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मोदी सरकार का पराक्रम, एक साथ पांच मोर्चों पर संघर्ष, कमजोर नहीं होने दिया देश का आत्मसम्मान और भरोसा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि साहसिक और निर्णायक फैसले लेने वाले और विपरीत परिस्थितियों में भी चट्टान की तरह मजबूती के साथ डटे रहने वाले नेता की है। उन्होंने इसे कई मौकों पर साबित किया है। चाहे संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने का मामला हो या फिर पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा पर टकराव हो। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा धैर्य के साथ काम लिया और सफलता पाई। मौजूदा हालात में प्रधानमंत्री मोदी ने एक साथ पांच मोर्चा संभालकर फिर इसे साबित कर दिया है। इससे उनकी छवि और मजबूत हो गई है। उन्होंने स्वयं को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित कर लिया है, जो देश के आत्मसम्मान को कभी कम नहीं होने देगा।

प्रथम मोर्चा: कोरोना से युद्ध में सेनापति बने पीएम मोदी
इंग्लैण्ड, स्पेन, रूस, ब्राज़ील आदि अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले देशों की कोरोना-बदहाली को देखें और उसकी तुलना विश्व की दूसरी सर्वाधिक आबादी वाले देश भारत से करें तो पता चलता है कि भारत कोरोना से जंग के मामले में अभी तक पराजित नहीं हुआ है। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत की प्रशंसा करते हुए कहा है कि जिस तरह कोरोना को भारत ने नियंत्रित करके रखा है वह दुनिया के दूसरे देशों के लिए एक प्रेरणा है। इस वैश्विक संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह सेनापति की तरह नेतृत्व का परिचय दिया है, उसकी प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए दिन-रात एक कर दिया, बल्कि विश्व के विकसित, विकासशील और गरीब देशों को दवाई और खाद्य सामग्री देकर बड़ी मदद की है। इससे वैश्विक स्तर पर भारत का सम्मान बढ़ा है।

द्वितीय मोर्चा: सख्त तेवर ने चीन को पीछे हटने पर मजबूर किया
जब सारी दुनिया की तरह भारत भी कोरोना से जूझ रहा है, ऐसी स्थिति में चीन से सीमा विवाद अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। लेकिन आत्मविश्वास के धनी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने सीमा पर जोरदार सैन्य-तैनाती के द्वारा अपने इरादे जता दिए और चीन को बताया कि जब तक उसकी सेना पीछे नहीं हटती हालात सामान्य नहीं होंगे। भारत के तेवर को देखते हुए आखिरकार चीन को अपने पैर पीछे खींचने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की पहल कर चीन को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने का संकेद दे दिया है। भारत की राष्ट्रभक्त जनता ने स्थिति की गंभीरता को समझा है और प्रधानमंत्री मोदी की पहल का समर्थन करते हुए चीन को जमीनी मोर्चे पर हराने की तैयारी कर ली है। दूसरे शब्दों में कहें तो 10 जून से देश में चीन के सामान के बहिष्कार का आंदोलन शुरू हो गया, जो शातिर व्यापारी चीन को आर्थिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाएगा।  

तृतीय मोर्चा: चीन प्रेरित नेपाल का सीमा विवाद
नेपाल ने भी चीन के भड़काने पर उसकी तरह ही बेवजह भारत से शत्रुता ठान ली है और भारत नेपाल सीमा पर विवाद खड़ा कर दिया है। नेपाल की संसद ने एक संशोधन प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें भारत के कालापानी सहित तीन हिस्से को अपना हिस्सा बताकर नेपाल के नक्शे में शामिल किया है। भारत शान्ति का समर्थक है इसलिए उसने चीन की तरह ही नेपाल से भी बातचीत करके समस्या के समाधान का विकल्प तलाशा है। यद्यपि नेपाल के साथ सीमा पर सैन्य गतिरोध नहीं है किन्तु बातचीत के स्तर पर अभी गतिरोध जारी है। सदा से ही नेपाल का मददगार देश भारत कह रहा है कि अब पहले विश्वास बनाइए, फिर बात कीजिए।

तुर्थ मोर्चा: सीमा पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब 
इधर कुछ दिनों से जब से चीन और नेपाल के साथ भारत का सीमा विवाद पैदा हुआ है, सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियां बढ़ गई हैं। आतंकी हमले और सुरक्षा बलों से मुठभेड़ की खबरें बार-बार सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं इन्हीं दिनों पाकिस्तान सीमा-समझौते का भी लगातार उल्लंघन करता देखा जा रहा है और पाकिस्तानी सीमा से होने वाली गोलीबारी बढ़ गई है। यह भी दुश्मन चीन की शातिर युद्ध नीति है। नेपाल की तरह ही पाकिस्तान को भी चीन ने अपनी तरह ही इसी मौके पर भारत से उलझने के लिए उकसाया है। इन चुनौतियों के बावजदू जम्मू-कश्मीर में सीमा पर जहां पाकिस्तान की गोलीबारी का मुंतोड़ जवाब दिया जा रहा है, वहीं पहले की तरह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है, जिससे रोज आतंकी मारे जा रहे हैं। आज आतंकियों के खेमे में हताशा की स्थिति है। आतंकियों के सरगना भी मानने लगे हैं कि भारत का पलड़ा भारी है।

पांचवां मोर्चा: अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती
कोरोना संकट के दौरान जहां प्रधानमंत्री मोदी के सामने लोगों की जान बचाने की चुनौती है, वहीं लॉकडाउन के दौरान ठप पड़ी आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करना है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री मोदी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। मोदी सरकार ने कोरोना-राहत के लिए बीस लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इसके तहत जहां जरूरतमंदों को आर्थिक मदद दी गई है, वहीं अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को राहत देने की कोशिश की गई है, ताकि आर्थिक नुकसान को कम करने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों में तेजी लायी जा सके। मोदी सरकार प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जिले में ही रोजगार देने के लिए रणनीति तैयार कर रही है। मनरेगा के तहत एक लाख करोड़ रुपये का आवंटन कर गांवों में मजदूरों के रोजगार और उनके जीविका की व्यवस्था कर रही है। 

 

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