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समस्या नहीं समाधान लाती है मोदी सरकार

समस्याओं को मुद्दा नहीं बनाती मोदी सरकार, सोल्यूशन लाती है...

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लोकतंत्र का मतलब सिर्फ पांच साल के लिए सरकार चुनना और उसे पांच साल का कांट्रेक्ट देना नहीं है बल्कि हर समस्या के समाधान में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है।-नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने जब देश की सत्ता संभाली तो चारों तरफ निराशा का माहौल था। लेकिन पीएम मोदी के सत्ता संभालते ही देशवासियों में नई आशा, नये उमंग का संचार हुआ। पीएम मोदी ने अपने एक वक्तव्य में कहा था, ”देश की सत्ता नहीं बदली… देश का मूड बदला है।” आशा भरे इसी माहौल के बीच पीएम मोदी ने देश की क्षमताओं का आंकलन करते हुए हर एक क्षेत्र में उसे अवसर में तब्दील करने की ठानी। उन्होंने देश की जनता में भरोसा और विश्वास जगाया और हर समस्या का समाधान विकास बताया।

जनभागीदारी की बुनियाद पर प्रधानमंत्री की हर नीति देश को सामर्थ्यवान बनाने की दिशा में है। स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसी तमाम नीति देश के लोगों में विश्वास जगाने की एक पहल है। भ्रष्टाचार, कालाधान, जीएसटी, उच्च शिक्षा, प्रशासनिक सुधार, बिजली सुधार, रेल सुधार… ये सब देश में गहरे तक जड़ जमा चुके निराशावाद को आशावाद की तरफ ले जाने की कवायद है। देश में बन रहे सकारात्मक माहौल के माध्यम से हर समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास है। 

अन्नदाताओं की आकांक्षाओं पर खरे उतरे मोदी

पिछले सात दशकों से देश के किसानों की हालत में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुए हैं। उनकी समस्या के मूल में उनकी खेती से कमाई है, किसान फसल उगाने के लिए बिजली, पानी, बीज, खाद, मजदूरी आदि पर जितना खर्च करता है, उसको उतना भी धन फसल बेचकर वापस नहीं मिलता। कभी मौसम खराब रहा तो लागत भी निकल पाने की उम्मीद नहीं होती थी। 
प्रधानमंत्री इन समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। जब यह कहा जाता है कि प्रधानमंत्री समस्याओं का समाधान कर रहे हैं तो यह समझना भी जरुरी है कि किस तरह के कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
किसानों की फसल को बीमा योजना में महज 33 फीसदी फसल नष्ट होने पर ही फसल का बीमा मिलता है। कम प्रीमियम पर अधिकतम बीमा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खासियत है कि इस योजना में सभी खाद्य फसलें, तिलहन, वार्षिक व्यावसायिक या साग सब्जी का बीमा होता है। पहले की योजनाओं में कुछ फसलें और तिलहन का ही बीमा होता था। खरीफ की सभी फसलों और तिलहन के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत एवं 1.5 प्रतिशत रबि की फसलों और तिलहन के लिए और व्यावसायिक फसलों और फल व सब्जी के लिए 5 प्रतिशत का वार्षिक प्रीमियम देना है। प्रीमियम की शेष राशि में केन्द्र और राज्य सरकार का बराबर- बराबर हिस्सा होता है।

खाद की किल्लत दूर हो गयी
मोदी सरकार ने आते ही खाद की किल्लत दूर करने की रणनीति बनायी। जल्द ही सरकार को पता चल गया कि ये किल्लत कृत्रिम है और इसके पीछे खाद की कालाबाजारी है। इसे रोकने के लिए नीम कोटिंग यूरिया का प्रयोग शुरू किया। उसके बाद से खाद का उपयोग सिर्फ और सिर्फ खेती में होना सुनिश्चित हो गया। ऐसा होते ही खाद की कालाबाजारी रुक गयी। अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलता है। खाद की कमी नहीं रहती। 

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि
मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ी राहत दी। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंंटल कर दिया गया, उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया है। बाकी फसलों का समर्थन मूल्य भी इसी तर्ज पर बढ़ा दिया गया। इससे किसानों की आमदनी में इतनी बढ़ोतरी हुई कि जीना आसान हो गया।

धान की खरीद में लेवी प्रणाली का खात्मा
धान की खरीद में लेवी प्रणाली खत्म कर मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं। कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
हर खेत को पानी कभी बीजेपी का नारा हुआ करता था। मोदी सरकार ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाया गया है। 

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अभी तक 6.5 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

e-Nam से जुड़ीं देशभर की कृषि मंडियां
 e-Nam के रूप में देशव्यापी स्तर पर एक ऐसा ई-प्लैटफॉर्म तैयार किया गया है जिनसे किसानों के साथ देश की कृषि मंडियां आपस में जुड़ी हैं। यहां किसान अपनी उपज को बेच सकता है। ई-नाम पर 250 मंडियां जुडी हुई हैं, जिस पर 36.43 लाख किसानों को सीधा फायदा हो रहा है।

कृषि मौसम विज्ञान सेवा की शुरुआत
मौसम विज्ञान से किसानों को लाभ पहुंचाने की नीति मोदी सरकार ने शुरू की है। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंच रहीं हैं।

किसानों के लिए शुरू हुआ किसान चैनल
26 मई 2015 को शुरू किया गया 24 घंटे का यह किसान चैनल कृषि तकनीक का प्रसार, पानी के संरक्षण और जैविक खेती जैसे विषयों की जानकारी देता है। इसमें किसानों को उत्पादन, वितरण, जोखिम, बचने के तरीके, खाद, बीज, वैज्ञानिक कृषि के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।

जैविक खेती पर जोर
जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए सरकार जैविक खेती के विकास के लिए काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10000 समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया गया है। अब तक राज्य सरकारें 7186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जौविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। 

ब्लू रिवोल्यूशन से बढ़ा मत्स्य उत्पादन
देश में ब्लू रिवोल्यूशन के जरिए किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के संकल्प से सरकार ने मत्स्य प्रबंधन और विकास के लिए अगले पांच साल में 3000 करोड़ रुपये की योजना दी है। 15000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया गया है। 2012-14 में मत्स्य उत्पादन जहां 186.12 लाख टन था वहीं 2014-16 में 209.59 लाख टन हो गया।

किसानों के लिए ऋण सुविधा बढ़ी
खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा बढ़ायी गयी है। अब 10 लाख करोड़ ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन
मिशन मोड में लागू की गयी गोकुल योजना का उद्देश्य देश की पशुधन संपदा को संवर्धित करके किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारना है। इससे देशज पशुधन के जेनेटिक स्टाक संवर्धित होगा और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा। इस योजना में 14 गोगुल गांव स्थापित किये गये हैं। 41 बुल मदर फार्म का आधुनिकीकरण किया गया है। 

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके तहत नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने, फसल चक्र में परिवर्तन करने और कम लागत में खेती की जाए की जानकारी किसानों को दी जा रही है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी की जाए। इस संकल्प के साथ कई आधारभूत योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है जो खेती-किसानी में सहायक सिद्ध हो रहा है।

शीर्ष स्तर का भ्रष्टाचार मिटाया
तीन साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में बड़ा बदलाव यह हुआ है कि केन्द्र की सरकार में ऊंचे स्तरों पर भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो चुका है।

कालाधन,भ्रष्टाचार मिटाने के लिए उठाए कदम
प्रधानमंत्री ने आधुनिक तकनीकों के भरपूर उपयोग के साथ-साथ व्यवस्था में छोटे-छोटे बदलाव लाकर भ्रष्टाचार पर नकेल कस दी। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने कई कदम उठाए हैं—

कालेधन पर SIT: अपने कैबिनेट की पहली ही बैठक में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कालेधन की जांच के लिए SIT गठित की।

जन धन योजना: इसके तहत गरीबों के 30.15 करोड़ खाते खोले गए। सरकारी योजनाओं में सब्सिडी बिचौलियों के हाथों से दिये जाने के बजाय सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचने लगे।

कर बचाने में मददगार देशों के साथ कर संधियों में संशोधन: मॉरीशस के साथ कर संधि में संशोधन कर लिया गया है। दूसरे देशों के साथ बातचीत चल रही है।

कालाधन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) एवं कराधान कानून, 2015: विदेशों और कर बचाने के लिए मददगार देशों में जमा कालेधन को स्वदेश लाने के लिए यह योजना चलाई गई थी। योजना के खत्म होने के बाद पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ जुर्माने और कड़ी सजा का प्रावधान किया गया।

आय घोषणा योजना, 2016: इस योजना के तहत करीब 65,000 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा।

नोटबंदी: कालेधन पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद सबसे बड़ा कदम 08 नवंबर 2016 को उठाया। नोटबंदी के जरिए कालेधन के स्रोतों का पता लगा।

बेनामी लेनदेन रोकथाम (संशोधन) कानून: ताजा रिपोर्ट के अनुसार करीब 600 से अधिक बेनामी मामलों की जांच जारी है।

फर्जी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई: सीबीआई ने छद्म कंपनियों के माध्यम से कालेधन को सफेद करने के कई गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। देश में करीब तीन लाख ऐसी कंपनियां हैं, जिन्होंने अपनी आय-व्यय का कोई ब्योरा नहीं दिया है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां नेताओं और व्यापारियों के कालेधन को सफेद करने का काम करती हैं।

रियल एस्टेट कारोबार में 20,000 रुपये से अधिक कैश में लेनदेन पर जुर्माना: रियल एस्टेट में कालेधन का निवेश सबसे अधिक होता था। पहले की सरकारें इसके बारे में जानती थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करती थी। इस कानून के लागू होते ही में रियल एस्टेट में लगने वाले कालेधन पर रोक लग गई।

राजनीतिक चंदा : राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से ज्यादा कैश में चंदा देने पर पाबंदी। इसके लिए बॉन्ड का प्रावधान।

स्रोत पर कर संग्रह: 2 लाख रुपये से अधिक के कैश लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। इससे ऊपर के लेनदेन चेक,ड्राफ्ट या ऑनलाइन ही हो सकते हैं।

‘आधार’ को पैन से जोड़ा: कालेधन पर लगाम लगाने के लिए ये एक बहुत ही अचूक कदम है। ये निर्णय छोटे स्तर के भ्रष्टाचारों की भी नकेल कसने में काफी कारगर साबित हो रहा है।

सब्सिडी में भ्रष्टाचार पर नकेल: गैस सब्सिडी को सीधे बैंक खाते में देकर, मोदी सरकार ने हजारों करोड़ों रुपये के घोटाले को खत्म कर दिया। इसी तरह राशन कार्ड पर मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को भी 30 जून 2017 के बाद से सीधे खाते में देकर हर साल लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की बचत करने की पहल हो रही है। 

ऑनलाइन सरकारी खरीद: मोदी सरकार ने सरकारी विभागों में सामानों की खरीद के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया लागू कर दी है। इसकी वजह से पारर्दशिता बढ़ेगी और खरीद में होने वाले घोटले रुक जाएंगे।

प्राकृतिक संसाधानों की ऑनलाइन नीलामी: मोदी सरकार ने सभी प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी वजह से पारदर्शिता बढ़ी है और घोटाले रुके हैं। यूपीए सरकार के दौरान हुए कोयला, स्पेक्ट्रम नीलामी जैसे घोटालों में देश का खजाना लुट गया था।

आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की जियोटैगिंग: सड़कों, शौचालयों, भवनों, या ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले सभी निर्माण की जियोटैगिंग कर दी गई है। इसकी वजह से धन के खर्च पर पूरी निगरानी रखी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ झूठ की जो सबसे बड़ी साजिश रची जाती है, वो है पाकिस्तान के खिलाफ उनकी नीति, नजरिया और नीयत को लेकर। अक्सर पाकिस्तान के मामले में उनके 56 इंच के बयान को जोड़कर हमला करने की कोशिश की जाती है। ये दर्शाने की साजिश रची जाती है कि पाकिस्तान के मामले में नरेंद्र मोदी का रवैया बेहद लचीला है। लेकिन सच तो ये है जो आप पढ़ने जा रहे हैं। 

सर्जिकल स्ट्राइक
उरी हमले के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान को ऐसा करारा जवाब दिया कि पाकिस्तान को उफ्फ करने तक का मौका नहीं मिला। भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। 38 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया और घुसपैठ कराने वाली चौकियों को तबाह कर दिया।

घुसपैठ के ठिकानों को ध्वस्त किया
भारत ने 2017 में एक और सर्जिकल स्ट्राइक की और पाकिस्तान की चौकियों को तबाह कर दिखाया। इसका वीडियो भी भारतीय सेना ने जारी किया। ये चौकियां घुसपैठ करानेे के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं।

अंतरराष्ट्रीय अदालत में सर्जिकल स्ट्राइक
कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा सुनाने के मामले में भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय अदालत में पटखनी दी। वहां से फांसी की सजा पर रोक हासिल कर लिया। यह एक ऐसा मामला था जिस पर पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की दुनिया भर में पोल खुल गयी।

सार्क सैटेलाइट छोड़कर पाकिस्तान को अलग-थलग किया

सैटेलाइट छोड़कर भारत ने जहां पड़ोसियों के प्रति सबका साथ, सबका विकास की नीति को अपनाया। वहीं, पाकिस्तान ने भारत की पहल से अलग रहते हुए खुद बाकी देशों से अलग-थलग पड़ गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का पर्दाफाश
भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में बेनकाब कर दिया। आतंकवाद फैलाने वाले देश के तौर पर उसे साबित कर दिखाया। अमेरिका ने अब ये मान लिया है कि पाकिस्तान साथी से ज्यादा अमेरिका के लिए खतरा है। इससे पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब में नवाज शरीफ की मौजूदगी में भारत को आतंकवाद से पीड़ित देश बताया था। वहीं, पाकिस्तान जैसे आतंकवाद के मददगार देशों को सख्त चेतावनी दी थी। अमेरिकी सीनेट ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बार माना है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी तत्वों को मिल रहे मदद के कारण भारत अब सबक सिखाने की कार्रवाई करने की तैयारी में है।

सार्क सम्मेलन का किया बहिष्कार

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर 2016 में खुला हमला बोला। इतना ही नहीं जब भारत ने इस्लामाबाद में होने वाली सार्क बैठक का बहिष्कार किया था, तब बाकी देशों ने भी भारत की तर्ज पर इस्लामाबाद जाने से मना कर दिया था। पाकिस्तान के खिलाफ भारत की यह बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी गयी।

कश्मीर में आतंकी तत्वों के खिलाफ मोर्चाबंदी

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कई बार कह चुकी हैं कि कश्मीर समस्या का समधान अगर मोदी सरकार ही कर सकती है। जाहिर है वो बेवजह तो ऐसा नहीं कह रही हैं। जम्मू कश्मीर में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रही महबूबा के इस बयान के मायने हैं। मोदी सरकार की सख्ती और जनता से जुड़े रहने की नीति से अब अलगावादियों और आतंकियों के हौसले पस्त हैं।

‘मानव ढाल’ बनाने वाले मेजर को इनाम

बीते दिनों कश्मीर में एक पत्थरबाज को मानव ढाल बनाकर कर 12 जवानों का जान बचाने वाले मेजर गोगोई को सम्मानित कर सेना ने ये साफ कर दिया कि उनका एक्शन जारी रहेगा।

नोटबंदी से पाक में आतंकी सरगनाओं  पर चोट
नोटबंदी के फैसला भारत में लिया गया और हवाला कारोबारी पाकिस्तान में छत से कूद कर आत्महत्या कर रहे थे। जाली नोटों का कारोबार करने वालों की भी हवा निकल गयी। कश्मीर में अलगाववादियों को मदद कमजोर पड़ गयी।

ISIS को नहीं मिला पैर जमाने का मौका
लाख कोशिशों के बावजूद आतंकी संगठन आईएस को भारत में पैर पसारने नहीं दिया गया है। देशभर से आईएस से जुड़े 90 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह तथ्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ISIS ने इंग्लैंड समेत यूरोपीयन देशों में भी आतंकी वारदातों को अंजाम देने में सफलता पायी है।

घाटी में फिर से तलाशी अभियान
घाटी में 15 साल बाद फिर से ‘कासो’ अभियान शुरू किया। शोपियां, त्राल जैसे इलाकों में जहां आतंकवादी सबसे ज्यादा सक्रिय हैं तलाशी ली। कुलगाम के जंगलों में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है। अब कहीं भी तलाशी से पहले सेना को किसी से इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ती।

शिकंजे में अलगाववादी नेता
अलगवावादी नेताओं को विदेश से फंडिंग मामले में शिकंजा कस दिया गया। एनआईए इसकी जांच में जुटी है। अलगाववादी नेताओं से पूछताछ की जा रही है, उन्हें हिरासत में लिया गया है। जांच के बाद बड़े और कड़े कदम उठाने की पूरी तैयारी है।

‘हीरा’ युग भारत

किसी भी समस्या के सटीक समाधानों को लागू करने की क्षमता, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में कमाल की है। शिक्षा के क्षेत्र में जिस निर्णय को दशकों से कोई सरकार लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही था, आखिरकार उसे लागू करने का निर्णय, प्रधानमंत्री ने ले ही लिया। अब देश में यूजीसी और एआईसीटीई को मिलाकर एक नई एकल संस्था HEERA ( Higher Education Empowerment Regulatory Authority) बनायी जाएगी। इस तरह की एकल संस्था का विचार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय में गठित की गयी यशपाल समिति की मुख्य सिफारिश थी, लेकिन इसे मनमोहन व सोनिया की सरकार लागू करने में नाकाम रही थी।

HEERA से बदलेगी तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार बनते ही, 3 अगस्त 2014 को यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष हरिगौतम के नेतृत्व में, उच्च शिक्षा में सुधार के लिए कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी की भी यही सिफारिश थी कि दो संस्थाओं के स्थान पर एकल संस्था होनी चाहिए। कमेटी की सिफारिशें आते ही, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लागू करने का निर्णय ले लिया। यही मोदी सरकार औऱ पूर्ववर्ती सरकारों में अंतर है।

समाधान लाते हैं मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले तीन सालों में देश की समस्याओं के समाधान के लिए कठिन से कठिन निर्णयों को, राजनीतिक नफे नुकसान से ऊपर उठकर, लागू करने की क्षमता दिखाई है। ऐसे निर्णयों की एक पूरी श्रृखंला है

  • देश में हर स्थान पर फैली गंदगी की समस्या के समाधान के लिए स्वच्छता अभियान।
  • देश के बच्चों में लिंगानुपात के संतुलन की समस्या के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।
  • शहर और गांव के गरीब परिवारों को चूल्हे की समस्या से मुक्त कराने के लिए उज्जवला योजना।
  • देश में परिवारों में बिजली के बढ़ते खर्च की समस्या को कम करने के लिए उजाला योजना।
  • देश में बेरोजगार युवकों के हाथ में कोई हुनर न होने की समस्या के लिए कौशल विकास योजना।
  • देश में उद्यम लगाने के लिए युवाओं के आगे न आने की समस्या के समाधान के लिए मुद्रा योजना और स्टार्टअप योजना।
  • देश के सभी के पास बैंक खाता न होने की समस्या के समाधान के लिए जन धन योजना।
  • शहरी और ग्रामीण गरीब परिवारों को छत न मिलने की समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना।
  • देश के कर ढांचे की समस्या के समाधान के लिए जीएसटी।
  • काले धन और भ्रष्टाचार की समस्या के समाधान के लिए नोटबंदी और बेनामी संपत्ति कानून।
    इन निर्णयों को लागू करने की प्रधानमंत्री मोदी की क्षमता ने देश की जनता का विश्वास जीता है, तभी तो हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में जनता ने प्रधानमंत्री के विकास के विजन के लिए पूरा साथ दिया।

उच्च नौकरशाही में भी आ रहा है बदलाव

देश की नौकरशाही बदल रही है। ये सब इसलिए हो पाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बड़े अफसरों की नियुक्तियों के तरीके को ही बदलना शुरू कर दिया है। ये एक ऐसा क्षेत्र था, जिसके क्रिया-कलाप को कोई भी सरकार अबतक परिवर्तित नहीं कर सकी। लेकिन तीन साल के कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धीरे-धीरे इसमें भी सुधार लाकर दिखा दिया है। 

360 डिग्री रिव्यू पर आधारित मूल्यांकन
ये परिवर्तन अफसरों के मूल्यांकन प्रक्रिया में किए जा रहे बदलाव के कारण आ रहा है, जो 360 डिग्री रिव्यू सिस्टम पर आधारित है। नियुक्ति, पदोन्नति और और परोक्ष रूप से चेतावनी देने के लिए भी यही सिस्टम काम कर रहा है। इसके चलते वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट पर निर्भरता कम हो रही है और बड़ी से बड़ी पोस्टिंग के तरीके में भी बदलाव आ रहा है। इसका परिणाम ये हुआ है कि तीन साल में नौकरशाही में गतिशीलता आ गई है। जैसे ऊंचे पदों पर नियुक्ति के लिए मंत्रियों या वरिष्ठ अफसरों के सामने लॉबिंग की आदतें अब समाप्त होने लगी हैं।

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