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पीएम मोदी ने स्नेह मिलन, विलेज टूरिज्म और वाइब्रेंट बॉर्डर टूरिज्म पर फोकस करने की दी सलाह, कहा- देश की संस्कृति के प्रचार-प्रसार और एकजुटता को मिलेगा बढ़ावा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की एकता और अखंडत को मजबूत करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अनुच्छेद-370 को हटाने का साहसिक और अविश्वसनीय फैसला किया और उसे सफलता पूर्वक लागू कर दिखाया। अब प्रधानमंत्री मोदी ने विविधता में एकता के साथ ही एक भारत-श्रेष्ठ भारत के नारे को साकार रूप देने के लिए स्नेह मिलन, विलेज टूरिज्म और वाइब्रेंट बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक इन कार्यक्रमों से देश की भाषा और संस्कृति का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार हो सकेगा और एकजुटता को बढ़ावा मिलेगा।

बीजेपी की बैठक में देश की एकता पर जोर

दरअसल सोमवार (05 दिसंबर, 2022) को दिल्ली स्थित बीजेपी कार्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की अहम बैठक हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल हुए। इस दौरान पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने वाइब्रेंट बॉर्डर, विलेज टूरिज्म और स्नेह मिलन जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगम की तर्ज पर देशभर में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। इससे देश की विभिन्न भाषा और संस्कृति को एक-दूसरे के करीब आने का मौका मिलेगा।

वाइब्रेंट विलेज अभियान से सीमा पर गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

वाइब्रेंट विलेज अभियान मोदी सरकार की ओर से देश के उत्तर और उत्तरपूर्व राज्यों के सीमावर्ती गांवों को आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस करने का अभियान है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में सरकार ने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का ऐलान किया था, जिसमें सीमा पर बसे गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करने पर फोकस किया जाएगा। खासकर चीन सीमा से लगते गांवों पर सरकार का खास फोकस है। दरअसल सीमाई गांवों में हाल के वर्षों में पलायन बढ़ा है, जिससे सीमा की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है। सीमा पर बसे गांव पारंपरिक रूप से लाइन ऑफ डिफेंस के तौर पर काम करते हैं।

पदाधिकारियों से सीमाई गांवों में रात्रि विश्राम की अपील

मोदी सरकार ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन का बजट भी बढ़ा दिया है, जिससे सीमाई इलाकों में सड़कों का निर्माण तेजी से हो सके। साथ ही सरकार इन सीमाई गांवों में बिजली, पानी, नेटवर्क आदि की सुविधा देने की भी तैयारी कर रही है। उल्लेखनीय है कि चीन की सरकार ने भारत से लगती सीमा पर सैंकड़ों गांवों को बसाया है। अब भारत सरकार भी इस योजना को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री मोदी वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे गांव से संपर्क बढ़ाना चाहिए जिससे वो देश के लोगों के साथ संपर्क में रहें। एक-दूसरे की सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहें। सरकारी योजनाओं का फायदा उनको मिले, इसके लिए कार्यकर्ताओं को उनसे संपर्क करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी पदाधिकारियों को सीमावर्ती गांव में रात्रि विश्राम करने की अपील की। 

विलेज टूरिज्म से देश के ग्रामीण इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा

मोदी सरकार विलेज टूरिज्म पर भी फोकस कर रही है। इसके तहत सरकार देश के ग्रामीण इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। इससे ना सिर्फ ग्रामीण युवाओं का शहरों में पलायन रुकेगा। साथ ही शहरों पर बढ़ रहा दबाव भी कुछ हद तक कम रहेगा। यही वजह है कि केंद्र की मोदी सरकार इन दो योजनाओं पर खास फोकस कर रही है। प्रधानमंत्री ने पार्टी नेताओं को भी इस अभियान से जोड़ने की पहल की। कुछ दिनों पहले जब प्रधानमंत्री मोदी बद्रीनाथ धाम में दर्शन करने गए थे तो वो उससे सटे माना नामक गांव भी गए थे और देश के लोगों से कम से कम एक बार पर्यटक के तौर पर इस गांव में आने का आह्वान किया था। ये गांव उत्तराखंड में भारत चीन सीमा पर बसा आखिरी गांव है।

सांस्कृतिक तौर पर जोड़ने के लिए स्नेह मिलन अभियान

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के एक हिस्से को दूसरे से सांस्कृतिक तौर पर जोड़ने के लिए स्नेह मिलन अभियान चलाने की बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में चल रहे काशी तमिल संगमम नाम के एक कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि देश के कई इलाके पुराने समय से सांस्कृतिक तौर पर बेहद करीब रहे हैं लेकिन बाद में उनका नाता टूट गया। उन्होंने ऐसे पुरातन रिश्तों को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। उन्होंने सलाह दी कि बीजेपी को इसी तरह के अन्य कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए जिन्हें स्नेह मिलन कार्यक्रम का नाम दिया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु और गुजरात के कच्छ क्षेत्र का भी सैकड़ों साल पुराना रिश्ता रहा है।

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