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CAG रिपोर्ट में ‘झूठे’ केजरीवाल की खुली पोल

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दिल्ली विधानसभा के पटल पर रखी गई कैग की रिपोर्ट ने सीएम अरविंद केजरीवाल के दावे की पोल खोल दी है। रिपोर्ट में राज्य सरकार के किए गए दावे पर सवाल उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी ठेंगे पर
कैग के मुताबिक सरकार ने विज्ञापनों पर 25 करोड़ रुपये के खर्च सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर किए गए। ये विज्ञापन दिल्ली से बाहर प्रकाशित किए गए थे।

कम लागत का दावा झूठा
कैग ने केजरीवाल के इस दावे को भी झूठ पाया जिसमें दिल्ली सरकार ने कम लागत का दावा किया था। कैग की रिपोर्ट से ये साफ है कि दिल्ली सरकार के पास ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है। दरअसल केजरीवाल सरकार ने ये दावा किया था कि पिछली सरकारों में जो औषधालय 5 करोड़ में बनते थे उसे 20 लाख में ही बनवा दिए।

विज्ञापनों में भी पार्टी का प्रचार
कैग ने ऐसे विज्ञापनों की खर्च पर भी सवाल उठाया है जिसमें दिल्ली की सरकार कहने के बजाय ‘आप’ सरकार कहा गया है।

जागरूकता अभियान में लापरवाही
कैग ने डेंगू के लिए 2013-14 से 2015-16 में डेंगू पर खर्च किए गए 10 करोड़ को भी बेकार करार दिया है। कैग ने साफ कहा कि दिल्ली सरकार की लापरवाही की वजह से जागरूकता अभियान डेंगू का प्रकोप खत्म होने के बाद चलाया गया।

मौत का आंकड़ा भी गलत
कैग के मुताबिक केजरीवाल ने डेंगू से हुई मौत का आंकड़ा दिखाने में भी झूठ बोला। केजरीवाल सरकार ने अस्पतालों द्वारा भेजे गए कुल 67 हजार 5 सौ से ज्यादा मामलों को महज 22 हजार ही बताया।

बच्चों की शिक्षा पर भी बोला झूठ
स्कूलों की बेहतरी के लिए किए गए खर्च पर भी कैग ने केजरीवाल के झूठ की पोल खोली है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक कक्षा एक में 2010-11 की तुलना में 2015-16 के दौरान बच्चों का नामांकन 23 प्रतिशत गिर गया।

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