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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से हुआ ऊर्जा क्षेत्र में काम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य देशभर में निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति करने का है। इसके लिए केंद्र सरकार निरंतर काम कर रही है और बड़े पैमाने पर कार्यक्रम संचालित कर रही है। सरकार दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई), शहरी विद्युतीकरण पर एकीकृत ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस) और अब सौभाग्य योजना के तहत बिजली आपूर्ति और विद्युतिकरण पर काम हो रहा है। बिजली उत्पादन से लेकर आपूर्ति करने में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई मोबाइल एप्लिकेशन तथा वेबसाइट जैसे ऊर्जा एप, सौभाग्य पोर्टल, केन्द्रीय विद्युत पोर्टल, मेरिट पोर्टल की शुरुआत की गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 2017 में ऊर्जा मंत्रालय के कार्यों का लेखा जोखा

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई)
पूरे देशभर में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई) लागू किया गया। इसके लिए 42,565 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई थी। इसके तहत 30 नवंबर, 2017 तक 1,24,219 गांवों का विद्युतीकरण और 4,68,827 गांवों में गहन विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है। इतना ही नहीं 277.20 लाख बीपीएल परिवारों को मुफ्त में बिजली कनेक्शन भी दिए जा चुके हैं।

सौभाग्य: प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर 2017 में देश में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण हासिल करने के लिए “प्रधानमंत्री सहज बिजल हर घर योजना (सौभाग्य)” योजना लॉन्च किया। इस योजना के लिए 16,320 करोड़ रुपये मंजूर हुए, जिसमें 12,320 करोड़ रुपये का सकल बजटीय समर्थन भी मिला। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सभी परिवारों को जोड़ना एवं बिजली कनेक्शन प्रदान करना है। आर्थिक रूप से गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन मुफ्त में दिया जा रहा है, जबकि दूसरे परिवारों से बिल के साथ 10 समान किश्तों में प्रति परिवार 500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित घरों को सौर फोटोवोल्टाइक (एसपीवी) आधारित स्टैंड अलोन पद्दति के साथ एलईडी लाइट, पंखे, पावर प्लग इत्यादि लगाए जाएंगे। मणिपुर में इस योजना की शुरुआत 28 नवंबर, 2017 को हुआ। मणिपुर के 1.75 लाख परिवारों (1.62 लाख ग्रामीण परिवारों और 0.13 लाख शहरी परिवारों) को इस योजना के तहत शामिल करने का प्रस्ताव है।

एकीकृत ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस)
आईपीडीएस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में गुणवत्ता और विश्वसनीय 24X7 निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करना है। अब तक, निगरानी समिति ने 3,616 शहरों के लिए कुल 26,910 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। राज्यों से संबंधित संस्थाओं को 23,448 करोड़ रुपये मूल्य का कार्य दिया गया है। इस योजना में आईटी और तकनीकी सहायता के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में 24X7 बिजली की आपूर्ति को सुनिश्चित करेगा, लेकिन बिलिंग और संग्रहण दक्षता में भी सुधार करने में मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप तकनीकी और वाणिज्यिक (ए टी एंड सी) नुकसान में भी कमी आएगी। अब तक आर-एपीडीआरपी के तहत 1,363 शहरों को “गो-लाइव” घोषित किया गया है। 52 शहरों में स्काडा नियंत्रण प्रणाली की स्थापना की गई है। 20 स्काडा शहरों में कार्य पूरा कर लिया गया है और इस योजना के भाग-1 के तहत 21 डेटा केंद्रों में से 20 अधिकृत हो चुके हैं। 970 शहरों में भाग-बी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। भारत में 45/57 डिस्कॉम (निजी सहित) में उपभोक्ताओं के लिए ऑल इंडिया शॉर्ट कोड ‘1912’ की शुरूआत हो चुकी है।

उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्योरेंस योजना (यूडीएवाई)
उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्योरेंस योजना (यूडीएवाई) बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय और परिचालन को घाटे से उबार कर लाभ में लाने के लिए है, जो सरकार द्वारा विभिन्न हितधारकों के परामर्श से रूप-रेखा देकर दिनांक 20.11.2015 को शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपयों के लंबे समय से कर्ज और भविष्य में संभावित नुकसान का स्थायी समाधान करना है। इस योजना में सभी क्षेत्रों – उत्पादन, प्रेषण, वितरण, कोयला और ऊर्जा दक्षता में सुधार लाने हेतु उपायों की परिकल्‍पना भी की गई। इसकी निगरानी के लिए एक वेब पोर्टल (www.uday.gov.in) बनाया गया। नगालैंड, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव ने 20 नवंबर, 2017 को यूडीएवाई योजना के तहत भारत सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही, अब तक यूडीएवाई में 27 राज्य और 4 संघ राज्‍य क्षेत्र शामिल हो चुके हैं।

प्रेषण
“राष्ट्रीय विद्युत योजना (प्रेषण)” के अनुसार 2021-22 की समय-सीमा में 226 गीगावॉट परियोजना की अधिकतम मांग को पूरा करने हेतु 2017-22 की योजनागत अवधि के लिए अंतर-क्षेत्रीय पारेषण लिंक सहित पारेषण प्रणाली (पारेषण लाइनों और संबद्ध सबस्टेशनों) को कवर करना है। इसके लिए पड़ोसी देशों को विशेष रूप से बिजली आपूर्ति के लिए भारतीय उत्पादक केंद्रों को पड़ोसी देशों के पारेषण प्रणाली से जोड़ने हेतु स्वतंत्र पारेषण प्रणाली बनाने के अनुमोदन के लिए सक्षम प्राधिकरण (सीए) के लिए आचरण व्यापार नियम (सीबीआर) जारी किए गए हैं।

थर्मल
पराली जलाने के कारण उत्‍पन्‍न प्रदूषण को कम करने के लिए, ऊर्जा मंत्रालय ने चूर्णित कोयले की आग से चालित बॉयलरों में को-फायरिंग के माध्यम से बिजली उत्पादन के लिए बायोमास उपयोग हेतु एक नीति जारी की है।

हाइड्रो पावर परियोजनाएं
हाइड्रो पावर सेक्टर में, 1305 मेगावॉट की कुल स्थापित क्षमता वाली 11 हाइड्रो पावर परियोजनाएं वर्ष 2017-18 में चालू होने की संभावना है। इन परियोजनाओं में से, 465 मेगावॉट की स्थापित क्षमता वाली 7 परियोजनाओं को 30.11.2017 तक पहले ही चालू कर दिया गया है और शेष क्षमता मार्च, 18 तक चालू होने की संभावना है। वित्त वर्ष 2017-18 (जनवरी 2017 से नवंबर ‘2017) के लिए हाइड्रो पावर उत्पादन 120.87 बीयू है। 2,880 मेगावॉट की दिबांग बहुउद्देशीय परियोजना की डीपीआर को सीईए द्वारा वर्ष 2017 में मंजूरी प्रदान की गई है।

बिजली उत्पादन से लेकर आपूर्ति तक पारदर्शिता लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने मोबाइल एप से लेकर वेबसाइट लॉन्च किया।

ऊर्जा (शहरी ज्योति अभियान) मोबाइल ऐप-
ऊर्जा ऐप उपभोक्ता शिकायत निवारण, नए सेवा कनेक्शन जारी करने, उपभोक्ता द्वारा महसूस की गई बाधाओं की औसत संख्‍या, उपभोक्ता द्वारा महसूस की गई बाधाओं की औसत अवधि, ई-भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या, ऊर्जा हानि / बिजली की चोरी, यानी एटी एंड सी हानि, आईटी सक्षमता (गो-लाइव ऑफ टाउन्‍स), स्काडा का कार्यान्वयन, शहरी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय पावर पोर्टल पर फीडर डेटा, आईपीडीएस एनआईटी की प्रगति, आईपीडीएस पुरस्कार की प्रगति के बारे में जानकारी उपलब्‍ध कराता है।

सौभाग्य (SAUBHAGYA) वेबपोर्टल
‘सौभाग्य’ वेब पोर्टल – पारदर्शी सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण की निगरानी के लिए एक प्‍लेटफॉर्म – को दिनांक 16 नवंबर, 2017 को शुरू किया गया।

राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल
राष्ट्रीय पावर पोर्टल (एनपीपी) – भारतीय पावर सेक्टर सूचना के समेकन और प्रसार के लिए एक केंद्रीकृत प्‍लेटफॉर्म को दिनांक 14 नवंबर, 2017 को शुरू किया गया, जो मंत्रालय द्वारा पूर्व में आरंभ किए गए सभी पावर सेक्टर ऐप्स के लिए एक सिंगल प्‍वाइंट इंटरफेस होगा। 

घरेलू कोयले के उपयोग के लिए ई-बिडिंग पोर्टल की शुरुआत
घरेलू कोयले के उपयोग के लिए उदारवादी योजना के तहत राज्‍यों को अपने घरेलू कोयले को अंतरित कर विद्युत के क्रय के लिए स्‍वतंत्र विद्युत उत्‍पादकों (आईपीपी) का चयन करने हेतु ई-बिडिंग समाधान उपलब्‍ध कराने के लिए दिनांक 5 जुलाई, 2017 को एक ई-बिडिंग पोर्टल की शुरुआत की गई। ई-बिडिंग पोर्टल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है जिससे राज्‍यों को संभावित आईपीपी से पारदर्शी एवं उचित प्रक्रिया में बिजली खरीदने हेतु बोलियां आमंत्रित करने में सुविधा हो। सफलतम बोलीदाता का चयन ई-रिवर्स बिडिंग प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। पोर्टल के लिए लिंक विद्युत मंत्रालय और पीएफसी कन्‍सल्टिंग लिमिटेड की वेबसाइट पर उपलब्‍ध कराया गया है।

मेरिट (मेरिट ऑर्डर डिस्पैच ऑफ इलेक्ट्रसिटी फॉर रिजुनवेशन ऑफ इनकम एंड ट्रांसपरेंसी) वेब पोर्टल
वेब पोर्टल ‘मेरिट’ को 23 जून, 2017 को शुरू किया गया। यह मोबाइल एप और वेब पोर्टल राज्यों द्वारा प्रेषित वास्तविक आंकड़ों को पारदर्शी रूप से प्रदर्शित करता है और राज्यों को उनकी बिजली खरीद पोर्टफोलियो में सुधार के लिए अवसर मुहैया करता है।( http://www.meritindia.in)

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