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मोदी राज में अच्छे दिन, पिछले 7 साल के मुकाबले सबसे ज्यादा हुआ रोजगार सृजन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रोजगार के क्षेत्र में रोज नए अवसर खुले हैं और आने वाले दिनों में ये मौके और बढ़ेंगे। मोदी राज में देश के सेवा क्षेत्र में मार्च माह में गतिविधियां काफी तेज हुई हैं। कंपनियों में रोजगार सृजन तेजी से बढ़ा है और यह पिछले सात वर्ष के उच्चस्तर पर पहुंच गया है। निक्केई इंडिया सविर्सिज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स मार्च माह में 50.3 अंक पर पहुंच गया जो कि एक माह पहले फरवरी में 47.8 पर था। सूचकांक 50 से ऊपर वृद्धि का संकेत देता है इससे मांग स्थिति में सुधार का पता चलता है। इस बीच निक्कई इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स भी फरवरी के 49.7 से बढ़कर मार्च में 50.8 अंक पर पहुंच गया है। विनिर्माण अ‍ैर सेवा दोनों क्षेत्र में वृद्धि से कंपोजिट पीएमआई में सुधार आया है। मांग बढ़ने और मौजूदा संसाधनों पर दबाव बढ़ने से सेवा प्रदाताओं ने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना शुरू किया और जून 2011 के बाद इसमें सबसे ज्यादा तेजी आई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जारी मुद्रा योजना, कौशल विकास योजना, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप जैसी योजनाओं से युवाओं को रोजगार के हजारों उपलब्ध हो रहे हैं।

इस साल उपलब्ध होंगे रोजगार के लाखों नए अवसर
रोजगार के हिसाब से नया वित्त वर्ष खुशखबरी लेकर आने वाला है। अगले वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान देश में नौकरियों की बहार होगी। रिक्रूटमेंट कंपनी माइकल पेज ने इंडिया सैलरी बेंचमार्क 2018 रिपोर्ट में यह दावा किया है कि इकनॉमिक ग्रोथ तेज होने के कारण भारत में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के मेक इन इंडिया, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की ग्रोथ तेज होने और टेक्नॉलजी का रोल बढ़ने से हायरिंग में बढ़ोतरी होगी। नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, हर क्षेत्र में अच्छी लीडरशिप स्किल वाले प्रोफेशनल की मांग रहेगी। ई-कॉमर्स और इंटरनेट, एनर्जी, प्रोफेशनल सर्विसेज और केमिकल्स कंपनियां अधिक हायरिंग कर सकती हैं। 2018 में इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और ई-कॉमर्स सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी कंपनियां निवेश बढ़ा रही हैं। इसमें लोगों को आसानी से नौकरी मिलेगी। हेल्थकेयर, एफएमसीजी मैन्युफैक्चरिंग या इंडस्ट्रियल, ई-कॉमर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी रोजगार के लिहाज से टॉप इंडस्ट्रीज होंगी। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट कंपनियों, एग्रीगेटर्स, फिनटेक और ई-कॉमर्स कंपनियों में ऐसी स्किल रखने वालों लोगों की अच्छी मांग रहेगी।

रेलवे में नौकरियों की बहार
रेलवे में भी इन दिनों नौकरियों की बहार आई हुई है। रेलवे जल्द ही 20 हजार और पदों पर भर्तियां करेगा। रेलवे ने 90 हजार रिक्तियों के लिए आवेदन पहले ही आमंत्रित किए थे। इस तरह कुल रिक्तियों की संख्या बढ़कर 1 लाख 10 हजार हो गई है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार रेलवे में विभिन्न पदों के लिए दो करोड़ से अधिक उम्मीदवार आवेदन कर चुके हैं। रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) और रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) में 9000 रिक्तियां हैं, इसके साथ ही एल 1 और एल 2 पदों के लिए भी 10 हजार अतिरिक्त रिक्तियां हैं। इन अतिरिक्त पदों के लिए जल्द आवेदन मांगे जाएंगे। रेलवे पहले ही ग्रुप सी (सहायक लोको पायलट और तकनीकी पदों 26,502 पद) और ग्रुप डी (62907 पद) के लिए अधिसूचना जारी और आवेदन आमंत्रित कर चुका है। इन पदों के लिए 31 मार्च 2018 की रात तक आवेदन किया जा सकता है। 20 हजार अतिरिक्त पदों के लिए अधिसूचना मई 2018 में जारी की जाएगी। आपको बता दें, आने वाले दिनों में रेलवे में और वैकेंसी आने की उम्मीद है।रेलवे में 2 लाख 40 हजार नॉन गेजटेड पद खाली पड़े हैं और रेलवे जल्द ही इन पदों पर भर्ती की योजना बनाने जा रहा है। इनमें से 90 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है और 20 हजार अतिरिक्त भर्तियों की घोषणा की जा चुकी है।

2018 में युवाओं को मिलेंगे नौकरियों के बंपर मौके
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की नीतियों के चलते इस साल युवाओं को नौकरियों के बंपर मौके मिलने का सिलसिला जारी रहेगा। वर्ष 2018 के दौरान देश में नई भर्तियों में वृद्धि की संभावना है। हाल ही में विभिन्न क्षेत्रों की 791 कंपनियों के बीच किए गए मर्कर के इंडिया टोटल रिम्युनरेशन सर्वे के अनुसार 55 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि वह अगले 12 महीनों में और नियुक्तियां करने जा रहे हैं। मर्कर के भारतीय कारोबार में प्रतिभा कंसल्टिंग और सूचना समाधान की प्रमुख शांति नरेश ने कहा कि भारतीय उद्योग में दोहरे अंक की वृद्धि जारी रहने की संभावना है। इस कारण देश में सकारात्मक आर्थिक माहौल है जिससे कंपनियों की नियुक्तियों में भी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।

मजबूत अर्थव्यवस्था से बढ़ रहे हैं रोजगार 
हाल ही में आए एक सर्वे के मुताबिक भी नए साल में युवाओं को नौकरियों के बंपर मौके मिलने का सिलसिला जारी रहेगा। मैनपॉवर ग्रुप के रोजगार आउटलुक सर्वे के मुताबिक नए वर्ष की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च 2018) में कर्मचारी भर्तियों में तेजी बने रहने की उम्मीद है। यह सर्वे पूरे देश में 4,500 से अधिक नियोक्ताओं के बीच आयोजित किया गया था। इस सर्वें में तमाम सेक्टरों में काम कर रही शीर्ष कंपनियों को शामिल किया गया था। इस सर्वे में कहा गया है कि पिछली तिमाही की तुलना में मौजूदा तिमाही में नौकरी चाहने वालो के लिए ज्यादा मौके सृजित होंगे।

जॉब मार्केट के अच्छे दिन
सर्वे के अनुसार केंद्र सरकार की तरफ से लगातार उद्योग जगत को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, इसी के चलते जॉब मार्केट के अच्छे दिन आ रहे हैं। सर्वे के मुताबिक जनवरी-मार्च की अवधि के दौरान सर्विस, माइनिंग, कंस्ट्रक्शन, मैन्युफेक्चरिंग, ट्रांस्पोर्टेशन और यूटिलिटी जैसे सभी क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि की संभावना है। सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा 27 फीसदी से ज्यादा रोजगार के मौके सृजित होने की उम्मीद है। वहीं फायनेंस सेक्टर में 15 फीसदी, बीमा क्षेत्र में 19 फीसदी और रियल इस्टेट सेक्टर में 20 फीसदी नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इसी प्रकार शिक्षा, रिटेल, ट्रांसपोर्टेशन और यूटिलिटी सेक्टर में भी बड़ी संख्या में नौकरी के मौके मिलने की संभावना है। 2017 की आखिरी तिमाही की तुलना में हर क्षेत्र में इस तिमाही में 5 फीसदी तक ज्यादा रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है।

दिख रहा है पीएम मोदी की योजनाओं का असर
जब भी नौकरियों की बात होती है तो सामने आता है कि युवाओं को सबसे ज्यादा नौकरियां आईटी सेक्टर में मिल रही हैं, लेकिन इस बार यह ट्रेंड बदला हुआ है। इस बार आईटी सेक्टर के अलावा दूसरे क्षेत्रों में नौकरियों के अवसर ज्यादा सृजित हुए हैं। यह इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो योजनाएं चलाई गई हैं, जमीनी स्तर पर उनका असर दिखने लगा है। अब देशभर में ज्यादातर सेक्टरों में एक समान तरीके से विकास हो रहा है, और युवाओं को नौकरियां भी मिल रही है। आने वाले महीनों में इसी तरह रोजगार और नौकरी के मौके बढ़ेंगे।

मेट्रो ही नहीं छोटे शहरों में भी बढ़े नौकरी के अवसर
यह पीएम मोदी और उनकी सरकार की नीतियों का ही असर है कि रोजगार के अवसर सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि छोटे शहरों में नौकरी के समान अवसर पैदा हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आठ मेट्रो शहरों में से सात में नौकरी के अवसर बढ़े हैं, इसके अलावा छोटे शहरों में नौकरियां बढ़ रही है। अगर अनुभव के आधार पर देखें तो फ्रैशर से लेकर तीन साल के एक्सपीरियेंस वाले युवाओं को 21 फीसदी ज्यादा नौकरी मिली है। वहीं 16 साल से ज्यादा तजुर्बे वाले पेशेवरों को भी 21 फीसदी ज्यादा नौकरी के मौके मिले हैं।

‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ रोजगार पैदा होंगे
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ योजना की शुरुआत की थी। यही वह योजना है जो रोजगार के क्षेत्र में क्रांति लाने की ताकत रखती है। हाल ही में नीति आयोग के महानिदेशक (डीएमईओ) और सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने कहा था कि ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि हम चौथे तकनीकी रेवॉल्यूशन के दौर से गुजर रहे हैं। सरकार मेक इन इंडिया के जरिए 2020 तक 10 करोड़ युवाओं को रोजगार देने के मिशन के साथ काम कर रही है।  

मेक इन इंडिया का उद्देश्य बेरोजगारी दूर करना 
मेक इन इंडिया के तहत भारत में शुरू होने वाले उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए कौशल विकास मंत्रालय द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिसके तहत युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

देश में पहली बार बन रही है रोजगार नीति
मोदी सरकार देश में पहली बार एक राष्ट्रीय रोजगार नीति बना रही है। आगामी केंद्रीय बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। रोजगार नीति आने से देश में प्रत्येक साल एक करोड़ रोजगार सृजन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस नीति में सभी सेक्टरों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। नौकरी के सृजन के लिए समग्रता के साथ सरकार एक रोडमैप भी बना रही है। केंद्र की इस राष्ट्रीय रोजगार नीति के माध्यम से नियोक्ताओं को और अधिक रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तो नौकरियों को आकर्षक बनाने के लिए सेक्टरों के अनुसार उद्यम से जुड़े नियमों और नीतियों में सुधार किया जाएगा। 

रोजगार नीति में प्रत्येक सेक्टर के लिए अलग-अलग लक्ष्य रोजगार नीति के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को संगठित क्षेत्र से जोड़ना है ताकि उन्हें न्यूनतम मजदूरी और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा मिल सके। इसके लिए सरकार आर्थिक, सामाजिक और श्रमिक नीतियों में संशोधन भी करेगी। राष्ट्रीय रोजगार नीति के तहत सभी सेक्टरों में रोजगार की संभावना तलाशी जाएगी। सेक्टर वाइज रोजगार के लिए एक टारगेट तय किया जाएगा। टारगेट पांच साल के लिए तय किया जाएगा, जिसे एक समय अंतराल पर मॉनीटर किया जाएगा।   

स्टार्टअप इंडिया
यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लोग अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं। इसके तहत कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों को आर्थिक मदद दी जाती है और साथ ही उन्हें टैक्स में छूट भी मिलती है। इस योजना के तहत अब तक 1,81,119 मोड्यूल का पंजीकरण हो चुका है। इसकी शर्तों में ये भी शामिल किया जा रहा है कि कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। 

डिजिटल इंडिया
डिजिटल इंडिया की योजना से युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा हुए। सरकार के हर क्षेत्र में ई- क्रांति के कदम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में गांवों और गैर महानगरीय शहरों को नये उत्पाद और सेवा देने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे है। इसी तरह पर्यटन के क्षेत्र में भी डिजिटल क्रांति ने नये बाजार खोलकर युवाओं को रोजगार के काफी अवसर दिये हैं।

मुद्रा योजना
छोटे कारोबारियों को मदद करने के लिए इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। इस योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं। शिशु योजना के तहत 50 हजार रुपये तक के लोन दिए जाते हैं, किशोर योजना के तहत 50 हजार रुपये से 5 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। जबकि तरुण योजना के तहत 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। मुद्रा योजाने देश के 11 करोड़ से अधिक छोटे कारोबारियों को फायदा हुआ है। छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और दुकानदारों को इससे लोन मिलता है। इसके साथ ही सब्जी वालों, सैलून, खोमचे वालों को भी इस योजना के तहत लोन दिए जाने का प्रावधान है। इससे रोजगार सृजन करने और देने वालों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। 

कौशल विकास योजना
इसके लिए 21 मंत्रालयों और 50 विभागों में फैले कौशल विकास कार्य को एक ही मंत्रालय के अधीन लाया गया। अगले चार साल में एक करोड़ युवकों को प्रशिक्षित करने के लिए 12,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की गई। इसमें 20 लाख से अधिक युवक पहले ही लाभान्वित हो चुके हैं। इसके तहत देशभर में फैले हुए 978 रोजगार कार्यालय राष्ट्रीय कॅरियर सेवा पोर्टल में एकीकृत किये गये हैं।

15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार– देश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी कृत-संकल्प हैं। इस संकल्प की सिद्धि के लिए किसी भी प्रकार के कदम उठाने में वह पीछे नहीं हटे हैं और लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिनसे सभी को रोजगार के अवसर मिलें और सबका विकास सुनिश्चित हो सके। इसी को ध्यान में रखते हुए, 83 हजार किलोमीटर के राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण की योजना को लागू करने के लिए 7 लाख करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के लागू होने से 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार युवाओं को मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद से देश में राजमार्गों के निर्माण कार्यों में तेजी आई है। 2016-17 के दौरान प्रतिदिन अब तक की सबसे तेज गति से राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया। प्रति दिन 22 किमी. राजमार्गों का निर्माण हुआ, जो 2015-16 में 16 किमी. प्रतिदिन था, वहीं यूपीए सरकार के दौरान साल 2014-15 में 12 किमी. और 2013-14 में 11 किमी. रहा था। 

मीडिया और मनोरंजन उद्योग में 7-8 लाख रोजगार
Confederation of Indian Industries (CII) और ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी Boston Consulting Group (BCG) की रिपोर्ट से यह अनुमान सामने आया है कि आने वाले पांच वर्षों में भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सात से आठ लाख नौकरियां निकलने जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में मीडिया और मनोरंजन की सामग्रियों को लेकर रुझान काफी बढ़ा है जिसके चलते इस सेक्टर में रोजगार के अवसर काफी बढ़ने वाले हैं। CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा: “डिजिटल प्लेटफॉर्म का काफी विस्तार हो रहा है और इस सेक्टर में इतने अवसर बनने जा रहे हैं जितने पहले कभी नहीं बने। विशेष रूप से रचनाकार, कथाकार और टेक्नोलॉजी मुहैया कराने वालों  के लिए बहुत सारे मौके उभरेंगे।”

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