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नोटबंदी के बावजूद देश का जीडीपी ग्रोथ रेट बेहतर

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नोटबंदी के बाद भी भारत का विकास दर दुनिया के हर बड़े देश को मात दे रहा है। जो नए आंकड़े जारी हुए हैं, वो विशेषज्ञों की तमाम आशंकाओं को धता बताते हुए न सिर्फ बेहतरीन है, बल्कि मोदी सरकार की कामयाबी की गाथा बयान कर रहा है। भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) ग्रोथ जो अनुमानित आंकड़े जारी किए हैं, वो 7.1 फीसदी है, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष से मात्र 0.5 फीसदी कम है। लेकिन जैसे ही आप देश के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल से तुलना करेंगे तो ये आंकड़े न सिर्फ काफी आगे हैं, बल्कि चंद छोटे देशों को छोड़ दें तो दुनिया में भी सर्वश्रेष्ठ है।

अब जरा विगत पांच साल के जीडीपी ग्रोथ रेट को देखते हैं। वित्तीय वर्ष 2011-12 में जब देश का नेतृत्व दिग्गज अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह कर रहे थे। तब देश का जीडीपी ग्रोथ रेट 6.69 फीसदी था। प्रधानमंत्री बनने से पहले मनमोहन सिंह लगातार देश के टॉप थिंक टैंकर के रूप में वित्त सचिव, आर्थिक सलाहकार, आरबीआई गवर्नर से लेकर वित्त मंत्री तक रहे। इतने अनुभवी व्यक्तित्व के बाद भी अगले वित्तीय वर्ष 2012-13 में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.69 से घटकर 4.47 फीसदी हो गया है। एक साल बाद वित्तीय वर्ष 2013-14 में जीडीपी ग्रोथ रेट में मामूली सुधार होकर 4.74 फीसदी हो गया।

सरकार बदलने के बाद वित्तीय वर्ष 2014-15 का जीडीपी ग्रोथ रेट लगभग दोगुणे स्तर पर आ गया। जीडीपी ग्रोथ रेट 4.74 से बढ़कर 7.3 फीसदी हो गया। इसके एक साल बाद दूसरे वित्तीय वर्ष 2015-16 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.3 फीसदी से बढ़कर 7.6 हो गया। यह मोदी सरकार के नीति और नीयत का ही परिणाम है।
और अब बात करते हैं दुनिया में भारत की क्या स्थिति है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2016-17 में वैश्विक स्तर की जीडीपी ग्रोथ रेट 2.4 फीसदी रहने वाला है। विकसित देश अमरीका का जीडीपी ग्रोथ रेट 1.9 फीसदी और जापान का 0.5 फीसदी है तो विकासशील अर्थव्यस्था वाले देश का ग्रोथ रेट 3.5 ही है। विश्व की आर्थिक व्यवस्था के बीच, मोदी सरकार के तीसरे वित्तीय वर्ष में जीडीपी के ग्रोथ रेट बढ़िया है।

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