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नीरव के करोड़ों के गहने और संपत्ति जब्त,माल्या का जल्द होगा प्रत्यर्पण,भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई में कांग्रेस और मोदी सरकार में दिखा भारी फर्क

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हर सरकार की परख उसके रवैये से ही होती है। देश में आर्थिक अपराध कर विदेश भागने वालों के खिलाफ मोदी सरकार का रवैया कांग्रेस की सरकार की तुलना में काफी सख्त है। इसका सबूत नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या के खिलाफ मोदी सरकार के प्रयासों और उसमें मिली सफलता से मिलता है। जहां नीरव मोदी और मेहुल चौकसी मामले में 1350 करोड़ रुपये के तराशे हुए हीरे, मोती, गहने जब्त कर हांगकांग की फर्मों से वापस भारत लाया गया है, वहीं पूरे देश ने देखा कि भगोड़े विजय माल्या के खिलाफ मोदी सरकार कैसा सुलूक कर रही है।

नीरव और मेहुल चौकसी के 1350 करोड़ के गहने जब्त
पीएनबी घोटाले में शामिल नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मोदी सरकार काफी सक्रिय है। दोनों के देश और विदेश स्थित संपत्ति और बैंकों में जमा रकम को जब्त किया जा रहा है। ईडी ने आज बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। ईडी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के 1350 करोड़ रुपये के तराशे हुए हीरे, मोती, गहने जब्त कर हांगकांग की फर्मों से वापस भारत लाई है। इससे पहले जून 2019 में मोदी सरकार की पहल पर स्विट्जरलैंड में नीरव मोदी से जुड़े चार बैंक खातों को सीज कर 283 करोड़ रुपये जब्त किया गया था। भारत में भी नीरव मोदी और उसके परिवार की 700 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच कर चुकी है।

इसके अलावा भी नीरव मोदी और उसके परिवार के नाम पर पूरी दुनिया में संपत्ति है जिनपर कार्रवाई होगी। आइए देखते हैं कि उसकी कौन सी संपत्तियां जब्त हो सकती हैं।

  • नीरव मोदी का मुंबई के वर्ली में समुद्र के सामने (सी फेसिंग) समुद्र महल है जो अक्सर चर्चा में रहता है। इसमें नीरव मोदी और उसकी पत्नी एमी मोदी के नाम पर कई फ्लैट हैं।
  • मुंबई के कुर्ला वेस्ट में कोहिनूर सिटी में ग्राउंड फ्लोर, तीसरा फ्लोर और चौथा फ्लोर नीरव मोदी का है, जिसकी कीमत 90 करोड़ रुपए है
  • नीरव मोदी की पेनिंसुला बिजनेस पार्क में एक कमर्शियल प्रॉपर्टी है, उसे भी सरकार जब्त कर सकती है। इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 79 करोड़ रुपए है।
  • करजात की करीब 53 एकड़ जमीन, बिल्डिंग और मशीनरी सब कुछ जब्त किया जा सकता है। इसकी कीमत करीब 70 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।
  • नीरव मोदी के पास मफतलाल सेंटर का छठा फ्लोर भी है, जिसे भी कोर्ट के आदेश पर जब्त किए जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि इसकी कीमत करीब 55 करोड़ रुपए है।
  • मुंबई के काला घोड़ा में नीरव मोदी का रिदम हाउस है। इसकी कीमत करीब 32 करोड़ रुपए है।
  • नीरव मोदी के ग्रॉसवर्नर हाउस का फ्लैट भी कोर्ट के इस आदेश के तहत जब्त हो सकते हैं। इनकी कीमत करीब 17 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

कांग्रेस सरकार ने बचाया, मोदी सरकार ने कसा शिकंजा
बोफोर्स सौदे में दलाली खाने वाले ओत्तावियो क्वात्रोची और बैंकों के कर्जदार भगोड़े विजय माल्या के मामलों में कांग्रेस और मोदी सरकार के रवैये में काफी फर्क दिखाई देता है। जहां कांग्रेस ने कदम-कदम पर बोफोर्स सौदे और उसके दलालों को बचाया, वहीं मोदी सरकार ने विजय माल्या के खिलाफ लंदन की अदालत में वर्षों तक लगातार केस लड़कर उसके प्रत्यर्पण की नौबत ला दी है। माल्या जल्द ही भारत में होगा। उसने विभिन्न बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये गबन किए हैं।

कसा शिकंजा तो रकम लौटाने को तैयार हुआ माल्या
माल्या ने पहले तो पूरी गारंटी दिए बिना बड़े कर्ज लिए और फिर उन्हें न लौटाने का मंसूबा बनाया। कर्ज न लौटाने को लेकर उसने तमाम बहाने बनाए, परंतु जब मोदी सरकार और बैंकों ने उस पर शिकंजा कसा तो वह रकम लौटाने के लिए तो तैयार हो गया, लेकिन मोदी सरकार अब माल्या को हर हाल में सलाखों के पीछे देखना चाहती है। 

कांग्रेस सरकारों की मेहरबानी से बच निकला क्वात्रोची
इसके विपरीत क्वात्रोची को कांग्रेस सरकारों ने दशकों तक बचाया। अंत में ऐसी स्थिति बना दी जिससे वह साफ बच निकला। परिणामस्वरूप 1989 में हुए आम चुनाव और उसके बाद के चुनावों में कांग्रेस बहुमत के लिए तरस गई। बोफोर्स घोटाले ने मतदाताओं के मानस को इसलिए भी अधिक झकझोरा था, क्योंकि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला था। बोफोर्स घोटाला 1987 में उजागर हुआ था। उसके बाद से ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार के बयान बदलते रहे।

कांग्रेस सरकारों ने बोफोर्स मामले को दबाने की कोशिश की
केंद्र में आईं कांग्रेसी या कांग्रेस समर्थित सरकारों ने इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की। नरसिंह राव सरकार के विदेश मंत्री माधव सिंह सोलंकी ने तो दावोस में स्विस विदेश मंत्री से यहां तक कह दिया था कि बोफोर्स केस राजनीति से प्रेरित है। इस पर देश में भारी हंगामा हुआ तो सोलंकी को इस्तीफा देना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि यदि राजीव गांधी ने बोफोर्स की दलाली के पैसे खुद नहीं लिए तब भी उनकी सरकार और अनुवर्ती कांग्रेसी सरकारों ने क्वात्रोची को बचाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर क्यों लगाया? पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने 2016 में क्यों कहा कि मैंने बोफोर्स की फाइल दबवा दी थी?

मनमोहन सरकार ने क्वात्रोची के फ्रीज खाते चालू कराए
वर्ष 2006 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने एक एएसजी बी दत्ता को लंदन भेजा था। उन्होंने लंदन के बैंक में क्वात्रोची के फ्रीज खाते चालू कराए जिसमें से उसने रकम निकाल भी ली थी। वैसे बोफोर्स दलाली मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में है। इसमें याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल की दलील है कि मामला तार्किक परिणति पर नहीं पहुंचा तो इसकी पुन: सुनवाई हो।

मोदी सरकार सजा दिलाने के लिए कटिबद्ध
इसके उलट मोदी सरकार ने माल्या पर रुख इतना सख्त किया कि वह कर्ज देने को भी तैयार हो गया। किंतु अब सरकार न केवल पूरी वसूली के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि उसे सजा दिलाने के लिए भी कटिबद्ध ताकि यह मामला दूसरे लोगों के लिए दृष्टांत बनकर उनमें डर पैदा कर सके।

मोदी सरकार भगोड़े अपराधियों को लाई भारत
मोदी सरकार एक-एक भगोड़े अपराधी को भारत लाने में लगी है। वीवीआईपी हेलिकॉप्टर अगस्ता वेस्टलैंड डील के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल सहित 11 से अधिक भगोड़े आर्थिक अपराधियों को भारत लाया जा चुका है। मोदी सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि फरवरी 2020 में दिल्ली पुलिस 20 साल बाद भगोड़े सट्टेबाज संजीव चावला को ब्रिटेन से भारत लाने में कामयाब रही। वह 2000 के फिक्सिंग स्कैंडल में शामिल था।

विदेश भागने की कोशिश में एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी
प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट कहना है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट कर भागने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को 25 मई, 2019 को विदेश भागने से पहले मुंबई एयरपोर्ट पर हवाई जहाज से नीचे उतार लिया गया। फ्लैट बेचने के नाम पर आम लोगों से कोरोड़ों-अरबों रुपये ठगने वाले शराब और रियल एस्टेट कारोबारी मनप्रीत उर्फ मॉन्टी चड्डा को 12 जून, 2019 को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। बताया गया कि मॉन्टी चड्डा फुकेट भागने की फिराक में था, लेकिन दिल्ली पुलिस की इकॉनोमिक ऑफिस विंग ने मॉन्टी चड्डा को एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया।

भ्रष्टाचार पर सख्ती के लिए बनाए गए कई कानून
मोदी सरकार ने हर बार यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो बख्शा नहीं जाएगा। सरकार हर स्तर पर देश के आर्थिक अपराधियों को कानून के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए कई सख्त कानून भी बनाए हैं, आइये डालते हैं एक नजर-
*फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स ऑर्डिनेंस
*राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण को मंजूरी
*संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा
*इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड
*अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम पर रोक विधेयक
*पीएसबी पुनर्पूंजीकरण
*एफआरडीआई विधेयक
*बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम

 

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