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मोदी नीति का कमाल- 2021 तक उपलब्ध होंगी 70 लाख नई नौकरियां

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार युवाओं को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश के युवा job seeker के बजाय job creator बनें। प्रधानमंत्री की इस सोच के साथ उनकी सरकार रोजगार के मोर्चे पर कई बड़े कदम उठा चुकी है जिसके कारण उम्मीद है कि सन 2012 तक 70 लाख नई नौकरियों के अवसर उपलब्ध होंगे। यानी हर साल 14 लाख नए लोगों को जॉब के नए मौके मिलेंगे।

अंग्रेजी बिजनेस अखबार मींट में छपे पीपुलस्ट्रांग सर्वेक्षण के अनुसार, 100 से 5000 लोगों को रोजगार देने वाली मध्यम स्तर की कंपनियां में आने वालों वर्षों में सबसे अधिक नौकरियां मिलेंगीं। सर्वेक्षण के अनुसार यदि वर्तमान समय में जारी सकल घरेलू उत्पाद की वृध्दि दर और नौकरियों के सृजन की दर, आने वाले सालों में भी बनी रही तो मध्यम स्तर की ये कंपनियां सन 2021 तक लगभग 70 लाख नई नौकरियों का सृजन करेंगी, इसका मतलब हुआ कि हर साल लगभग 14 लाख नौकरियां।

सर्वेक्षण के अनुसार मध्यम स्तर की ये कंपनियां हर साल 35 लाख लोगों को नौकरियां देती हैं, जिनमें से 25 लाख नौकरियों पर रिप्लेसमेंट हायरिंग होती है और दस लाख नई नौकरियों पर ही नियुक्ति होता है। साथ ही ऑटोमेशन के कारण नौकरियों में इस समय में हो रही कमी में से 23 प्रतिशत की भरपाई 2021 तक हो जायेगी।

सर्वेक्षण का यह भी कहना है कि मध्यम दर्जे की इन्हीं कंपनियों से देश के आर्थिक विकास को मजबूती मिलती है और मोदी सरकार ने ऐसी कंपनियों के लिए ही नई नीतियों की घोषणा की है जिससे देश में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता संभालने के फौरन बाद सितम्बर 2014 में अपनी महत्वाकांक्षी योजना मेक इन इंडिया की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग एवं निर्यात हब में तब्दील करना और युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराना है।

मेक इन इंडिया- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मेक इन इंडिया की शुरुआत से लेकर अब तक यानि वर्ष 2014-15 से लेकर वर्ष 2016-17 तक देश में कुल 9208.44 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक इस अभियान के तहत वर्ष 2014-15 में 1623.91 करोड़ डॉलर का, वर्ष 2015-16 के दौरान 4000 करोड़ डॉलर का और वर्ष 2016-17 में 3584.43 करोड़ डॉलर का एफडीआई आया है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस-ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) इंडेक्स वर्ल्ड बैंक ग्रुप द्वारा स्थापित रैंकिंग प्रणाली है। इसमें उच्च रैंकिंग का मतलब होता है आसान एवं बेहतर विनियमन और संपत्ति के अधिकारों की सुरक्षा का मजबूत आधार। इसके इंडेक्स के लिए 189 देशों से आंकड़े इकट्ठे किए जाते हैं, जो व्यापार विनियम के 10 क्षेत्रों से लिए गए होते हैं। ये क्षेत्र हैं- व्यापार की शुरुआत, निर्माण परमिट, ऊर्जा की सहूलियत, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, कर्ज की सहूलियत, छोटे निवेशकों की रक्षा आदि। इन मानकों पर भारत दुनिया के 189 देशों में 130वें स्थान पर है। मेक इन इंडिया की वेबसाईट के अनुसार 2015 में ईओडीबी की रैंकिंग में भारत 134वें स्थान पर था जो अब दो साल बाद 130वें स्थान पर पहुंच गया।

स्टार्टअप इंडिया-नया उद्यम शुरू करने वाले कारोबारियों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप इंडिया योजना की शुरुआत की। इस योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। स्टार्टअप उद्यमियों के लिए तीन साल के टैक्स अवकाश, पूंजीगत लाभ में टैक्स से छूट, इंस्पेक्टर राज से मुक्त व्यावसायिक परिवेश और अन्य कई तरह के प्रोत्साहनों की भी घोषणा की गई थी।

 

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