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देश में फसाद करवाना चाहता है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड !

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”ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड कट्टरपंथी ताकतों के कब्जे में है और यह देश में दंगा करवाना चाहता है।” दो दिन पहले तक AIMPLB के सम्मानित सदस्य रहे मौलाना सलमान नदवी ने यह कहते हुए बोर्ड से विदाई ले ली। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने भी आरोप लगाया है कि- ”पाकिस्तान और सऊदी अरब के आंतकी संगठन भारत के मुस्लिमों से संबंधित फैसले करते हैं और AIMPLB उन्हीं आतंकी सगंठनों की शाखा है।” साफ है कि देश के दो बड़े मुस्लिम संगठनों के सदस्यों ने ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड की सच्चाई को सबके सामने लाने की कोशिश की है। दरअसल मौलाना सलमान नदवी को बोर्ड इसलिए छोड़ना पड़ा कि उन्होंने इन कट्टरपंथी ताकतों के आगे झुकने से इनकार कर दिया। वहीं वसीम रिजवी को भी लगातार धमकियां मिल रही हैं। बहरहाल इन आरोपों में सच्चाई कितनी है यह तो जांच का विषय है, लेकिन AIMPLB की हरकतों से तो यह साफ है कि वह देश में शांति नहीं चाहता है। देश में कई बार ऐसी बातें सामने आई हैं जब AIMPLB की भूमिका अड़ने वाली रही है जिससे देश में दंगे-फसाद की स्थिति सामने आ जाती है।

राम जन्मभूमि पर समझौते को तैयार नहीं
राम जन्मभूमि विवाद मामला का सामंजस्यपूर्ण हल निकालने की जब कोशिश की जाती है तो बोर्ड उसमें अड़ंगा डालता है। बोर्ड का साफ कहना है कि- वहीं मस्जिद बनाएंगे चाहे जानें चली जाएं। AIMPLB बाबरी ढांचे की जगह पर ही मस्जिद बनाने पर अडिग है। इस मामले में वह न तो मुस्लिम समुदाय के भीतर से उठ रही आवाज को सुनना चाहता है और न ही सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को स्वीकार करने की बात कहता है। जाहिर है देश जानना चाहता है कि AIMPLB आखिर चाहता क्या है? मौलाना नदवी और श्री श्री रविशंंकर जैसे मध्यममार्गी और शांतिपूर्ण सह अस्तित्व में विश्वास रखने वाले लोगों से खार क्यों खाता है पर्सनल लॉ बोर्ड?

देश में कट्टरता फैला रहा AIMPLB !
दरअसल राम जन्मभूमि विवाद पर जब अदालती दायरे से बाहर हल निकलने की उम्मीद जताई जा रही थी तो AIMPLB ने एक बार फिर अड़ंगा डाल दिया है। मुद्दे का शांतिपूर्वक हल निकलने की उम्मीद को AIMPLB की जिद ने पलीता लगा दिया है। जाहिर है AIMPLB देश में बहुसंख्यक समुदाय की भावना पर कुठाराघात करने का काम किया है। वह ऐसी जिद पर अड़ा है जिससे देश में एक बार फिर दंगे की सूरत बन सकती है। क्योंकि बोर्ड के रुख से 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था पर आघात हो सकता है और AIMPLB का इरादा (दंगे-फसाद का) सफल हो सकता है।

मुस्लिम उदारवादियों को देता है ‘दंड’
सलमान नदवी ने साफ कहा है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर अब कट्टरपंथी हावी हो गए हैं, जहां उदारवादियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं रह गयी है। सवाल उठ रहा है कि मौलाना सलमान नदवी जैसे शांति चाहने वाले लोगों को दरकिनार कर आखिर देश को किस दिशा में ले जाना चाहता है AIMPLB ? बोर्ड की बागडोर आखिरकार क्यों असददुद्दीन ओवैसी जैसे कट्टर नेताओं के हाथ में चला गया है। आजम खां जैसे लोग बोर्ड में दखल दे रहे हैं। कासिम रसूल इलियास और कमाल फारूकी जैसे लोग जहरीले बयान दे रहे हैं और देश को दंगों की आग में झोंकने को तैयार बैठे हैं।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए इमेज परिणाम

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ की आलोचना नहीं करता AIMPLB
मुस्लिमों की संपूर्ण रहनुमाई का दावा करने वाला AIMPLB ने आज तक कोई ऐसी नजीर नहीं पेश की है जिससे ये लगे कि वह वास्तव में देश का संगठन है। शाहबानो प्रकरण में बोर्ड की सियासत सबने देखी थी। अब भी जब खुलेआम सड़कों पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं तो भी बोर्ड इसकी निंदा नहीं करता। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे जब सरेआम लगते हैं तो भी पर्सनल लॉ बोर्ड इसका विरोध नहीं करता है। इसी तरह PFI जैसे संगठन देश में जब खुलेआम लव जिहाद को समर्थन करता हा तो भी वह इसकी निंदा नहीं करता है।

गोहत्या पर पर्सनल लॉ बोर्ड क्यों है चुप?
केरल में जब खुलेआम सड़कों पर गाय का कत्ल किया जाता है और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचती है तो भी AIMPLB इसकी आलोचना नहीं करता है। इसी तरह जब तमिलनाडु के IIT कैंपस में सरेआम बीफ पार्टी की जाती है तो AIMPLB चुप्पी साधे रहता है। लेकन यही बोर्ड दादरी में हिंदुओं की भावना को चोट पहुंचाने पर लोगों के गुस्से का शिकार हुए अखलाक को एक राष्ट्रीय मुद्दा बना देता है। लेकिन कासगंज में मुसलमानों द्वारा मारे गए चंदन की हत्या पर एक शब्द नहीं बोलता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए इमेज परिणाम

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं मानता AIMPLB
मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी AIMPLB ने विरोध किया था। यानि वह संविधान और सर्वोच्च अदालत से भी अपने आपको ऊपर मानता है। जाहिर है देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए ऐसी स्थिति घातक साबित होने वाली है।

बहुविवाह और हलाला प्रथा पर साध रखी है चुप्पी
मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह और हलाला जैसी कुप्रथाएं महिलाओं के लिए कोढ़ के समान हैं। लेकिन पुरुषवादी सत्ता में यकीन रखने वाला AIMPLB को मुस्लिम महिलाओं की इस पीड़ा से कुछ भी लेना-देना नहीं है। केंद्र की सरकार इन कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए तत्पर दिख रही है, लेकिन AIMPLB इसका विरोध कर रहा है। जाहिर है ऐसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए जिस बोर्ड को कदम बढ़ाने चाहिए उसपर वह लोगों को भड़काने का काम कर रहा है।

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