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मोदी सरकार में भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं

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भ्रष्टाचार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति जीरो टॉलरेंस की है। मोदी सरकार से पहले तक देश में कांग्रेस संस्कृति के शासन में ‘सब चलता है’ की सोच के कारण भ्रष्टाचार, घोटालों और अनिर्णय से पूरा तंत्र ग्रसित हो गया था, इससे काम न करने वाले भ्रष्टाचारी और दूसरों पर आश्रित रहने वाले लोग फलते-फूलते रहे। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से इस संस्कृति को उखाड़ फेंकने का काम चल रहा है। अब ‘सब चलता है’ को दंडित किया जाता है, भ्रष्टाचारियों को एक- एक करके शिकंजे में लाया जा रहा है

विजय माल्या बच नहीं सकता
सरकारी बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये लेकर विदेश भागने वाले विजय माल्या की संपत्तियों को सरकार ने अपने स्वामित्व में लेना शुरु कर दिया है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने विजय माल्या के यूनाइडेट ब्रिवरिज लिमिटेड में 100 करोड़ रुपये के शेयर केन्द्र सरकार को स्थान्तारित कर दिए हैं। विजय माल्या के 4,000 करोड़ रुपये के शेयर इस कंपनी के पास हैं, जिसे केन्द्र सरकार को देने की प्रक्रिया की यह शुरुआत है। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act, 2002 के तहत की गई है। इसके तहत न्यायालय को अधिकार है कि यदि कोई व्यक्ति देश का पैसा लेकर भाग जाता है या मर जाता है, तो उसकी देश में मौजूद संपत्तियों का अधिग्रहण करके सरकार पैसे की भरपाई कर सकती है।

भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं
प्रधानमंत्री मोदी के लिए भ्रष्टाचार देश के खिलाफ किया गया एक ऐसा अपराध है, जो गरीबों का हक तो छीनता ही है देश की प्रगति को भी पटरी से उतार देता है। इसलिए प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने सबसे पहला काम कालेधन पर एसआईटी बनाने का किया। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एमबी शाह इसकी जांच कर रहे हैं, और सर्वोच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्टे दे रहे हैं।

केंद्र सरकार की ओर से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए एक के बाद एक कई निर्णय लिए गये हैं।

जन धन योजना- इसके तहत गरीबों के लिए अब तक लगभग 30 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। सरकारी योजनाओं में सब्सिडी बिचौलियों के हाथों से दिये जाने के बजाय सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचने लगे हैं।

कर बचाने में मददगार देशों के साथ कर संधियों में संशोधन- मॉरीशस, स्वीटजरलैंड, सऊदी अरब, कुवैत आदि देशों के साथ कर संबंधी समझौता करके सूचनाओं को प्राप्त करने का रास्ता सुगम कर लिया गया है।

नोटबंदी- कालेधन पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद सबसे बड़ा कदम 08 नवंबर 2016 को उठाया। नोटबंदी के जरिए कालेधन के स्रोतों का पता लगा। लगभग तीन लाख ऐसी शेल कंपनियों का पता चला जो कालेधन में कारोबार करती थी। इनमें से लगभग दो लाख कंपनियों और उनके 1 लाख से अधिक निदेशकों की पहचान करके कार्रवाई की जा रही है।

बेनामी लेनदेन रोकथाम (संशोधन) कानून- नोटबंदी के बाद सरकार के पास बेनामी संपत्तियों के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध हो चुकी है। बेनामी लेनदेन रोकथाम (संशोधन) कानून, जिसे सालों से कांग्रेस ने लटकाये रखा था, उसे लागू करके इन संपत्तियों के खिलाफ जांच चल रही है।

फर्जी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई-  सीबीआई ने छद्म कंपनियों के माध्यम से कालेधन को सफेद करने वाले कई गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। देश में करीब तीन लाख ऐसी कंपनियां हैं, जिन्होंने अपनी आय-व्यय का कोई ब्योरा नहीं दिया है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां नेताओं और व्यापारियों के कालेधन को सफेद करने का काम करती हैं।

रियल एस्टेट कारोबार में 20,0000 रुपये से अधिक कैश में लेनदेन पर जुर्माना- रियल एस्टेट में कालेधन का निवेश सबसे अधिक होता था। पहले की सरकारें इसके बारे में जानती थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करती थी। इस कानून के लागू होते ही में रियल एस्टेट में लगने वाले कालेधन पर रोक लग गई।

राजनीतिक चंदा- राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से ज्यादा कैश में चंदा देने पर पाबंदी। इसके लिए बॉन्ड का प्रावधान।

स्रोत पर कर संग्रह- 2 लाख रुपये से अधिक के कैश लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। इससे ऊपर के लेनदेन चेक, ड्रॉफ्ट या ऑनलाइन ही हो सकते हैं।

‘आधार’ को पैन से जोड़ा- कालेधन पर लगाम लगाने के लिए ये एक बहुत ही अचूक कदम है। ये निर्णय छोटे स्तर के भ्रष्टाचारों की भी नकेल कसने में काफी कारगर साबित हो रहा है।

सब्सिडी में भ्रष्टाचार पर नकेल- गैस सब्सिडी को सीधे बैंक खाते में देकर, मोदी सरकार ने हजारों करोड़ों रुपये के घोटाले को खत्म कर दिया। इसी तरह राशन कार्ड पर मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को भी 30 जून 2017 के बाद से सीधे खाते में देकर हर साल लगभग 50 हजार करोड़ रुपये से ऊपर की बचत की जा रही है। इससे निचले स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने में कामयाबी पायी है।

ऑनलाइन सरकारी खरीद- मोदी सरकार ने सरकारी विभागों में सामानों की खरीद के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इसकी वजह से पारर्दशिता बढ़ी है और खरीद में होने वाले घोटालों में रोक लगी है।

प्राकृतिक संसाधानों की ऑनलाइन नीलामी- मोदी सरकार ने सभी प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी वजह से पारदर्शिता बढ़ी है और घोटाले रुके हैं। यूपीए सरकार के दौरान हुए कोयला, स्पेक्ट्रम नीलामी जैसे घोटालों में देश का इतना खजाना लूट लिया गया था कि देश के सात आठ शहरों के लिए बुलेट ट्रेन चलवायी जा सकती थी।

आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की जियोटैगिंग- सड़कों, शौचालयों, भवनों, या ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले सभी निर्माण की जियोटैगिंग कर दी गई है। इसकी वजह से धन के खर्च पर पूरी निगरानी रखी जा रही है।

नेताओं और कंपनियों के भ्रष्टाचार पर नकेल
प्रधानमंत्री मोदी के इन कदमों का असर यह हुआ है कि वे सभी राजनेता, व्यापारी और फर्जी कंपनियों को अपने कालेधन हिसाब देना पड़ रहा है। हिसाब नहीं देने की स्थिति में कई कंपनियों और नेताओं की संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है। अब वे दिन दूर नहीं हैं जब भ्रष्टाचारियों को सजा मिलेगी और देश में अच्छे दिन आयेगें।

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