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कमजोर सरकार की कीमत चुका रहा इजरायल, भारत में भी कमजोर सरकार के बाद हो चुका कारगिल, आज पीएम मोदी के नेतृत्व में है मजबूत भारत!

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दुनिया के हालात को देखते हुए भारत को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है। एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है तो दूसरी तरफ इजरायल-हमास के बीच जंग छिड़ गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट, आर्थिक संकट से कराह रहे विश्व के सामने अब नई चुनौतियां आने वाली हैं। दुनिया के ताकतवर देश भी कोरोना महामारी से ऊबर नहीं पाए थे कि रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ गया और इससे उनकी हालत खराब हो गई। लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। अब फिलिस्तीनी इस्लामिक आतंकवादी संगठन हमास ने इजरायल के खिलाफ जंग छेड़ दिया है। लेकिन यह हमला क्यों हुआ। दरअसल राष्ट्रवादी नेता बेंजामिन नेतन्याहू साल 2009 से 2021 तक प्रधानमंत्री रहे और इस दौरान इजरायल काफी मजबूत रहा। इसके बाद करीब तीन साल तक अरब समर्थक पार्टियों के समर्थन से चलने वाली कमजोर सरकार वहां रही। फिर दिसंबर 2022 में नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री बने। अभी इजरायल तीन साल तक देश में कमजोर सरकार होने की कीमत चुका रहा है। इसी तरह कमजोर सरकार की कीमत भारत ने कारगिल युद्ध के रूप में चुकाई थी।

भारत ने कमजोर सरकार की कीमत कारगिल युद्ध के रूप में चुकाई
इसी तरह कमजोर सरकार की कीमत भारत ने कारगिल युद्ध के रूप में तब चुकाई थी जब में कमजोर और अस्थिर सरकार का दौर रहा। 1996 में राजनीतिक अस्थिरता का आलम ये था कि दो साल के भीतर ही तीन प्रधानमंत्री बने लेकिन फिर भी लोकसभा का कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया। बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी और यूनाइटेड फ्रंट के एचडी देवगौड़ा के बाद तीसरे प्रधानमंत्री बने थे इंद्र कुमार गुजराल। देश पर 60 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस को जब-जब जनता ने नकारा है, उसे यह नागवार गुजरा है। वह देश पर आपातकाल थोपने के साथ ही अन्य दलों की सरकार चलाने से ज्यादा सपोर्ट देने और फिर सरकार गिराने में दिलचस्पी रखती थी। 1996 में बीजेपी 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी और अटल बिहारी वाजपेयी 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने। वाजपेयी के बाद कांग्रेस के समर्थन से एचडी देवगौड़ा पीएम बने। लेकिन कुछ ही समय बाद कांग्रेस ने अचानक समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। इसके बाद इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने। लेकिन कांग्रेस ने ये सरकार भी ज्यादा दिनों तक चलने नहीं दी। करीब 11 महीनों बाद कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस ले लिया और गुजराल सरकार गिर गई। 19 मार्च 1998 तक गुजराल प्रधानमंत्री पद पर रहे। इसके बाद मई 1999 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और भारत ने कमजोर सरकार की कीमत कारगिल युद्ध के रूप में चुकाई।

कमजोर शासन से होते हैं युद्ध या आतंकवादी गतिविधियां
इसमें कोई संदेह नहीं है कि इजरायल पर फिलिस्तीनी आतंकी हमला एक खुफिया विफलता थी, वास्तव में, 50 वर्षों में सबसे बड़ी इजरायली खुफिया विफलता थी। लेकिन सोचिये ऐसा क्यों हुआ! ऐसा तब हुआ जब इजराइल में विपक्षी दलों को राष्ट्रवादी को उखाड़ फेंकने का मौका मिल गया। इजरायल में अरब लीग के साथ गठबंधन सरकार ने तीन वर्षों तक शासन किया। यह एक तथ्य है कि कमजोर शासन के दौर के बाद युद्ध या आतंकवादी गतिविधियां शुरू होती हैं। ऐसे में देशवासियों के लिए गौरव की बात है आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित हाथों में है। यही वजह है कि पीएम मोदी देशभर में इतने लोकप्रिय हैं।

भारत के भीतर और बाहर सैकड़ों गाजा पट्टी, इसलिए मजबूत सरकार की दरकार
भारत में मजबूत सरकार इसलिए भी जरूरी है कि आज भारत के भीतर और बाहर सैकड़ों गाजा पट्टी मौजूद है। जो भारत पर इजरायल जैसा हमला कर सकते हैं। पाकिस्तान तो इस ताक में लगा ही रहता है कि कब मौका मिले और भारत पर हमला किया जा सके। पाकिस्तान ने हमास जैसे सैकड़ों आतंकवादी संगठन पाल रखे हैं। इसके साथ ही अपने देश में आतंकवादी संगठनों की कमी नहीं है। और जब-जब इन पर प्रतिबंध लगाया जाता है ये नाम बदल लेते हैं। सिमी पर प्रतिबंध लगा, इंडियन मुजाहिदीन हो गया, इंडियन मुजाहिदीन पर प्रतिबंध लगा पीएफआई बन गया, फिर इसे भी मोदी सरकार ने बैन किया। पीएफआई संगठन की कई और शाखाएं हैं जिनमें राष्ट्रीय महिला मोर्चा (NWF) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) प्रमुख हैं। 20 से अधिक राज्यों में इसकी शाखाएं चल रही थी। सीएए और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन में इस संगठन का हाथ था। इस संगठन के खिलाफ 1400 से ज्यादा मामले दर्ज थे। इनका मकसद आतंकवादी हमला करना और टेरर फंडिंग से लेकर लोगों के बीच नफरत फैलाना था।

भारत में अब तक 55 संगठनों पर लग चुका बैन
गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर अब तर 13 संगठनों पर सरकार बैन लगा चुकी है। इन संगठनों पर 1967 के गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत कार्रवाई होती है। इसके अलावा अब तक 42 आतंकवादी संगठनों पर सरकार गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगा चुकी है।

PFI सहित भारत में प्रतिबंधित 13 संगठन
गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त रहे प्रतिबंधित 13 संगठनों में सबसे चर्चित नाम सिमी का है। इसके साथ ही उत्तर पूर्व और कश्मीर में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे कई संगठन इस लिस्ट में शामिल हैं।

भारत में प्रतिबंधित 13 संगठन
1. स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)
2. यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA)
3. नेशनल डेमोक्रेटिक्स फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB)
4. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)
5. ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्सेज (ATTF)
6. नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT)
7. हायरुइउट्रेप नेशनल लिबरेशलन काउंसिल (HNLC)
8. लिबरेशन टाइर्ग्स ऑफ तमिल एलम
9. नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (Khaplang)
10. इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF)
11. जमात-ए-इस्लामी (JeI), जम्मू कश्मीर
12. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (मोहम्मद यासीन मलिक)
13. सिख फॉर जस्टिस (SFJ)

भारत में 42 प्रतिबंधित आतंकी संगठन
1. बब्बर खालसा इंटरनेशनल
2. खालिस्तान कमांड फोर्स
3. खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स
4. इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन
5. लश्कर-ए-तैयबा/पासबन-ए-अहले हदीस
6. जैश-ए-मोहम्मद / तहरीक-ए-फुरकान
7. हरकत-उल-मुजाहिदीन/ हरकत-उल-अंसार
8. हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन
9. अल-उमर अल-मुजाहिदीन
10. जम्मू एंड कश्मीर इस्लामिक फ्रंट
11. यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा)
12. नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी)
13. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए)
14. यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ)
15. पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कंगलीपाक (PREPAK)
16. कंगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी)
17. कंगलेई याओल कानबा लुप
18. मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (एमपीएलएफ)
19. ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स
20. नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा
21. लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (LTTE)
22. स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया
23. दीनदर अंजुमन
24. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनिस्ट)
25. माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी)
26. अल बद्र
27. जमीयत-उल-मुजाहिदीन
28. अल-कायदा
29. दुख्तारन-ए-मिल्लत (डीईएम)
30. तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी (TNLA)
31. तमिल नेशनल रिट्रीवल ट्रूप्स (TNRT)
32. अखिल भारत नेपाली एकता समाज (ABNES)
33. यूएन प्रिवेंशन एंड सप्रेशन ऑफ टेररिज्म की सूची में दर्ज सभी संगठन
34. इंडियन मुजाहिद्दीन
35. गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी (GNLA)और इससे जुड़े सारे संगठन।
36. कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन और इससे जुड़े सारे संगठन।
37. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (Maoist) और इससे जुड़े सारे संगठन।
38. इस्लामिक स्टेट, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक, लिवेंट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक, सीरिया, दैश और इससे जुड़े सभी संगठन
39. नेशनल सोसालिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (Khaplang) NSCN (K) और इससे जुड़े सारे संगठन
40. द खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) और इससे जुड़े सारे संगठन
41. तहरीक-ए-मुजाहिद्दीन (TuM) और इससे जुड़े सारे संगठन
42. जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश, जमात-उल-मुजाहिद्दीन भारत, जमात-उल-मुजाहिद्दीन हिंदुस्तान और इससे जुड़े सारे संगठन

जम्मू-कश्मीर में जारी है आतंकवादियों का सफाया, 200 आतंकवादी ढेर
कांग्रेस की सरकारें मुस्लिम तुष्टिकरण में आतंकवादियों पर जहां कार्रवाई नहीं करती थी वहीं मोदी सरकार ने आतंकवादी संगठनों की कमर तोड़ने का काम किया है। भारतीय सेना के साथ संयुक्त अभियान में CRPF ने इस वर्ष 5 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में 27 आतंकवादियों को मार गिराया है। सीआरपीएफ ने यह जानकारी दी है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मारे गए आतंकवादियों में आठ स्थानीय और 19 विदेशी आतंकवादी शामिल हैं। सुरक्षाबलों ने साल 2022 में घाटी में कुल 187 आतंकवादियों को मार गिराया था। पिछले वर्षों की तुलना में कश्मीर में घुसपैठ करने वाले विदेशी आतंकवादियों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

नक्सलियों के खिलाफ अंतिम प्रहार की तैयारी में जुटी सरकार
बिहार, झारखंड और मध्यप्रदेश में नक्सलियों के सफाए के बाद केंद्र सरकार अब छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में सिमटे नक्सलियों के खिलाफ अंतिम प्रहार की तैयारी में जुट गई है और जल्द ही देश की दशकों पुराने नक्सलवाद से मुक्ति मिल जाएगी। आतंकवाद पर काफी हद तक लगाम लगाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इसके पूरे ईकोसिस्टम को सख्ती से कुचलने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई आतंकी संगठन खड़ा ही न हो पाए, इसके लिए सभी आतंकरोधी एजेंसियों को सख्त रुख अपनाना होगा। उन्होंने एनआइए, एटीएस और एसटीएफ जैसी एजेंसियों को आतंकी घटनाओं की जांच के दायरे से निकलकर आतंकवाद को जड़मूल से खत्म करने पर काम करने की सलाह दी।

आतंकी घटनाओं में कमी, 2001 में 6 हजार, 2022 में 900 आतंकी घटनाएं हुई
मोदी सरकार ने हमेशा आतंकवाद को लेकर जीरो टालरेंस की नीति अपनाई है और उसका ही नतीजा है कि आज आतंकी घटनाओं में भारी कमी आई है। वर्ष 2001 में आतंकी घटनाओं की संख्या छह हजार थी जो 2022 में घटकर 900 रह गई हैं। पिछले नौ वर्षों में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में जम्मू-कश्मीर ने विकास और शांति की एक नई सुबह देखी है। अगर जून 2004 से मई 2014 तक कांग्रेस सरकार और मोदी सरकार के जून 2014 से अगस्त 2023 के बीच हुईं आतंकी घटनाओं के तुलनात्मक आंकड़े को देखें तो मोदी सरकार के दौरान आतंकी घटनाओं में 70 प्रतिशत, इनमें नागरिकों की मृत्यु में 81 प्रतिशत और सुरक्षा बलों के जवानों की मृत्यु में 48 प्रतिशत की कमी आई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा था कि अब आतंकवाद के पूरे ईकोसिस्टम को खत्म करने का समय आ गया है और एजेंसियों को इसके लिए रणनीति पर काम करना चाहिए।

भारत पर इस्लामिक आतंकवाद का खतरा बरकरार
पाकिस्तान से भेजे गए आतंकवादी तो भारत में घुसपैठ करते ही रहते हैं लेकिन देश में भी कुछ ऐसे तत्व हैं जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। अभी हाल ही में आईएसआईएस के आतंकियों को पकड़ा गया है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी ये ब्रेनवाश होकर आतंक की राह पर निकल पड़े। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इन आतंकियों की हिजरत के बहाने अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान जाने की योजना थी। पाकिस्तान जाकर यह लोग अपने आकाओं से मिलकर वापस भारत लौटते। हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहने वाला शाहनवाज कट्टरपंथ की ओर बढ़ गया। दिल्ली में ही उसकी रिजवान अली से मुलाकात हुई। वह पहले से ही आईएस की विचारधारा से प्रभावित था। धीरे-धीरे दोनों पाक में बैठे हैंडलर के संपर्क में आए। इन लोगों से भारत में नेटवर्क खड़ा करने के लिए कहा गया। पुलिस की पूछताछ में शाहनवाज ने खुलासा किया है कि वह हिजरत करने अफगानिस्तान जाना चाहता था। वहां से पाकिस्तान जाना आसान है। पाकिस्तान जाकर यह लोग अपने आकाओं से मिलकर वापस भारत लौटते। शाहनवाज, रिजवान अली और रिजवान अशरफ पाकिस्तान में बैठे एक ही हैंडलर से बैथ (शपथ) लिए थे। शाहनवाज ने रिजवान अली के साथ मिलकर दिल्ली के जैतपुर स्थित जंगलों में हल्के धमाके कर आईईडी का परीक्षण भी किया। इसके अलावा राजस्थान और उत्तराखंड के हल्द्वानी में भी धमाके के परीक्षण किए गए। इन सभी के वीडियो बनाकर पाक में बैठे आकाओं को भेज दिया जाता था।

ISIS से कम खूंखार नहीं है हमास की अल कासिम ब्रिगेड
हमास के खूंखार अल कासिम ब्रिगेड ने इजरायल पर हमला किया है। यह हमला इतना तेज और सटीक था कि इजरायल की पूरी डिफेंस लाइन तितर-बितर हो गई। अल कासिम ब्रिगेड हमास की सबसे खूंखार मिलिट्री यूनिट है। इस यूनिट में शामिल आतंकवादियों की तुलना आईएसआईएस की क्रूरता से की जाती है। अल कासिम ब्रिगेड फिलिस्तीनी संगठन हमास की सैन्य शाखा है। मोहम्मद डेफ अल कासिम ब्रिगेड का प्रमुख है। यह गाजा पट्टी के भीतर संचालित होने वाला सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा हथियारबंद आतंकवादी समूह है।

कश्मीर में पत्थरबाजी फिलिस्तीन से ही आई
फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास शुरुआत में इजरायल के विररुद्ध ठीक उसी प्रकार की पत्थरबाजी की घटनाओं का अंजाम देता था जिस तरह कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने से पहले आए दिन दिखते हैं। दरअसल पाकिस्तान पूरी दुनिया में आतंकवाद का ठेकेदार है। कहा जाता है कि ईरान के साथ ही पाकिस्तान ने भी हमास को सैन्य ट्रेनिंग दी है। पाकिस्तान हमास से पत्थरबाजी का आइडिया लेकर कश्मीर में अलगाववादियों के हाथ में थमा दिया। पत्थरबाजी के बाद वे सशस्त्र हिंसा में उतर आते हैं। दरअसल यह इस्लामिक आतंकवाद का ही रूप है जिससे भारत पहले ही जूझता रहा है और अब यह यूरोप में पहुंच चुका है।

‘अल्लाह हू अकबर’ के नाम पर हमास ने 700 से अधिक जान ले ली
इजरायल पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले में अब तक 700 से अधिक मौतों की पुष्टि हो चुकी है। 2200 से अधिक लोग घायल हैं। करीब 100 लोगों को हमास ने बंधक बना रखा है। और यह सब हो रहा है ‘अल्लाह हू अकबर’ के नाम पर। इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर अचानक से हमला कर बर्बरता की हदें पार कर दी। हमास के आतंकी दक्षिणी इजरायल में सीमा पार कर घुसे थे और कई लोगों को बंधक बना लिया था। वे लोगों को बंधक बनाने के बाद ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाते देखे गए।

‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे के साथ महिला की शव का परेड निकाला
इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने चौतरफा हमला बोला। जमीन, आसमान, पानी के रास्ते वो इजरायल में घुसे और लोगों को गाजर-मूली की तरह काट डाला। बहुत सारे लोगों को बंधक बनाकर हमास के आतंकी गाजा पट्टी ले गए, तो कई लोगों को गोलियों से भून डाला। इस दौरान उन्होंने करीब 30 साल की महिला को मार डाला और उसके शव का परेड निकाला। परेड के दौरान हमास के आतंकी ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगा रहे थे। जबकि मरने वाली महज एक टूरिस्ट थी और वो निहत्थी थी। मृतक का नाम शानी लौक था। शानी एक टैटू आर्टिस्ट और हेयर आर्टिस्ट थी। वो एक म्यूजिक फेस्टिवल में हिस्सा लेने जर्मनी से इजरायल आई हुई थीं। वो यहूदियों के लिए काम करने वाले एक एनजीओ VEAHAVTA से भी जुड़ी थीं।

पाकिस्तान आर्मी चीफ ने किया था ईरान दौरा, इजरायल पर हमले की हुई थी प्लानिंग
दुनिया में कहीं आतंकवाद हो और पाकिस्तान का नाम न आए ये तो हो ही नहीं सकता। विश्व में आतंकवाद का सबसे बड़ा विशेषज्ञ पाकिस्तान ही है। हमास ने जिस तरह से 5 हजार राकेटों से हमला किया, समुद्र के रास्ते, जमीनी रास्ते से लेकर हवाई हमले इजरायल पर किया। यह कोई अचानक नहीं हुआ, यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है जिसकी प्लानिंग काफी लंबे समय से की जा रही थी। इसकी प्लानिंग के लिए पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर जुलाई 2023 में अचानक ईरान के दौरे पर पहुंच गए। पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख ने ईरान की शक्तिशाली सेना IRGC के चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी से मुलाकात की है।


कांग्रेस की सरकार होती तो जिहादी भीड़ सड़कों पर निकल आती
कांग्रेस ने देश में इस कदर मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया कि अगर अभी देश में कांग्रेस की सरकार होती तो अब तक कई शहरों में जिहादी भीड़ ग़ाज़ा पट्टी के समर्थन में धरना-प्रदर्शन कर रही होती और काफ़ी सरकारी संपत्तियों को जला चुकी होती। अभी केवल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली निकलने की बात आई है। याद कीजिए 11 अगस्त 2012 को जब केंद्र में भी कांग्रेस महाराष्ट्र में भी कांग्रेस और इसी गाजा पट्टी के समर्थन में रजा अकादमी के आह्वान पर 5 लाख मुसलमानों की जिहादी भीड़ आजाद मैदान में इकट्ठा हुई थी और पूरे मुंबई को तहस-नहस बर्बाद कर दिया था। मीडिया के दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दी गई थी।

देशहित से ऊपर धर्म को रखने वाले मानवता के शत्रु
धर्म के नाम पर फिलिस्तीन से एकता दिखाने वाले आज भारत के जो भी मुसलमान हैं उन्हें न तो देशहित से मतलब है और न ही मानवता से। इन लोगों का एक ही एजेंडा है- कहीं का मुस्लिम हो, कितना भी बर्बर कृत्य करे, उसका समर्थन करो। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने उम्माह के लिए हमास के समर्थन में रैली निकाली है। इससे इनकी जिहादी मानसिकता समझी जा सकती है। आम महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों से बर्बरता करने वालों के इसी समर्थक जमात को भारत के लिबरल-सेकुलर ‘पीड़ित’ बताते हैं। ये असल में मानवता के शत्रु हैं।

पीएम मोदी के नेतृत्व में समृद्ध और शक्तिशाली भारत का उदय
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नौ वर्षों के कार्यकाल में सेवा, सुशासन और राष्ट्रसेवा को समर्पित विकास की नई गाथा लिखी है। उनके नेतृत्व में वैभवशाली, गौरवशाली, संपन्न, समृद्ध और शक्तिशाली भारत का उदय हो रहा है। कांग्रेस के जमाने में जहां छोटे-छोटे देश भी भारत को आंखें दिखाते थे, वहीं अब हालात बदल रहे हैं और दुनिया भर के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री को अपने देश में आमंत्रित कर रहे हैं। हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को एक “शक्तिशाली देश” बताया। उन्होंने कहा कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और मजबूत हो रहा है। व्लादिमीर पुतिन ने कहा, “…भारत की 1.5 अरब से अधिक आबादी, सात प्रतिशत से अधिक आर्थिक विकास दर…यह एक शक्तिशाली देश है। और यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में और अधिक मजबूत हो रहा है।”

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