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लालू की बेटी मीसा का फार्म हाउस कुर्क, ईडी ने कसा शिकंजा

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की बेटी मीसा भारती की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मीसा भारती पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी ने मीसा और उनके पति शैलेश कुमार का फॉर्म हाउस कुर्क कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये के बेनामी संपत्ति के मामले में ईडी ने 8 जुलाई को मीसा और शैलेश के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी ने मीसा और शैलेश से घंटों पूछताछ भी की थी, लेकिन ईडी दोनों के जवाबों से संतुष्ट नहीं है। यह फार्म हाउस मुखौटा कंपनियों के जरिए आए धन से खरीदा गया था, जब लालू यादव रेलमंत्री थे।

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मीसा और शैलेश का यह फॉर्म हाउस बिजवासन में दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के पास है। यहां कई प्रभावशाली लोगों की प्रॉपर्टी है। जमीन की इस डील की प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है।

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घोटाले में यूं फंसीं मीसा भारती
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रेकॉर्ड के अनुसार, मीसा और शैलेश कम से कम चार प्राइवेड लिमिटेड कंपनियों के डायरेक्टर हैं। दोनों ने दिसंबर, 2002 में मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई और इसका रजिस्ट्रेशन लालू के सरकारी बंगले 25, तुगलक रोड, नई दिल्ली पर कराया गया। कंपनी की बैलेंस शीट के अनुसार इसकी व्यापारिक गतिविधियां 2006 में बंद हो गईं और फिर उसका प्लांट और उसके मशीनें भी बेच दी गईं। लेकिन फिर भी 2008-09 में इसी कंपनी ने बिजवासन के 26, पालम फार्म्स में एक फॉर्महाउस खरीदा। इसके लिए फंड कंपनी के 1,20,000 शेयर्स बेच कर जुटाए गए। खटकने वाली बात ये है कि 10 रुपये प्रति शेयर कीमत वाले इन शेयरों को वीके जैन और एसके जैन नाम के दो कारोबारियों ने 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीद लिया। यहां ये बताना आवश्यक है कि इसी साल मार्च में कालेधन के खिलाफ हुई कार्रवाई में दोनों जैन भाइयों की भी गिरफ्तारियां हुई थीं।

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लालू की बेटी का दूसरा जमीन घोटाला
लालू के बेटी मीसा भारती और दामाद का दिखावे की एक और कंपनी के माध्यम से दिल्ली में एक और संपत्ति खरीदने का भी मामला है। आरोपों के अनुसार KHK होल्डिंग्स नाम की इस कंपनी का उपयोग सैनिक फार्म्स में 2.8 एकड़ का फार्म हाउस खरीदने के लिए किया गया। यह कंपनी असल में विवेक नागपाल नाम के एक व्यक्ति की थी। लेकिन, 2014 में विवेक ने कंपनी के 10,000 शेयर सिर्फ एक लाख रुपये में मीसा और शैलेश को ट्रांसफर कर दिए। नापगाल ने KHK होल्डिंग्स के माध्यम से ही सैनिक फार्म्स की संपत्ति खरीदी थी। माना जा रहा है कि इस प्रॉपर्टी की कीमत भी 50 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

दिल्ली में लालू परिवार की कई संदिग्ध संपत्ति
लालू प्रसाद एंड फैमिली पर दिल्ली में अवैध तरीके से 115 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने के आरोप है। दरअसल लालू का परिवार डिलाइट मार्केटिंग, ए़ के इंफोसिस्टम की तर्ज पर ए़ बी एक्सपोर्ट्स कंपनी के भी मालिक हैं। इस कंपनी के सभी शेयरधारक और निदेशक पद पर लालू के परिवार के लोगों का कब्जा है। इतना ही नहीं दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में जमीन खरीदने के लिए मुंबई के पांच बड़े ज्वेलर्स, सोने के व्यापारियों ने ए़ बी एक्सपोर्ट्स कंपनी को वर्ष 2007-2008 में एक-एक करोड़ के यानि पांच करोड़ रुपये बिना ब्याज के कर्ज दिए। इसी पांच करोड़ रुपये से उसी वर्ष नई दिल्ली के डी-1088, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 800 वर्ग मीटर जमीन मकान सहित पांच करोड़ रुपये में खरीदा गया। आज इस जमीन की कीमत 55 करोड़ से ज्यादा है और इस जमीन पर लालू परिवार का चार मंजिला मकान बनकर लगभग तैयार है, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये है।

सत्ता का दुरुपयोग कर राजभोग करने वाले लालू प्रसाद एंड फैमिली के घोटालों की फेहरिस्त लंबी है।

लालू के बेटे के नाम पर संदिग्ध जमीन
लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव पर शेयर की जानकारी छिपाने का आरोप है। 2010 में लारा डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से 45 डेसि‍मल जमीन, 53.34 लाख रुपये में खरीदी और इस जमीन पर एक मोटरसाइकिल कंपनी का शोरूम भी शुरू किया गया। इस शोरूम को शुरू करने के लिए 2.29 करोड़ रुपये कर्ज लिए गए, तब तेजप्रताप इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। हालांकि 2015 में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद तेजप्रताप यादव ने इस कंपनी के प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन चुनाव आयोग को दिए गए ब्योरे में तेजप्रताप यादव ने न अपने शेयर की जानकारी दी और न कर्ज का कोई उल्लेख किया।

पेट्रोल पंप लेने के लिए बेटे ने की धांधली
बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने पटना के न्यू बाइपास पर बेऊर के पास गलत कागजों के आधार पर अधिकारियों की मिलीभगत से 2011 में भारत पेट्रोलियम का एक पेट्रोल पंप अपने नाम आवंटित करा लिया था। जिस समय तेजप्रताप ने पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया और इंटरव्यू दिया, उस समय नेशनल हाईवे-30 पर न्यू बाइपास की 43 डिसमिल जमीन उनके पास नहीं थी। दरअसल पटना के बिहटा में बीयर फैक्ट्री लगाने वाले अमित कत्याल ने 9 जनवरी, 2012 को एके इंफोसिस्टम कंपनी के निदेशक के नाते लालू के छोटे बेटे और नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पेट्रोल पंप लगाने के लिए 136 डिसमिल जमीन लीज पर दी थी। यानि पेट्रोल पंप के लिए आवेदन तेजप्रताप ने किया था, लेकिन पेट्रोल पंप की जमीन की लीज तेजस्वी के नाम थी। फिर भी तेजप्रताप को पेट्रोल पंप कैसे आवंटित किया गया ? हालांकि इसका आवंटन रद्द किया जा चुका है।

पेट्रोल पंप की छिपा ली जानकारी
सबसे बड़ी बात है कि किसी भी पेट्रोल पंप लेने की प्रक्रिया से पहले एक शपथपत्र देना पड़ता है, जिसमें यह लिखा जाता है कि आवेदक किसी भी निजी और सरकारी पद पर आसीन नहीं होगा। किसी भी तरह के सरकारी पद का लाभ नहीं लेगा। लेकिन फिर भी तेजप्रताप नीतीश सरकार में मंत्री बने हुए थे, वेतन लेते रहे, सरकारी गाड़ी,और बाकी सुविधाओं का उपयोग करते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने जो अपनी संपत्ति का जो ब्योरा उपलब्ध कराया था, उसमें भी इस पेट्रोल पंप का जिक्र नहीं था।</span

950 करोड़ का चारा खा चुके हैं लालू
90 के दशक में जब लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बिहार की जनता के खून पसीने की कमाई लूट ली। 950 करोड़ चारा घोटाला के नाम से मशहूर इस स्कैम का डायरेक्ट कनेक्शन लालू प्रसाद से निकला और अदालत ने उन्हें सजा भी सुनाई है। सजायाफ्ता लालू प्रसाद चुनाव तो नहीं लड़ सकते, लेकिन भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों की यह फैमिली सत्ता से दूर नहीं रहना चाहती। 

रेलमंत्री रहते देश का खजाना लूटा
लालू प्रसाद ने 2006 में मनमोहन सरकार में रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों को लीज पर देने में भी घोटाला कर लिया। इस मामले में लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी समेत 8 लोगों पर धारा 420 और 120बी के तहत केस दर्ज किया गया है। दरअसल रांची और पुरी के चाणक्य बीएनआर होटल रेलवे के हेरिटेज होटल थे। लेकिन लालू ने उसे अपने करीबियों को औने-पौने दामों में सौंप दिया। सबसे बड़ी बात है कि पूरा रेनोवेशन हो जाने के चलते उस का ऐतिहासिक महत्व भी खत्म किया जा चुका है।

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पटना में भ्रष्टाचार का मॉल
लालू प्रसाद पर पटना में सबसे बड़ा मॉल बनवाने के लिए परिवार के नाम पर 200 करोड़ की जमीन भ्रष्ट तरीके से हड़पने का आरोप है।आरोप है कि लालू प्रसाद ने ये जमीन रेलमंत्री रहते हुए रांची और पुरी में रेलवे के दो होटलों को लीज पर देने के एवज में ही गैर-कानूनी तरीके से हथिया लिया है। जिस कंपनी के नाम जमीन का मालिकाना हक है उसके डायरेक्टर लालू के बेटे और बेटियां हैं।

चारा घोटाला के बाद मिट्टी घोटाला
दिलचस्प है कि मॉल की इसी जमीन की मिट्टी को लेकर भी लालू यादव और उनके परिवार पर 80 लाख रुपये के मिट्टी घोटाले का भी आरोप है। इसके अनुसार लालू के दबाव में पटना के चिड़िया घर को दानापुर में बन रहे लालू एंड फैमिली के मॉल की मिट्टी जबरन बेची गई। यानि पहले जमीन घोटाला किया और फिर घोटाले वाली जमीन से निकली मिट्टी से भी घोटाला कर लिया। हालांकि राज्य सरकार ने पहली बार हाईकोर्ट में माना है कि मॉल का जो निर्माण हो रहा है वो गैर-कानूनी है।

जमीन घोटालों की जद में लालू
लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे तब उनपर लोगों से जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप लगा था। ग्रुप सी और डी की कई नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गई थी, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने आंखें मूंद रखीं थी। लालू एंड फैमिली पर इसके साथ ही कई जमीन गलत कागजात के आधार पर खरीदने का आरोप है।

घूस लेकर बनाया मंत्री
लालू यादव पर आरोप है कि यूपीए- 1 के दौरान उन्होंने मनमोहन सरकार में मंत्री बनवाने के एवज में रिश्वत के तौर पर जमीन लिखवाई। लालू पर जिन लोगों से जमीन लेकर मंत्री बनवाने का आरोप है वो हैं रघुनाथ झा और कांति सिंह। ये दोनों मनमोहन सरकार में मंत्री रह चुके हैं। दोनों नेताओं ने माना भी है कि उन्होंने लालू यादव के परिवार को गिफ्ट में जमीनें दी हैं।

पार्टी का टिकट बेचकर खरीदा बंगला
गोपालगंज के एनएच 28 के किनारे हजियापुर वार्ड नम्बर 16 में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का यादव का वह बंगला है, जो कभी गोपालगंज के तत्कालीन सांसद रघुनाथ झा ने बड़े ही शौक से अपने लिए बनवाया था। लेकिन बाद में रघुनाथ झा लालू को यह घर गिफ्ट कर दिया था। कहा जा रहा था कि रघुनाथ झा ने राजद की सीट पर बेतिया से चुनाव लड़ने के एवज में यह बंगला गिफ्ट किया है। दस्तावेजों से भी साफ है कि रघुनाथ झा ने अपने बंगले को लालू परिवार के नाम किया है।

लालू एंड फैमिली का गिफ्ट घोटाला
लालू परिवार पर पिछले कुछ वर्षों में करोड़ो के फ्री गिफ्ट की बरसात भी जांच के दायरे में है। इसमें भी तेजस्वी के नाम पर कई संपत्तियों की लेन-देन हुई इनकी जांच चल रही है। इसके अलावा बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को एक नौकर ने जनवरी, 2014 में उन्हें पटना के सगुना मोड़ में 1,088 वर्ग फीट की एक जमीन मुफ्त में दी थी। इस जमीन की कीमत तब करीब 31 लाख रुपये थी। चौंकाने वाली बात ये है कि ललन चौधरी नाम के नौकर ने मार्च, 2009 में वो जमीन मकान के साथ सिर्फ 3.90 लाख रुपये में खरीदी थी। 5 साल में ही उसकी कीमत जब 10 गुना बढ़ गई, तो उसने राबड़ी देवी को इसीलिए दे दिया क्योंकि उन्होंने ललन को समय-समय पर आर्थिक और बाकी तरहों से मदद की थी। दरअसल ये सारा खेल काले धन को सफेद करने के लिए रचा गया था।

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