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देखिए कैसे पाक हो रहा अलग-थलग और भारत का बज रहा डंका

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कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मुंह की खानी पड़ी है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगले आदेश तक पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को फांसी नहीं दे सकता। इस मामले में यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले तीन साल में दुनिया भर में भारत का डंका बजाने और पाकिस्तान को अलग-थलग करने में कामयाब रहे हैं। आइए एक नजर डालते हैं पाकिस्तान को अलग-थलग करने की राजनीति में मोदी सरकार को मिली कूटनीतिक कामयाबी पर-

सर्जिकल स्ट्राइक और सार्क सम्मेलन
जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 29 सितम्बर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लांचपैठ को तबाह किया। इस के साथ ही पहली बड़ी सफलता 28 सितंबर को तब मिली जब पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा के तुरंत बाद तीन अन्य देशों (बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान) ने उसका समर्थन करते हुए सम्मेलन में ना जाने की बात कही। वहीं नेपाल ने सम्मेलन की जगह बदलने का प्रस्ताव दिया और पाकिस्तान के आंतकवाद के कारण सार्क सम्मेलन न हो सका।

अरब कूटनीति
भारत ने चीन और पाकिस्तान की खतरनाक जुगलबंदी को तोड़ने के लिए वियतनाम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अन्य देशों को अपने पक्ष में लामबंद कर चक्रव्यूह तैयार कर लिया है। इस साल 2017 के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को मुख्य अतिथि बनाकर एक अहम कूटनीतिक चाल चली जिससे पाकिस्तान के होश उड़ गये। सऊदी अरब की तरह संयुक्त अरब अमीरात भी पाकिस्तान का पुराना सामरिक सहयोगी है। यूएई, सऊदी अरब और पाकिस्तान ही ऐसे तीन देश थे जिन्होंने अफगानिस्तान में तालिबानी शासन को मान्यता दी थी। अब इन सभी से भारत के अच्छे रिश्ते बन रहे हैं क्योंकि मोदी सरकार की कूटनीतिक नीतियों में राष्ट्र का हित सर्वोपरि है। मोदी जब से सत्ता में आए हैं, उनके विदेश दौरों में मध्य पूर्व प्रमुखता से छाया रहा है। दोनों देश आतंकवाद से जंग और सिक्योरिटी के मसले पर एक-दूसरे को हरसंभव सहयोग कर रहे हैं।

ईरान ने दी पाक को धमकी
ईरान और अफगानिस्तान ने हाल ही में पाकिस्तान से आतंकवादी घटनाओं को काबू में करने की चेतावनी दी है। ईरान ने साफ कहा कि वो पाकिस्तान के अंदर घुसकर सुन्नी आतंकवादी ठिकानों और लांचपैठ को तबाह कर देगा। हाल ही में पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों ने ईरान के दस सीमा सुरक्षा सैनिकों को मार गिराया है।

सार्क सैटेलाइट से पाक पर चोट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उम्दा कूटनीति की मिसाल है दक्षिण एशिया संचार उपग्रह। इसकी पेशकश उन्होंने 2014 में काठमांडू में हुए सार्क सम्मेलन में की थी। यह उपग्रह सार्क देशों को भारत का तोहफा है। सार्क के आठ सदस्य देशों में से सात यानी भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और मालदीव इस परियोजना का हिस्सा बने जबकि पाकिस्तान ने अपने को इससे यह कहकर अलग कर लिया कि इसकी उसे जरुरत नहीं है वह अंतरिक्ष तकनीक में सक्षम है। 5 मई 2017 के सफल प्रक्षेपण के बाद इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जिस तरह खुशी का इजहार करते हुए भारत का शुक्रिया अदा किया उससे उपग्रह से जुड़ी कूटनीतिक कामयाबी का संकेत मिल जाता है। लेकिन पाकिस्तान ने अपने अलग-थलग पड़ने का दोष भारत पर यह कहते हुए मढ़ दिया कि भारत परियोजना को साझा तौर पर आगे बढ़ाने को राजी नहीं था।

चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर
चीन की अहम वन बेल्ट वन रोड की रणनीति के तहत बनने वाले चीन पाकिस्तान कॉरिडोर में भारत के साथ मामला उलझ गया है। भारत ने चीन से दो टूक शब्दों में कह दिया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजरने वाली इस परियोजना से भारत की संप्रभुता पर प्रश्न खड़ा करती है। इसलिए परियोजना से संबंधित बींजिग में आयोजित सम्मेलन में भारत शामिल नहीं हुआ। भारत के ना आने से चीन परेशान है क्योंकि इस परियोजना की सफलता खटाई में पड़ सकती है। इसलिए भारत को रिझाने के लिए भारत में चीन के राजदूत लीयूचेंग ने आधिकारिक रुप से कहा कि इस कॉरिडोर का नाम भारत पाकिस्तान चीन कॉरिडार किया जा सकता है, जिससे भारत की संप्रभुता वाली शंका का समाधान किया जा सकता है।

विश्व वेसक दिवस
पाकिस्तान का हर फोरम में साथ देने वाले चीन को को चुनौती देने के लिए भारत अब सांस्कृतिक कूटनीति का भी सहारा ले रहा है। अभी हाल ही में अरुणाचल में दलाई लामा का दौरा उसी की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित विश्व वेसक दिवस पर दुनियाभर से आए बौद्ध धर्म के अनुयायियों को संबोधित किया। बौद्ध धर्म चीन की कमजोर नस है।

आइए अब देखते हैं भारत किस तरह से दूसरे देशों को मदद देकर दुनिया भर में डंका बजाने में कामयाब रहा है।

मालदीव के लोगों की प्यास बुझाई
दिसंबर 2014 में मालदीव का वाटर प्लांट जल गया, जिससे पूरे देश में पीने के पानी की किल्लत हो गई। पूरे देश में त्राहिमाम मच गया और आपातकाल की घोषणा कर दी गई। तब भारत ने पड़ोसी का फर्ज अदा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्वरित फैसला लिया। मालदीव को पानी भेजने का निर्णय कर लिया गया और इंडियन एयर फोर्स के 5 विमान और नेवी शिप के जरिये पानी पहुंचाया जाने लगा।

नेपाल भूकंप में राहत का अद्भुत उदाहरण
27 अप्रैल 2015 को नेपाल की धरती में हलचल हुई और आठ हजार से ज्यादा जानें एक साथ काल के गाल में समा गईं। जान के साथ अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। हलचल नेपाल में हुई लेकिन दर्द भारत को हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और नेपाल के लिए भारत की मदद के द्वार खोल दिए। नेपाल में जिस तेजी से मदद पहुंचाई गई वो अद्भुत था। भारतीय आपदा प्रबंधन की टीम ने हजारों जानें बचाईं। सबसे खास रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय का नेपाल सरकार से बेहतरीन समन्वय रहा। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की पूरे विश्व ने सराहना की।

 

यमन और खाड़ी देशों में राहत कार्य
जुलाई 2015 में यमन गृहयुद्ध की चपेट में था और सुलगते यमन में पांच हजार से ज्यादा भारतीय फंसे हुए थे। बम गोलों और गोलियों के बीच हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को सुरक्षित निकालना मुश्किल लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुशल नेतृत्व और विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह के सम्यक प्रबंधन और अगुवाई ने कमाल कर दिया। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय से भारत के करीब पांच हजार नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया वहीं 25 देशों के 232 नागरिकों की भी जान बचाने में भारत को कामयाबी मिली। इस सफलता ने विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए मजबूर कर दिया ।

अफगानिस्तान में भूकंप में राहत
अक्टूबर 2015 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 7.5 तीव्रता के भूकंप से 300 लोगों के मौत हो गई। पीएम मोदी ने तत्काल दोनों देशों को मदद की पेशकश की। अफगानिस्तान में भारतीय राहत टीम को बिना देर किए रवाना किया गया और मलबे में फंसे सैकड़ों लोगों को निकालने में सफलता पायी।

सऊदी अरब में फंसे हजारों भारतीयों को निकाला
सऊदी अरब में गलत हाथों में जाकर फंसे करीब 20 हजार भारतीय तीन महीने के भीतर अपने वतन वापस लौट पाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयास से सऊदी अरब सरकार ने भारतीयों को 90 दिन के लिए ‘राजमाफी’ दी है। ‘राजमाफी’ के तहत 20 हजार से ज्यादा लोगों ने भारत लौटने के लिए अर्जी दाखिल की है।

इसक साथ ही…

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका यात्रा के पहले दिन ही, 07 जून 2016 को भारत को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) के सदस्य देश भारत को इस ग्रुप में शामिल करने को राजी हो गए।
  • इसी दिन अमेरिका ने भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने के लिए पूरा समर्थन दिया।
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ में की गयी इस अपील को कि 21 जून को विश्व योग दिवस के रुप में मनाया जाए। 2014 के अंत आते-आते 175 देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को योग दिवस घोषित कर दिया।
  • पीएम मोदी का मेडिसन स्कावयर में 2014 को भारतीयों को दिया गया भाषण अमेरिका के किसी रॉक स्टार से बड़ा मेगा शो बना, जिसने श्री मोदी को विश्वमंच पर स्थापित कर दिया।
  • पहली बार लीग ऑफ अरब स्टेटस से सहयोग के लिए भारत-अरब की मंत्री स्तर की बैठक हुई।

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