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𝚈𝚎𝚊𝚛 𝙴𝚗𝚍𝚎𝚛 2023 : जी-20 की शानदार सफलता से विश्व में बजा पीएम मोदी और भारत का डंका

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सफलता को देखा जाए तो वर्ष 2023 यादगार रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कूटनीति ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिनका असर आने वाले समय में भी दिखाई देगा। बीते साल भारत की अध्यक्षता में जी-20 का सफल आयोजन हुआ। इसने दुनिया को बता दिया कि भारत वैश्विक भू-राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। साथ ही दो गुटों में बंटी दुनिया को एक साथ लेकर चल सकता है। अफ्रीकी संघ को जी-20 का हिस्सा बनाकर भारत ने संदेश दिया कि वो गरीब और विकासशील देशों का अगुवा बनकर उनके हितों की रक्षा कर सकता है। जी-20 के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह अपने कुशल नेतृत्व का परिचय दिया, उसकी सराहना पूरे विश्व में हुई।

भारतीय नेतृत्व का कमाल, बेमिसाल कूटनीति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 की अध्यक्षता को एक अवसर के रूप में देखा और शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए पूरी तकत झोंक दी। दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में  9 और 10 सितंबर, 2023 को शिखर सम्मेलन की बैठक हुई। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन,ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक,फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों,इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी समेत दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया। इन नेताओं की मौजूदगी में भारतीय नेतृत्व का कमाल, बेमिसाल कूटनीति, लाजवाब मेजबानी और भारतीयता की छाप देखने को मिली। इसे देखकर हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

पीएम मोदी के अद्भुत नेतृत्व कौशल की कायल हुई दुनिया

जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल अध्यक्षता कर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अद्भुत नेतृत्व कौशल से पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना लिया। जी-20 के दो दिवसीय सम्मलेन के व्यस्त कार्यक्रम में जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी ऊर्जा के साथ देश का नेतृत्व किया, वो कमाल का था। इससे उनके नेतृत्व कौशल की छाप भी विदेशी पटल पर और गहरी हुई है। भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं की आगवानी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भारत के गौरवशाली अतीत के एक गाइड के रूप में नजर आए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन सहित तमाम नेताओं को कोणार्क चक्र के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पहलुओं से परिचय कराया। जी-20 में रिकॉर्ड द्विपक्षीय बैठकें और कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर खुद को कभी ना थकने वाला नेता साबित करके दिखाया। उन्होंने पूरे जोश के साथ जी-20 सम्मलेन का संचालन कर बता दिया कि वो दुनिया के सबसे बड़े नेता है।

‘नई दिल्ली घोषणा पत्र’ पर आम सहमति से दुनिया हुई दंग

जब पूरी दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर दो हिस्सों में बंटी हो और आशंकाएं व्यक्त की जा रही हों, ऐसी स्थिति में सम्मेलन के आखिरी दिन तक संयुक्त घोषणा पत्र पर आम सहमित बनने पर आशंका जतायी जा रही थी। लेकिन भारत ने सभी अनुमानों को गलत साबित करते हुए सम्मेलन के पहले ही दिन ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र’ पर आम सहमति बनाकर उसकी स्वीकृति की औपचारिक घोषण कर दी। इससे पूरा विश्व दंग रह गया। कूटनीति के जानकार भी हैरान थे। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने अपनी कूटनीतिक जीत का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया।

दो गुटों में बंटी दुनिया के बीच सेतु बना भारत

पहली बार था जब जी-20 शिखर सम्मेलन में पश्चिमी देशों का दबदबा नहीं दिखा। भारत ने जी-20 सम्मेलन में रूस-यूक्रेन का मुद्दा हावी नहीं होने दिया। भारत ने सबसे पहले रूस को अपने भरोसे में लिया। भारत ने रूस को आश्वासन दिया कि उनकी बातों का खयाल रखा जाएगा। उनके हितों को कोई नुकसान नहीं होगा। रूस के रुख में बदलाव के साथ ही अपने स्टैंड पर अड़े चीन का रुख भी नरम पड़ने लगा। चीन के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों को रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाने के लिए मनाया गया। जापान और अमेरिका के अधिकारियों से इसके लिए लंबी बात हुई। उनके सामने अलग-अलग प्रस्ताव के ड्राफ्ट दिए गए। यहां तब उम्मीद की किरण दिखी, जब इन देशों ने रूस-यूक्रेन जंग के मसले पर रूस के खिलाफ कड़ा स्टैंड अपनाने की अपनी जिद छोड़ दी।

भारत की पहल से अफ्रीकन यूनियन बना जी-20 का सदस्य

अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र की एक बड़ी कुनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। उन्होंने जून 2023 में इस दिशा में पहल शुरू कर दी थी और सदस्य देशों को पत्र भेजकर अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल करने का अनुरोध किया था। यूरोपियन यूनियन की तरह अब अफ्रीकन यूनियन भी जी-20 का सदस्य बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल करने की घोषणा के बाद अफ्रीकी यूनियन के अध्यक्ष अजाली औसमानी को गले लगाया तो औसमानी काफी भावुक हो गए। बाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं खुशी से रोने ही वाला था। मुश्किल से अपनी भावनाओं पर काबू पाया। गौरतलब है कि अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल कर पीएम मोदी ने अपना वादा पूरा कर दिया। अफ्रीकन यूनियन में कुल 55 देश शामिल है। 

ग्लोबल साउथ के ली़डर के रूप में उभरा भारत

भारत ने ग्लोबल साउथ यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील एवं गरीब देशों के हितों का ध्यान रखने का मुद्दा उठाया, उसे भी स्वीकार किया गया। इसके पीछे असली बात यह है कि भारत और चीन के बीच इस बात की प्रतिद्वंद्विता चल रही है कि ग्लोबल साउथ का नेता कौन? भारत हमेशा से ग्लोबल साउथ के हितों की बात करता रहा है और विकासशील एवं गरीब देशों का समर्थक रहा है। चूंकि चीन के पास बहुत पैसा है, इसलिए वह कर्ज देकर ग्लोबल साउथ के देशों का नेतृत्व करना चाहता है। इसके कारण चीन का प्रभाव ग्लोबल साउथ में धीरे-धीरे बढ़ रहा है। लेकिन श्रीलंका के चीन के कर्ज में फंसकर दिवालिया होने के बाद अब गरीब देशों में चीन की जगह भारत पर भरोसा बढ़ने लगा है। भारत ने इस सम्मेलन में ग्लोबल साउथ के हितों का मुद्दा उठाकर चीन की विस्तारवादी नीति को करारी मात देते हुए बढ़त बना ली है।

भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा बनाने पर समझौता 

जी-20 की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने भारत से यूरोप तक जिस ट्रेड रूट को बनाने की संकल्पना पेश की, उस पर अब मुहर लग गई है। इस सम्मलेन में भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (IECC EC) स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल है। इस कॉरिडोर की अगुवाई भारत और अमेरिका साथ मिलकर करेंगे। इस समझौते के तहत कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर काम होगा। यह ट्रेड रूट भारत को यूरोप से जोड़ते हुए पश्चिम एशिया से होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर में रेलवे, शिपिंग नेटवर्क और सड़क परिवहन मार्ग शामिल होंगे। चीन के BRI प्रोजेक्ट यानी ‘बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ की तर्ज पर ही इसे एक महत्वाकांक्षी योजना माना जा रहा है।

ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस लॉन्च, पीएम मोदी की पहल की सराहना

भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 के शिखर सम्मलेन में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में भारत की ओर से एक और महत्वपूर्ण पहल का ऐलान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस लॉन्च करने की घोषणा की। उन्होंने नए अलायंस की शुरुआत करते हुए दुनिया के देशों से उससे जुड़ने का आह्वान किया। ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस दुनिया में वैकल्पिक व स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने का प्रयास है। भारत के अलावा अमेरिका और ब्राजील इस नए अलायंस के संस्थापक सदस्य हैं। ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस के लॉन्च होने के बाद तीनों संस्थापक सदस्य समेत अर्जेंटीना और इटली जैसे कुल 11 देश इससे जुड़ चुके हैं। सदस्य देशों के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी की पहल की सराहना की। वहीं जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने ‘मिशन लाइफ’ की अवधारणा के लिए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। 

भारत की अध्यक्षता में जी-20 का सबसे अधिक सफल सम्मेलन 

जी-20 के अब तक के इतिहास में भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक सबसे सफल रही। यह सम्मेलन दोगुने से अधिक कार्योन्मुखी रहा। इस शिखर सम्मेलन में 73 परिणाम दस्तावेज यानी आउटकम डॉक्यूमेंट्स तैयार किए गए, जो सदस्य देशों के विभिन्न शहरों में हुई बैठकों में बनी सहमति पर आधारित थे। इन्हें लाइन ऑफ एफर्ट दस्तावेज भी कहते हैं। इनके अलावा 39 संलग्न दस्तावेज (अध्यक्षीय दस्तावेज, कार्य समहू परिणाम दस्तावेज शामिल नहीं) के साथ कुल 112 मूल कार्य को अंतिम रूप दिया गया। 2022 में इंडोनेशिया की अध्यक्षता में हुए जी-20 सम्मेलन में कुल 50 मूल कार्य संपन्न हुए हुए थे, वहीं भारत में दोगुने से अभी अधिक मूल कार्य संपन्न हुए। 2021 में इटली की अध्यक्षता में 65, 2020 में सऊदी अरब की अध्यक्षता में 65, 2019 में जापान की अध्यक्षता में 29, 2018 में अर्जेंटीना की अध्यक्षता में 33 और 2017 में जर्मनी की अध्यक्षता में सिर्फ 22 मूल कार्य संपन्न हुए थे।

60 शहरों में 500 बैठकें, भारत ने बनाया जी20 का नया रेकॉर्ड

भारत ने जी-20 की बैठकों और प्राथमिकताओं को देश के हर हिस्से में ले जाकर एक तरीके से अध्यक्षता को नई परिभाषा दे दी, जिसे अब तक किसी मेजबान ने नहीं किया। इंडोनेशिया ने थोड़ा अलग किया था जिसमें कुछ 25 बैठकें हुई थीं, लेकिन भारत की 200 से अधिक बैठकें 60 स्थानों पर हुई हैं, जिसने आकार और पैमाने में एक नया टेम्पलेट तैयार कर दिया। मोदी सरकार ने टियर टु शहरों में भी जी20 की बैठकें आयोजित करवाईं जिससे आम जनमानस में अपने देश के प्रति गौरव का भाव बढ़ा। इससे दुनिया के सामने भारत की विविधता और विस्तार को प्रदर्शन हुआ। एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष के दौरान 125 देशों के एक लाख प्रतिनिधियों ने भारत के जादू का अनुभव किया और 1.5 करोड़ भारतीयों ने किसी न किसी रूप में कार्यक्रमों में भाग लिया।

जी-20 सम्मेलन पर भारतीयता और संस्कृति की छाप 

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने जी-20 सम्मेलन को पूरी तरह से भारतीय संस्कृति के रंग में रंग दिया। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की समृद्ध संस्कृतिक विरासत वैश्विक आयोजन के केंद्र में रहीं। इनमें कोणार्क मंदिर, नालंदा विश्वविद्यालय, नटराज की मूर्ति, ऋग्वेद की पांडुलिपियां, भीमबेटका के गुफा की तस्वीरें आदि प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में हिस्सा लेने आए राष्ट्राध्यक्षों व मेहमानों का स्वागत करने के लिए जो स्थान चुना था, इसके पीछे कोणार्क के ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के चक्र की प्रतिकृति लगी थी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को प्रतिकृति से परिचित भी कराया। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत मंडपम स्थल पर विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों और विश्व के अन्य नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल बिहार का प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय बैकग्राउंड में दिखाई दे रहा था। भारत मंडपम के सांस्कृतिक गलियारे में पाणिनी का व्याकरण ग्रंथ अष्टाध्यायी, ऋग्वेद की पांडुलिपियां, सूर्य द्वार नामक मूर्तिकला और मध्य प्रदेश के भीमबेटका गुफा चित्रों की डिजिटल तस्वीरें प्रदर्शित की गईं।

जी-20 सम्मेलन में आए मेहमानों को दिए गए खास गिफ्ट

जी-20 सम्मलेन के दौरान आए विदेशी मेहमानों को भी प्रधानमंत्री मोदी की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों की संस्कृति और विविधता दिखाने वाली चीजें बतौर गिफ्ट दी गईं। इससे देश की कला के साथ ही उत्पादों को दुनिया में पहचान मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 में शामिल हुए राष्ट्राध्यक्षों और अपने देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को स्पेशल गिफ्ट्स भेंट किए। इन गिफ्ट में कश्मीर के केसर, दार्जिलिंग चाय, अराकू कॉफी, सुंदरवन शहद, डाक टिकट, सिक्के, हस्तनिर्मित कलाकृतियों, इत्र (परफ्यूम) के साथ-साथ खादी का दुपट्टा और रेशम के स्टोल शामिल थे। ये सभी चीजें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती है। इन्हें कुशल कारीगरों के हाथों से सावधानीपूर्वक बनाया गया था। कुछ उत्पाद हमारे देश की अनूठी जैव-विविधता का परिणाम हैं।

जी-20 के सफल आयोजन की पूरी दुनिया में हुई तारीफ 

भारत में जी-20 के शिखर सम्मलेन की सफलता की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बाद संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस और संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत के प्रयासों की जमकर तारीफ की। दोनों ने कहा कि यह भारत की कूटनीतिक दक्षता का प्रमाण है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं और मेरा मानना है कि मुझे भारत की अध्यक्षता की सराहना करनी चाहिए। भारत की अध्यक्षता ने दक्षिण की आवाज को एक मंच दिया। भारत ने विकास के एजेंडे को चर्चा के केंद्र में रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। 

पीएम मोदी ने अपने आलेख में बताईं जी-20 की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 की अध्यक्षता के एक साल पूर्ण होने पर एक आलेख लिखा। उन्होंने लिखा कि हमारी अध्यक्षता के दौरान भारत ने असाधारण उपलब्धियां हासिल की, इसने बहुपक्षवाद में नई जान फूंकी, ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद की, विकास की हिमायत की और हर जगह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लड़ाई लड़ी। 2030 के एजेंडे को ध्यान में रखते हुए भारत ने सतत विकास लक्ष्य में तेजी लाने के लिए जी-20 का 2023 एक्शन प्लान पेश किया। इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, पर्यावरणीय स्थिरता सहित परस्पर जुड़े मुद्दों पर एक व्यापक एक्शन ओरिएंटेड दृष्टिकोण अपनाया गया। इस प्रगति को संचालित करने वाला एक प्रमुख क्षेत्र मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है। इस मामले में आधार, UPI और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल इनोवेशन के क्रांतिकारी प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने वाले भारत ने निर्णायक सिफारिशें दीं। G-20 के जरिए हमने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो वैश्विक तकनीकी सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। कुल 16 देशों के 50 से अधिक DPI को शामिल करने वाली यह रिपॉजिटरी, समावेशी विकास की शक्ति का लाभ उठाने के लिए ग्लोबल साउथ को DPI का निर्माण करने, उसे अपनाने और व्यापक बनाने में मदद करेगी।

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