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प्रधानमंत्री मोदी का रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर, ट्रेनों की रफ्तार करेगी पिछड़े इलाकों का विकास

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार देश में रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। मोदी सरकार रेलवे को सक्षम और सुविधाओं से लैस करने के लिए लगातार काम कर रही है। मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के उन इलाकों में रेलवे के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है जो पिछड़े माने जाते हैं। पीएम मोदी का एक ही मंत्र है सबका साथ-सबका विकास, और केंद्रीय कैबिनेट के इन फैसलों में देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के इसी मंत्र की झलक दिखाई दे रही है।

11,661 करोड़ की 6 परियोजनाओं को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने देश के पिछड़े और विकास से अछूते इलाकों में विकास की रफ्तार पहुंचाने के उद्देशय से कई अहम फैसले लिए हैं। केद्र सरकार ने 11,661 करोड़ लागत वाली रेलवे की 6 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं में यूपी, बिहार, एमपी और ओडिशा के दूर-दराज के इलाकों में रेल नेटवर्क का विस्तार, 881 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण और दोहरीकरण शामिल हैं। इन परिजोनाओं के पूरा होने में 211 लाख मानव दिवस के बराबर रोजगार का सृजन होगा।

बिहार में 2,729 करोड़ के दो प्रोजेक्ट
रेल नेटवर्क के विस्तार की इन परियोजना के तहत बिहार के मुजफ्फरपुर-सगौली व सगौली-वाल्मिकी नगर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण व दोहरीकरण होगा। 100.6 किलोमीटर और 109.7 किलोमीटर की इन दोनों परियोजनाओं पर 2,729.1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 116.95 किलोमीटर लम्बे भटनी-औंड़िहार रेलवे लाइन का दोहरीकरण और विद्युतीकरण होगा भी होगा। 1,300.9 करोड़ रुपये की लागत से यह काम 2021-22 तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे मुगलसराय व इलाहाबाद के बीच रूट के कंजेशन को कम करने के साथ ही वाराणसी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने से बिहार, पश्चिम बंगाल व उत्तर-पूर्व जाने वाले यात्रियों को लाभ पहुंचेगा।

बुंदेलखंड में 5 हजार करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट मंजूर
उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाके बुंदेलखंड में 425 किलोमीटर लंबी झांसी-मानिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण को भी मंजूरी दी गई है। 4,955.72 करोड़ से ये काम 2022-23 तक पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश के झांसी, महोबा, बादा, चित्रकूट और मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में विकास को गति मिलेगी। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से कनेक्टिविटी देने के साथ ही, खजुराहो के पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा ओडिशा में 130 किलोमीटर लंबी जैपोर-मलकानगिरी नई लाइन परियोजना के 2,676.11 करोड़ की लागत से 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है। यह परियोजना ओडिशा के कोरापुट और मलकानगिरि के जिलों को कवर करेगी। इस परियोजना से नक्सलवाद प्रभावित मलकानगिरि और कोरापुट जिलों में न सिर्फ बुनियादी ढांचे का विकास होगा, बल्कि नक्सलवाद पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी।

इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार रेलवे के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले ले चुकी है, एक नजर डालते हैं उन फैसलों और योजानाओं पर

देश में 600 रेलवे स्टेशन बनेंगे हाईटेक
रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को बढ़ाने और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए रेलवे मंत्रालय ने निजी कंपनियों को शामिल करने की योजना बनाई है। आम बजट 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के 600 स्टेशनों के पुनर्विकास करने का ऐलान किया था। इन स्टेशनों को दोबारा बनाने में एक लाख रुपये की लागत आएगी। रेलवे ने अपनी इस महात्वाकांक्षी योजना में निजी कंपनियों को शामिल करने का फैसला किया है। इसके तहत रेलवे इन स्टेशनों का 25 से 50 प्रतिशत काम करने के बाद निजी कंपनियों को 99 साल की लीज पर सौंप देगी। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। पहले फेज में इंडियन रेलवे स्‍टेशन डेवेलपमेंट कॉरपोरेशन (IRSDC) 130 स्‍टेशनों पर काम शुरू करेगा। 1 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ करने के लिए केंद्र सरकार ने बजट में 3300 करोड़ की रकम दी है।

रेल बजट में भी दिखा था इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का मंत्र
आम बजट 2018 में भी रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खासा जोर दिखा था। दूसरी बार आम बजट के साथ पेश किए गए रेल बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसी भी नई ट्रेन का ऐलान नहीं किया। 1 लाख 48 करोड़ के रेल बजट में रेलवे के ढांचे मजबूत करने के लिए कई घोषणाएं की गईं। इसमें पूरे देश में रेलवे को ब्रॉड गेज करना और 18 हजार किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण जैसी अहम घोषणाएं शामिल थीं। रेल बजट में मोदी सरकार ने माल ढुलाई के लिए 12 वेगन बनाए जाने, मुंबई में 90 किलोमीटर तक पटरी का विस्तार करने, मुंबई में लोकल नेटवर्क का दायरा बढ़ाने, दो साल में 4,267 मानवरहित रेलवे क्रासिंग को खत्म करने, 700 नए रेल इंजन तैयार करने समेत कई दूसरी महत्वपूर्ण घोषणाएं शामिल थीं। इन घोषणाओं और ताजा फैसले से साफ है कि मोदी सरकार का पूरा ध्यान रेलवे में ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने पर है, ताकि कई परेशानियों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाए और सही मायने में रेलवे के माध्यम से देश का विकास हो सके।

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