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जो चीजें आयात करने के लिए देश मजबूर है, वो भारत में ही बने, इस पर काम हो- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज, 11 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के 95 वें वार्षिक सत्र को संबोधित किया। कोलकाता में हो रहे इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत बंगाली भाषा में की। उन्होंने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में देश की नीति और रीति में भारत की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य सर्वोपरि रहा है। अब कोरोना क्राइसिस ने हमें इसकी गति और तेज करने का सबक दिया है। इसी सबक से निकला है- आत्मनिर्भर भारत अभियान। हर वो चीज, जिसे आयात करने के लिए देश मजबूर हैं, वो भारत में ही कैसे बने, भविष्य में उन्हीं प्रोडक्ट का भारत निर्यातक कैसे बने, इस दिशा में हमें और तेजी से काम करना है। हम इन छोटे-छोटे व्यापार करने वाले लोगों से केवल चीज ही नहीं खरीदते, पैसे ही नहीं देते, उनके परिश्रम को पुरुस्कृत करते हैं, मान-सम्मान बढ़ाते हैं। हमें इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि इससे उनके दिल पर कितना प्रभाव पड़ता है, वो कितना गर्व महसूस करते हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जो निर्णय हाल में हुए हैं, उन्होंने एग्रीकल्चर इकोनॉमी को बरसों की गुलामी से मुक्त कर दिया है। अब भारत के किसानों को अपने प्रोजक्ट, अपनी उपज देश में कहीं पर भी बेचने की आज़ादी मिल गई है। लोकल प्रोडक्ट के लिए जिस क्लस्टर बेस्ड अप्रोच को अब भारत में बढ़ावा दिया जा रहा है, उसमें भी सभी के लिए अवसर ही अवसर है। जिन जिलों, जिन ब्लॉक्स में जो पैदा होता है, वहीं आसपास इनसे जुड़े क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इसके साथ ही बांस और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के लिए भी क्लस्टर्स बनेंगे। सिक्किम की तरह पूरा नॉर्थ ईस्ट, ऑर्गैनिक खेती के लिए बहुत बड़ा हब बन सकता है। ऑर्गैनिक कैपिटल बन सकता है। आप सभी नॉर्थ ईस्ट, पूर्वी भारत में इतने दशकों से काम कर रहे हैं। सरकार ने जो तमाम कदम उठाए हैं, इनका बहुत बड़ा लाभ ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट के लोगों को होगा।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारे यहां कहा जाता है- मन के हारे हार, मन के जीते जीत, यानि हमारी संकल्पशक्ति, हमारी इच्छाशक्ति ही हमारा आगे का मार्ग तय करती है। जो पहले ही हार मान लेता है उसके सामने नए अवसर कम ही आते हैं। ये हमारी एकजुटता, ये एक साथ मिलकर बड़ी से बड़ी आपदा का सामना करना, ये हमारी संकल्पशक्ति, ये हमारी इच्छाशक्ति, हमारी बहुत बड़ी ताकत है, एक राष्ट्र के रूप में हमारी बहुत बड़ी ताकत है। मुसीबत की दवाई मजबूती है। यही भावना मैं आज आपके चेहरे पर देख सकता हूं, करोड़ों देशवासियों के प्रयासों में देख सकता हूं।’

सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ’95 वर्ष से निरंतर देश की सेवा करना, किसी भी संस्था या संगठन के लिए अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। ICC ने पूर्वी भारत और नॉर्थ ईस्ट के विकास में जो योगदान दिया है, विशेषकर वहां की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को, वो भी ऐतिहासिक है।’

आईसीसी के वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आईसीसी ने 1925 में अपने गठन के बाद से आज़ादी की लड़ाई को देखा है, भीषण अकाल और अन्न संकटों को देखा है और भारत की विकास का भी आप हिस्सा रहे हैं। अब इस बार की ये एजीएम एक ऐसे समय में हो रही है, जब हमारा देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कोरोना वायरस से पूरी दुनिया लड़ रही है, भारत भी लड़ रहा है लेकिन अन्य तरह के संकट भी निरंतर खड़े हो रहे हैं। कहीं बाढ़ की चुनौती, कहीं लॉकस्ट, ‘पोंगोपाल’ का कहर, कहीं ओलावृष्टि, कहीं असम में आग, कहीं छोटे-छोटे भूकंप। कभी-कभी समय भी हमें परखता है, हमारी परीक्षा लेता है। कई बार अनेक कठिनाइयां, अनेक कसौटियां एक साथ आती हैं। लेकिन हमने ये भी अनुभव किया है कि इस तरह की कसौटी में हमारा कृतित्व, उज्ज्वल भविष्य की गारंटी भी लेकर आता है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कोरोना का संकट पूरी दुनिया में बना हुआ है। पूरी दुनिया इससे लड़ रही है। कॉरोना वॉरियर्स के साथ हमारा देश इससे लड़ रहा है। लेकिन इन सबके बीच हर देशवासी अब इस संकल्प से भी भरा हुआ है कि इस आपदा को अवसर में परिवर्तित करना है, इसे हमें देश का बहुत बड़ा टर्निंग प्वाइंट भी बनाना है। ये टर्निंग प्वाइंट क्या है? आत्म निर्भर भारत, Self Reliant India। आत्मनिर्भरता का ये भाव बरसों से हर भारतीय ने एक उम्मीद की तरह जिया है। लेकिन फिर भी एक बड़ा काश, एक बड़ा काश, हर भारतीय के मन में रहा है, मस्तिष्क में रहा है।’

उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि कोलकाता भी खुद फिर से एक बहुत बड़ा लीडर बन सकता है। मैन्यूफैक्चरिंग में बंगाल की ऐतिहासिक श्रेष्ठता को हमें पुनर्जीवित करना होगा। हम हमेशा सुनते आए हैं “What Bengal thinks today, India Thinks Tomorrow” । हमें इससे प्रेरणा लेते हुए हमें आगे बढ़ना होगा। पीपुल, प्लानेट और प्रॉफिट एक दूसरे से जुड़े हैं। ये तीनों एक साथ उन्नति कर सकते हैं, आगे बढ़ सकते हैं। मैं आपको कुछ उदाहरण देकर समझाता हूं। जैसे एलईडी बल्ब। 5-6 वर्ष पहले एक एलईडी बल्ब साढ़े तीन सौ रुपए से भी ज्यादा में मिलता था। आज प्रतिवर्ष देशवासियों के करीब-करीब 19 हजार करोड़ रुपए बिजली के बिल में, एलईडी की वजह से बच रहे हैं। ये बचत गरीब को हुई है, ये बचत देश के मध्यम वर्ग को हुई है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘ भारत में एक और अभियान अभी चल रहा है- देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने का। इसमें पीपुल, प्लानेट और प्रॉफिट तीनों ही विषय एड्रैस होते हैं। विशेषकर पश्चिम बंगाल के लिए तो ये बहुत ही फायदेमंद है। इससे आपके यहां जूट का कारोबार बढ़ने की संभावना बढ़ती है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘लोक केंद्रित विकास की अप्रोच अब देश में गवर्नेंस का हिस्सा बन गई है।अब देश में बैंकिंग सर्विस का दायरा उन लोगों तक भी पहुंच पाया है, जिनको लंबे समय तक हैव नॉट की श्रेणी में रखा गया था। डीबीटी, JAM यानि जनधन आधार मोबाइल के माध्यम से बिना लीकेज करोड़ों लाभार्थियों तक जरूरी सहायता पहुंचाना संभव हुआ है।’

देखिए वीडियो-

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