकी नौकरी चली गई। लाखों रुपए की जमापूंजी और गांव का खेतीबाड़ी बेचकर प्रयमेंद्र ने अपनी बेटी का इलाज कराया।

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दिल्ली के धर्मशिला अस्पताल में रिद्धि की 5 बार कीमियोथैरेपी हुई और फिर बोनमैरो ट्रांसप्लांट हुआ। लेकिन महज दो महीने बाद जांच में पता चला कि रिद्धि का कैंसर फिर से लौट आया है। अपने रिश्तेदार, दोस्तों से उधार लेकर रिद्धि के इलाज में लगा चुके प्रयमेंद्र की पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 लाख रुपए से मदद की।

हार्ट सर्जरी के लिए की नाबालिग को मदद

हार्ट की गंभीर समस्या से जूझ रहे 16 वर्षीय नाबालिग ने प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद मांगी। मदद मांगने के बाद वह चंडीगढ़ में एक एक चोरी के केस में पकड़ा गया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाबालिग के इलाज के लिए 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी है।

वाराणसी के कैंसर पीड़िता को मिली नयी जिन्दगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक महिला अपनी बेटी का इलाज कराने की गुहार लगाई। इस महिला की बेटी की दोनों किडनियां भी खराब है। प्रधानमंत्री ने पीड़िता को वाराणसी के रविंद्रपुरी स्थित दफ्तर में मुलाकात की। यह दफ्तर उनके संसदीय क्षेत्र के लोगों की समस्याएं इकट्ठा करने के लिए ही बनाया गया था। मोदी से मिलकर आईं कल्याणी मिश्रा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से अपनी बेटी का इलाज कराने की गुहार लगाई। प्रधानमंत्री ने तुरंत ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों का नंबर लगाया और उन्हें कहा कि मुझे पहली प्राथमिकता देते हुए मेरी सहायता की जाए। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि प्रधानमंत्री इतना विनम्र और मददगार हो सकता है।

पीएम की मदद से छह साल की वैशाली की हुई ओपन हार्ट सर्जरी

vaishaliमोदी सरकार की तत्परता का अनुभव पुणे की सात साल की वैशाली यादव नाम की छोटी बच्ची ने लिया। वह पुणे में हडपसर के पास भेकराई नगर में रहती है। पहली कक्षा में पढ़ने वाली वैशाली के दिल में होल होने की वजह से वो हमेशा बीमार रहती थी। डॉक्टर सर्जरी अनिवार्य बताया। बच्ची के चाचा मजदूरी करते है। बहादुर बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर अपने मन की बात बताई। खत मिलने पर पीएमओ ऑफिस से पुणे के कलेक्टर को वैशाली की मदद करने कहा गया और पुणे के रुबी हॉल क्लिनिक में वैशाली की ओपन हार्ट सर्जरी भी पूरी हो गई। वो अपने घर पर सुरक्षित है। वैशाली के घरवालों के लिए यही अच्छे दिन है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश पर मिली मदद

नोटबंदी की वजह से सारनाथ की ज्योति साहू को दुल्हन बनना मुश्किल लगने लगा तो प्रधानमंत्री को खत लिखा। प्रधानमंत्री दफ़्तर के निर्देश पर बीस हज़ार रुपए की मदद मिली।

प्रधानमंत्री की मदद से डीएवी में पढ़ेगा बच्चा

मुजफ्फरपुर बिहार जिले के प्रखंड मुरौल के शांभा के छात्र दिव्यांशु ने रेडियो पर प्रधानमंत्री के मन की बात सुनी। उसके बाद उसने अपने मन की बात कहने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। उसने लिखा किdibyanshu
उसका सपना डॉक्टर बनने का है। पापा जैसे-तैसे घर संभालते हैं। दादा जी के इलाज में बहुत सारे पैसे खत्म हो जाते हैं। इतने पैसे नहीं कि अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर सके। उसने लिखा कि वह डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों का इलाज करना चाहता है।

पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय (एमएचआरडी) ने उसके नामांकन की सिफारिश सीबीएसई बोर्ड से की। फिर, बच्चे की इच्छानुसार सीबीएसई ने मुजफ्फरपुर के डीएवी पब्लिक स्कूल (मालीघाट) में उसके नामांकन के लिए स्कूल के प्राचार्य को पत्र लिखा। उसके बाद छात्र का सपना पूरा हो गया।

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