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पीएम मोदी की सौगात: किसानों को डेढ़ गुना MSP, कृषि कर्ज के लिए 11 लाख करोड़ का फंड

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों, गरीबों, वंचितों और आदिवासियों के उत्थान के लिए काम कर रही है। 2018 के आम बजट में भी किसानों और गरीबों को लेकर मोदी सरकार की प्रतिबद्धता एक बार फिर नजर आई है। मोदी सरकार ने किसानों और गरीबों को लिए इतने काम किए हैं कि इससे पहले किसी और सरकार ने नहीं किए। केंद्र सरकार ने बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए 14.50 लाख करोड़ रुपये का फंड तय किया गया है। इससे गांवों का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सुधरेगा और ग्रामीणों को रोजगार के अधिक अवसर भी मिलेंगे। लोकसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण की शुरुआत ही खेती-किसानी की बात से की। किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) डेढ़ गुना बढ़ाने, सिंचाई के लिए ज्यादा बजट, ग्रामीण इलाकों में ही उपज का बाजार उपलब्ध कराना, मत्य और पशुपालन क्षेत्र के लिए अलग फंड, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास निर्माण का लक्ष्य बढ़ाना, ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन का लक्ष्य बढ़ाने, ग्रामीण इलाकों में मुफ्त बिजली कनेक्शन जैसी तमाम ऐसी घोषणाएं की गई, जिनसे साबित होता है कि मोदी सरकार गंभीरता के साथ किसान और गरीबों के आर्थिक विकास के लिए काम कर रही है।

एक नजर डालते हैं किसानों और गरीबों के लिए बजट में की गई घोषणाओं पर-

किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 के बजट में किसानों के लिए सौगातों की झड़ी लगा दी। किसानों की सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इसके लिए मोदी सरकार ने किसानों के लिए प्रतिबद्धता को दिखाते हुए किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का ऐलान किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को डेढ़ गुना मूल्य देने के लिए बाजार मूल्य और एमएसपी में अंतर की रकम सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही, मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए 11 लाख करोड़ का फंड बनाने का भी ऐलान किया है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी फसलों को एमएसपी के अंतर्गत लाया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना है।

गांवों में ही किसानों को मिलेगा उपज का बाजार
देश में 86 प्रतिशत से ज्यादा छोटे या सीमांत किसान हैं। इनके लिए मार्केट तक पहुंचना आसान नहीं है। इसलिए सरकार इन्हें में ध्यान रखकर इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करेगी। इसके लिए सरकार 22 हजार ग्रामीण हॉट को ग्रामीण कृषि बाजार में बदलेगी। 2,000 करोड़ से कृषि बाजार और संरचना कोष का गठन होगा। ई-नैम को किसानों से जोड़ा गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य मिल सके। 585 EMPC को ई-नैम के जरिए जोड़ा जाएगा। यह काम मार्च 2019 तक ही खत्म हो जाएगा।कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी सरकार ने रखा है। पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी उपलब्ध कराने की योजना चलाई जा रही है. इसके तहत सिंचाई के पानी की कमी से जूझ रहे 96 जिलों को चिन्हित कर 2,600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

पशुपालन और मत्य क्षेत्र के विकास के लिए फंड
केंद्र सरकार ने कृषि के साथ ही किसानों की आय को बढ़ाने वाले दूसरे साधनों को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये से पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्टर विकास और फिशरीज डेवलपमेंट फंड बनाने का ऐलान किया है। इस फंड से पशुपालन और मत्य पालन में लगे किसानों को ऋण दिया जाएगा। 1290 करोड़ रुपये से राष्ट्रीय बांस मिशन का गठन किया जाएगा। कृषि क्षेत्र को संस्थागत ऋण का आवंटन 2018-19 में बढ़ा कर 11 लाख करोड़ रुपये किया गया है। बड़ी संख्या में किसान कृषि लोन की सुविधा से वंचित रह जाते हैं, ज्यादातर ये बंटाईदार होते हैं और इन्हें बाजार से कर्ज लेना पड़ता है। वित्त मंत्री ने अनुसार नीति आयोग ऐसी व्यवस्था बना रहा है कि ऐसे किसानों को कर्ज लेने में सुविधा मिले।

ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन
केंद्र सरकार ने आलू, टमाटर, प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव की समस्या से निपटने के लिए ऑपरेश ग्रीन्स का एलान किया है। इसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सालभर इन सब्जियों के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा, ताकि इनकी उपलब्धता बनी रहे और दाम भी नियंत्रित रहें। वित्त मंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है।

खाद्य प्रसंस्करण का बजट दोगुना किया
देश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विकास पर मोदी सरकार का फोकस है, क्षेत्र 8 प्रतिशत वार्षिक की दर से वृद्धि कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य प्रसंस्करण का बजट दोगुना कर दिया गया है। 42 मेगा फूड पार्क बनाने का भी प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही ग्रामीण महिलाओं, गरीबों और अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा हुई है। एक नजर डालते हैं।

*उज्ज्वला स्कीम के तहत 8 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले इस योजना के तहत 5 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य था, लेकिन इसकी लोकप्रियता कोक देखकर लक्ष्य को बढ़ा दिया गया है।
*पीएम सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ घरों में मुफ्त बिजली कनेक्शन का लक्ष्य है। इस वर्ष 1.75 करोड़ घरों में मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
*स्वच्छ भारत मिशन से गरीबों को लाभ पहुंचा है, अब तक लगभग 6 करोड़ शौचालय बन चुके हैं। 2018-19 में 2 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य है।
*मोदी सरकार ने 2022 तक हर गरीब के सर पर पक्की छत का लक्ष्य निर्धारित किया है। पीएम ग्रामीण आवास योजना के तहत अगले वित्तीय वर्ष में 51 लाख मकान बनाने का लक्ष्य है।
*समावेशी समाज का सपना पूरा करने के लिए 115 जिलों की पहचान की गई
*अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए 56,619 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
*अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के लिए 39,135 करोड़ आवंटित किए गए। पिछले वर्ष की तुलना में 6,627 करोड़ रुपये का बजट बढ़ाया गया है।
* अनुसूचित जानजाती के बच्चों के लिए उनके क्षेत्र में एकलव्य स्कूल खोलने का फैसला किया है।
*खुले में शौच से गांवों को मुक्त करने तथा ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए वित्त मंत्री ने गोबर-धन (गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्स धन) योजना के शुभारंभ की घोषणा की है। इस योजना के अंतर्गत पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कम्पोस्ट, बायो-गैस और बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा।

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