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आखिर सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए क्यों लाना पड़ा अध्यादेश

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कोरोना-वॉरियर डॉक्टरों पर एक खास समुदाय की ओर से हो रहे हमलों को देखते हुए मोदी सरकार ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। इस समय पूरा देश कोरोना के खिलाफ युद्ध में एकजुट है। कानून प्रायः संसद सत्र के दौरान बनाए जाते हैं, लेकिन आखिर सरकार को इस समय ऐसे अध्यादेश के लिए क्यों बाध्य होना पड़ा। इसका सीधा-सा जवाब पिछले दिनों डॉक्टरों के खिलाफ हुई हिंसा की वे घटनाएं हैं, जिनमें कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। दरअसल, भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने कोरोना वायरस संकट के दौरान अपनी ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमलों के विरोध में एक प्रदर्शन का फैसला किया था। सरकार के आश्वासन के बाद इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया गया। इस अध्यादेश से सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि डॉक्टरों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा।

अध्यादेश में क्या हैं प्रावधान

गैर जमानती अपराध होगा डॉक्टरों पर हमला
डॉक्टरों पर हमले के लिए 7 साल तक की सजा
50 हजार से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना
ऐसे मामलों में एक साल में आ जाएगा फैसला

कब और कहां हुए डॉक्टरों पर हमले 

2 अप्रैल- इंदौर में कोरोना संक्रमितों की जांच करने पहुंची टीम पर पथराव
8 अप्रैल- दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दो महिला डॉक्टरों पर हमला
11 अप्रैल- मेरठ के एक इलाके को सील करने पहुंची पुलिस और स्वास्थ्य टीम पर पथराव
15 अप्रैल- बिहार के औरंगाबाद में जांच के लिए पहुंचे डॉक्टरों पर हमला
16 अप्रैल- हैदराबाद के उस्मानिया अस्पताल में डॉक्टरों की टीम पर हमला

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