Home नरेंद्र मोदी विशेष मुद्रा ने दी 8.18 करोड़ लोगों को आर्थिक आजादी

मुद्रा ने दी 8.18 करोड़ लोगों को आर्थिक आजादी

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जसप्रीत कौर की बरेली में कपड़ों की दुकान है। दुकान पर कॉस्मेटिक का सामान बेचने के लिए जसप्रीत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 50,000 रुपये का ऋण लिया है। 26 साल की जसप्रीत को यह ऋण आसानी से मिल गया। इसके लिए, वह हर माह 1250 रुपये बैंक में ईएमआई जमा करती हैं। वह बताती हैं, कि उनको अब अपनी उसी दुकान से 1000 रुपये की हर माह अधिक आमदनी होती है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक हर माह, वह सीबीगंज की एसबीआई शाखा में ईएमआई के रुपये जमा कराने जाती हैं। लेकिन ऑटो डेबिट की सुविधा मिलने के साथ ही जल्द ही इस झंझट से भी मुक्ति मिल जाएगी। 

6.2 करोड़ महिलाओं को मिला लाभ
देश में जसप्रीत जैसी इस देश में 6.2 करोड़ महिलाएं हैं, जिन्होंने बैंकों से ऋण लेकर अपने छोटे- छोटे काम-धंधो को बढ़ा करके परिवार की आमदनी में इजाफा किया है। सरकारी आंकड़ों में जसप्रीत जैसी महिलाओं के जीवन की सच्चाई छुपी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले ही समझ लिया था। इसलिए उन्होंने 08 अप्रैल 2015 को मुद्रा योजना का शुभांरभ किया। अब, सभी को इसका सीधा फायदा दिखाई दे रहा है। यह बात तो समझ में आती ही है कि सरकार देश में सभी को नौकरियां नहीं दे सकती, लेकिन रोजगार के अवसर और धन उपलब्ध करवा करके सभी का विकास में योगदान सुनिश्चित कर सकती है।

ऋण लेने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा
मोदी सरकार ने इस योजना के तहत लोगों को अभी तक 3,55,590 करोड़ रुपये का ऋण दिया है। इसमें से लगभग 50 प्रतिशत यानि 1,78,313 करोड़ रुपये 6.2 करोड़ महिलाओं को मिला है। यह कुल ऋण लेने वालों की संख्या का 78 प्रतिशत है। दो साल के अंदर, रोजगार के अवसर उपलब्ध होने का यह एक बड़ा आंकड़ा है। इस योजना से महिलाओं को ही नहीं, सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोगों को फायदा मिल रहा है। सही मायनों में यह योजना प्रधानमंत्री मोदी के मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास का सटीक उदाहरण है।

एक-एक से ग्यारह
बरेली के 46 वर्षीय नदीमुल हसन की आलमगीरगंज में जूते-चप्पल बनाने का एक लघु उद्यम है। नदीमुल हसन ने पंजाब नेशनल बैंक से मुद्रा योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण लिया। ताकि नकद में जूते चप्पल के बनाने के लिए माल खरीदा जा सके। नकद मे कच्चा माल खरीदने पर सस्ता पड़ता है। यदि नदीमुल हसन किसी प्राइवेट बैंक या व्यक्ति से ऋण लेते तो अभी जो वह ब्याज दे रहे हैं उसका तीन गुना अधिक ब्याज देना पड़ता। यह इनके जैसे छोटे उघमी के लिए काफी मंहगा पड़ता। नदीमुल हसन को पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लेने में भी आसानी रही क्योंकि इनकी अपनी फैक्टरी है। इनका बैंक से लेन-देन का पिछला रिकार्ड भी साफ सुथरा रहा है। हसन के इस छोटे से उद्यम में बाजार की मांग के हिसाब से 3-7 लोग काम करते ही हैं।

8.19 करोड़ को मिला रोजगार
आंकड़े बताते हैं कि मुद्रा योजना के तहत 8.19 करोड़ लोगों ने ऋण लिया है। यदि कम से कम एक व्यक्ति के रोजगार मिलने का भी औसत मान लिया जाये तो 8.19 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। रोजगार पाने वालों की संख्या हर एक ईकाई में एक से अधिक ही होता है। लेकिन एक के औसत को ही मान लिया जाये तो 8.19 करोड़ लोगों के रोजगार मिलने की बात को नकारा नहीं जा सकता है।

जसप्रीत कौर और नदीमुल हसन की तरह से छोटे व्यवसाय जैसे बेकरी की दुकान वाले, कागज से बनने वाले उत्पादों के उद्यमी, ढाबा या रेस्त्रां चलाने वाले, नाई की दुकान वाले, कम्प्यूटर और मोबाइल के पार्ट्स बेचने और बनाने वाले, सड़कों के किनारे दुकान लगाने वालों इत्यादि ने इस योजना का भरपूर लाभ उठाया और अपने लिए रोजगार पैदा किया है।

सभी राज्यों में पहुंचा लाभ
पिछड़े और अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों ने लगभग 82,000 करोड़ रुपये का ऋण लेकर अपने रोजगार को बढ़ाया है। मुद्रा योजना का लाभ लेने वालों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। इस योजना का लाभ हर प्रदेश के सभी लोग उठा रहे हैं। राज्यवार निम्न आंकड़े, पूरे देश में इस योजना की सफलता को रेखाकिंत करते हैं-

बिहार 21,651 करोड़ रुपये
आंध्र प्रदेश 13,781 करोड़ रुपये
दिल्ली 7,518 करोड़ रुपये
गुजरात 15,385 करोड़ रुपये
कर्नाटक 39,107 करोड़ रुपये
महाराष्ट्र 34,168 करोड़ रुपये
ओडिशा 15,589 करोड़ रुपये
तमिलनाडु 38,297 करोड़ रुपये
उत्तर प्रदेश 30,783 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश 20,634 करोड़ रुपये
पश्चिम बंगाल 25928 करोड़ रुपये

इस योजना की सफलता छोटे राज्यों में भी कम नहीं है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम राज्यों ने अपने राज्यों में 200 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया है।

देश में सभी को रोजगार मिले और सबका विकास हो, यह सोचना और नीति बनाना आसान है लेकिन सरकारों की अग्नि परीक्षा योजना को लागू करके सभी तक लाभ पहुंचाने में होती है। 125 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में किसी योजना को लागू करने में, छोटी-छोटी अपने किस्म की अनेक समस्याऐं आती हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने मुद्रा योजना को जिस मिशन के उत्साह से लागू किया है, उसकी प्रतिछाया आंकड़ो में साफ नजर आती है।

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