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PM Modi की वोकल फॉर लोकल की नीति से चीन हुआ चित, अब Diwali पर देसी झालरों और लाइटिंग का बढ़ा दबदबा, एक हजार करोड़ से ज्यादा के बाजार में भारतीय लाइटिंग की डिमांड से China भौंचक्का

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी विजन से न सिर्फ देश चौतरफा विकास कर रहा है, बल्कि वोकल फॉर लोकल अभियान से आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर बढ़ी तेजी से कदम बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री के इसी अभियान से युवाओं के जुड़ाव का नतीजा है कि दीपोत्सव के मौके पर कभी बाजारों में सौ फीसदी चाइनीज लाइटिंग का दबदबा अब ढलान की ओर है। चीन खुद भौंचक्का है कि आखिर कैसे भारतीयों ने उसके सस्ते और यूज एंड थ्रो उत्पादों को ठुकराना शुरू कर दिया है। इससे चीन की इकॉनामी को झटके लगने शुरू हुए हैं। अकेले दिवाली के मौके पर ही लाइटिंग के एक हजार करोड़ से ज्यादा के बाजार में चीनी दबदबा था। लेकिन पीएम मोदी के आह्वान के बाद अब भारतीय ग्राहक मेड इन इंडिया झालर पसंद कर रहे हैं।पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के इरादों को मजबूती देने के लिए युवा पीढ़ी के किया आह्वान
पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल अभियान को बढ़ावा देने के लिए युवाओं का आह्वान किया था कि वह घर में उपयोग होने वाली वस्तुओं की एक सूची बनाएं और देखें कि उनमें से कितने ऐसे उत्पाद हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, बल्कि विदेशी हैं। उन्होंने कहा, ‘इसके बाद घर के लोगों से आप आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई उत्पाद खरीदा जाए तो वह भारत में बना हो। इससे आत्मनिर्भर भारत के इरादों को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।’ पीएम ने कहा कि अगले 25 सालों में देश जिस ऊंचाई पर होगा और जो उसका सामर्थ्य बनेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका युवा पीढ़ी की होगी। इसलिए युवाओं के देश में बनी वस्तुओं की खरीदारी को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि इन्हें बनाने में भारतीय श्रमिकों की मेहनत और पसीना लगा है।कभी लाइटिंग में चाइनीज प्रोडक्ट्स का सौ फीसदी कब्जा, अब लोगों को देसी झालर आ रही पसंद
प्रधानमंत्री के अटल इरादों और गलवान में चीन की हिमाकत के बाद से भारतीयों ने चाइनीज सामान की खरीदारी को ठुकराना शुरू कर दिया। इसी का नतीजा है कि दिवाली पर लाइटिंग बाजार में चीन का हालत खस्ता है। दिवाली नजदीक आते ही रोशनी के इस त्योहार के लिए लाइटिंग का बाजार सज गया है। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के इस बाजार पर कई साल से चाइनीज प्रोडक्ट्स का 100 प्रतिशत कब्जा था। पीएम मोदी के आह्वान और गलवान संघर्ष के बाद चीन के प्रति उठा गुस्सा लोगों में कायम है। इसीलिए ग्राहक सस्ती और सजावटी चाइनीज लाइटिंग को ठुकराकर मेड इन इंडिया झालर पसंद कर रहे हैं। खास बात यह है कि जहां चीनी झालर की वारंटी नहीं होती, वहीं भारतीय झालर पर 3-4 सीजन की वारंटी दी जा रही है।

पचास हजार से ज्यादा डीलर देशभर में उपलब्ध करा रहे अच्छी गुणवत्ता की भारतीय झालरें
रोशनी के पर्व को अब जबकि एक सप्ताह से भी कम बचा है तो बाजार रोशनी की सजावट से जगमग होने लगे हैं। हालांकि भारतीय लाइटिंग की डिमांड पिछले कुछ सालों से लगातार बढ़ रही है, लेकिन इस साल तो भारतीय डिजाइनर (जॉय) लाइटिंग की डिमांड ज्यादा है। ओरिएंट इलेक्ट्रिक के ईवीपी एवं लाइटिंग बिजनेस हेड पुनीत धवन के मुताबिक दिवाली पर जॉय लाइटिंग का बिजनेस ही 100 करोड़ से ज्यादा का होता है। इस साल घरेलू कंपनियां अच्छी गुणवत्ता की झालरें लाई हैं। इनमें दीए, भगवान गणेश, स्वस्तिक जैसी डिजाइन शामिल हैं। 40-50 हजार डीलर्स के जरिए भारतीय झालरें देशभर में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

फिनिश्ड प्रोडक्ट में चीन पर निर्भरता करीब-करीब खत्म, अब 85% असेंबलिंग देश में ही
इसके अलावा इलेक्ट्रिक लैम्प एंड कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक देश में LED लाइटिंग कारोबार 23,000 करोड़ रु. का है। भारत में कुल लाइटिंग में LED की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत तक है। इसमें कंज्यूमर लाइटिंग की हिस्सेदारी करीब साठ फीसदी है। अब भारत में एलईडी के निर्माण में तेजी से लाइटिंग कारोबार में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। ओरिएंट इलेक्ट्रिक के पुनीत धवन के मुताबिक मोदी सरकार की पीएलआई स्कीम के बाद लाइटिंग निर्माताओं के हौसले बुलंद हैं। फिनिश्ड प्रोडक्ट में चीन पर निर्भरता खत्म-सी हो गई है। अच्छी बात यह है कि 85% असेंबलिंग अब यहीं होने लगी है।कोरोना पर काबू के बाद अब चीनी कंपनियों की बाजार पर ढीली पकड़ साफ दे रही है दिखाई
अब कमरे और इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग लाइट खरीदी जा रही है। कलर चेंजिंग और डिम होने वाली लाइट के अलावा रिमोट कंट्रोल्ड, मोबाइल और लैपटॉप से नियंत्रित होने वाली लाइटिंग की डिमांड भी है। ये सभी तरह की लाइट देश में ही असेंबल हो रही हैं। बीते 5 सालों में एनर्जी सेविंग लाइटिंग आने से बिजली की खपत में भी काफी कमी आई है। बीते दो सालों में कोरोना महामारी के चलते फेस्टिवल का जोश पहले जैसा नज़र नहीं आया. लेकिन अब जब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है, तो चीनी कंपनियों की बाजार पर ढीली होती पकड़ साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

भारतीय कंपनियां अपने लाइटिंग उत्पादों पर 3-4 सीजन की दे रहीं हैं वारंटी
सस्ते चीनी प्रोडक्ट्स का मुकाबला करने के लिए देसी कंपनियां वारंटी के साथ आई हैं। चीनी झालर पर जहां कोई वारंटी नहीं होती, वहीं स्थानीय झालरों पर 3 से 4 सीजन की वारंटी दी जा रही है। लोकल फॉर वोकल के साथ ही यह भी एक वजह है कि चीनी आइटम के ग्राहक भारतीय कंपनियों के प्रोडक्ट पर शिफ्ट हो रहे हैं। इस साल डिजाइनर लाइटिंग की डिमांड ज्यादा है और घरेलू कंपनियां अच्छी क्वालिटी के साथ ही अलग-अलग प्रकार की झालरें लेकर आई हैं। इसके अलावा, कलर चेंजिंग, रिमोट कंट्रोल्ड, मोबाइल और लैपटॉप से नियंत्रित होने वाली लाइटिंग की भी डिमांड है। इन लाइटिंग को देश में ही असेंबल किया जा रहा है।प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत कई देसी कंपनियां एनर्जी सेविंग उत्पाद लेकर आई
इस दिवाली लोग एनर्जी सेविंग लाइटिंग भी पसंद कर रहे हैं, जिसमें बिजली की खपत कम होती है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत कई भारतीय कंपनियां इस तरह के उत्पाद लेकर आई हैं। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात बिल कम करने के लिए मार्च 2020 में प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना की शुरुआत की थी। इसमें सरकार कंपनियों को भारत में बने प्रोडक्ट की बिक्री के आधार पर इंसेंटिव देती है। विदेशी कंपनियों को भारत में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए हतोत्साहित करने के साथ-साथ, इस योजना का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को देश में अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

 

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