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चीन को 15 मिनट में भगाने का राहुल गांधी का फॉर्मूला, 1 मिनट में घुसपैठ की खबर का खंडन और 14 मिनट में रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों पर FIR दर्ज

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों को लेकर सूर्खियों में रहते हैं। 6 अक्टूबर, 2020 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसानों की एक रैली में राहुल गांधी ने जो दावा किया, वह पूरे देश में चर्चा का विषय बना। राहुल गांधी ने कहा था कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ किसी दूसरे देश की सेना ने घुस कर यहां की जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है। वो सत्ता में होते तो सिर्फ 15 मिनट में चीन की सेना को भगा देते। सिर्फ भगा नहीं देते, बल्कि उसे उठाकर 100 किलोमीटर पीछे फेंक देते।

इस दावे को सुनकर आप सोच में पड़ गए होंगे कि राहुल गांधी 15 मिनट में  चीनियों को कैसे भगा देते। उनके दावे का आधार क्या है। वह कौना सा फॉर्मूल है, जिसके आधार पर राहुल ऐसा कर सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि राहुल गांधी की यूपीए सरकार 2009 में इस तरह का कारनामा कर चुकी है। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में तत्कालीन यूपीए सरकार ने भारतीय सीमा में चीनी घुसैपठ और दो जवानों के घायल होने के मामले को सिर्फ 15 मिनट में निपटा दिया था।

यूपीए सरकार ने चीनियों को भगाने के लिए जिस फॉर्मूले को आधार बनाया उसे दूरदर्शन न्यूज़ के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने ट्वीट कर बखूबी समझाया है। उन्होंने 2009 में छपी ‘द हिन्दू’ की खबर की कटिंग शेयर की है। अशोक श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में लिखा, “राहुल गाँधी के चीन को 15 मिनट में भगाने का फॉर्मूला यही है कि 1 मिनट में घुसपैठ की खबर का खंडन और 14 मिनट में रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों पर FIR दायर हो जाती थी। उन्होंने कहा कि इसी तरह चीन को राहुल गाँधी ने ’15 मिनट में भगा दिया।”

अशोक श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में ‘द हिन्दू’ द्वारा 20 सितंबर, 2009 को ‘Media asked not to ‘overplay’China border incidents’ शीर्षक से प्रकाशित खबर को आधार बनाया है। इस मामले में ‘द हिन्दू’ ने सरकार के पक्ष को प्रकाशित किया था। ‘द हिन्दू’ ने लिखा था कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने सीमा पर फायरिंग और जवानों के घायल होने की खबर का खंडन किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि उन्होंने इस खबर को गंभीरता से लिया है और इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए वो FIR दर्ज कराने जा रहा है। आज ऐसी हजारों रिपोर्ट्स प्राकशित होती हैं और देश के विरोध में लिखा जाता है।

दरअसल, 15 सितंबर, 2009 को ‘द हिन्दू’ में “Two ITBP jawans injured in China border firing” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई थी, जिसमेंं लिखा गया था, “चीन द्वारा सीमा पर की गई फायरिंग में आईटीबीपी के दो जवान घायल हुए हैं।” इस खबर पर तत्कालीन मनमोहन सरकार ने प्रतिक्रिया देते हुए झूठा करार दिया था। पत्रकारों को अदालत में पेश होने को कहा गया और खबर का सूत्र बताने को कहा गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने तो इस मुद्दे को ही मीडिया हाइप करार दिया था। उनका कहना था कि ऐसी खबरों से कोई अपना नियंत्रण खो सकता है और सचमुच में बड़ी घटना हो सकती है।

बता दें कि सितम्बर 2009 में यूपीए की दोबारा सरकार बनने के कुछ ही महीने बाद भारत-चीन तनाव शुरू हो गया था और तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी सरकार ने सारा दोष मीडिया को ही मढ़ दिया था। उनका कहना था कि मीडिया ने जवानों के घायल होने की खबर को लेकर भ्रम फैलाया है।

आज राहुल गांधी सहित सभी कांग्रेस नेता रोज सरकार और सेना के खिलाफ बोलते हैं। सरकार और सेना के बयान को बिना तथ्य के गलत करार देते हैं। चीनी सेना के घुसपैठ की तरह-तरह की कहानियां बनाते हैं। अपने दावे की पुष्टि के लिए फर्जी सबूतों का सहारा लेते हैं और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से झूठा बयान दिलाते हैं। मीडिया में भी रोज सैकड़ों लेख छपते हैं, जिनमें चीन का एजेंडा फैलाया जाता है। मोदी सरकार में किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। वहीं यूपीए काल में एक खबर पर FIR हो जाया करती थी। मीडिया से खबरों के स्रोत पूछे जाते थे। अपने शासन में चीन से गुप्त समझौते करने और दान लेने वाले राहुल गांधी आज जनता के सामने सिर्फ शेखी बघारने में लगे हैं।

 

 

 

 

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