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प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाई 100वीं किसान रेल को हरी झंडी, कहा- किसानों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 दिसंबर को देश की 100वीं किसान रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रेल महाराष्ट्र के सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार तक के लिए चलाया जाएगा। अब तक की 99 किसान रेल 14 राज्यों में चली हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार किसानों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसान रेल सेवा देश के किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। इससे खेती से जुड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि इससे देश की कोल्ड सप्लाई चेन की ताकत भी बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये काम किसानों की सेवा के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। लेकिन ये इस बात का भी प्रमाण है कि हमारे किसान नई संभावनाओं के लिए कितनी तेजी से तैयार हैं। किसान, दूसरे राज्यों में भी अपनी फसलें बेच सकें, उसमें किसान रेल और कृषि उड़ान की बड़ी भूमिका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान रेल चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज भी है। यानि इसमें फल हो, सब्ज़ी हो, दूध हो, मछली हो, यानि जो भी जल्दी खराब होने वाली चीजें हैं, वो पूरी सुरक्षा के साथ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच रही हैं। अब किसान रेल जैसी सुविधा से पश्चिम बंगाल के लाखों छोटे किसानों को एक बहुत बड़ा विकल्प मिला है। और ये विकल्प किसान के साथ ही स्थानीय छोटे-छोटे व्यापारी को भी मिला है। वो किसान से ज्यादा दाम में ज्यादा माल खरीदकर किसान रेल के ज़रिए दूसरे राज्यों में बेच सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े एक्सपर्ट्स और दुनिया भर के अनुभवों और नई टेक्नॉलॉजी का भारतीय कृषि में समावेश किया जा रहा है। स्टोरेज से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर खेती उत्पादों में वैल्यू एडिशन से जुड़े प्रोसेसिंग उद्योग, ये हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम कृषि संपदा योजना के तहत मेगा फूड पार्क्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर, ऐसे करीब साढ़े 6 हजार प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं। आत्मनिर्भर अभियान पैकेज के तहत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

यह ट्रेन अपने साथ फूल गोभी, बंद गोभी, शिमला मिर्च, सहजन, मिर्च और प्याज जैसी सब्जियों के साथ साथ अंगूर, संतरे, अनार, केला और सेव इत्यादि लेकर पहुंचेगी। यह रेलगाड़ी अपने मार्ग में जहां जहां पर भी रुकेगी वहां इससे माल उतारने या इस पर माल लादने की अनुमति होगी। माल की मात्रा की सीमा का भी कोई बंधन नहीं होगा। भारत सरकार ने फल एवं सब्जियों के ढुलाई भाड़े में 50 प्रतिशथ की सब्सिडी दी है।

पहली किसान रेल देवलाली से दानापुर के बीच 7 अगस्त, 2020 को चली थी। जिसे आगे मुजफ्फरपुर तक बढ़ा दिया गया था। किसानों की तरफ से मिलने वाली अच्छी प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप इसके साप्ताहिक फेरों को बढ़ाकर सप्ताह में 3 दिन कर दिया गया। किसान रेल जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला उपलब्ध करा रही है।

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