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गोंडा की महिलाओं ने पेश की उद्यमशीलता की मिसाल, एसएचजी की दीदियों से पीएम मोदी करेंगे संवाद

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उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के कमालपुर गांव की धनधरा स्वयं सहायता समूह की दीदियां लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। दीदियों ने कोरोना संक्रमण और लॉकडाऊन के बीच जीविका के लिए महज 50 हजार की पूंजी को 30 लाख तक पहुंचाकर मिसाल कायम की है। इन महिलाओं की मेहनत और लगन से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी काफी प्रभावित है। 26 जून को प्रधानमंत्री मोदी ‘गरीब कल्याण योजना’ के तहत जब प्रदेश के कामगारों से वर्चुअल संवाद स्थापित करेंगे तो इन महिलाओं से भी बातचीत करेंगे।

कोरोना महामारी के दौरान महिलाओं ने बनाई बड़ी पूंजी
दिसंबर 2018 में गठित इस समूह की महिलाओं को मिशन से महज 15 हजार रुपए रिवाल्विंग फंड के मिले थे। कोरोना संक्रमण की दस्तक के बीच फरवरी में इन्होंने अपनी उद्यमशीलता से गांव में 30 हजार रुपए सालाना के किराए पर कुछ जमीन ली। 35 हजार रुपए का प्रबंध जैसे-तैसे कर 50 हजार की पूंजी से नर्सरी का काम शुरू किया। आज इनकी नर्सरी में जो पौधे तैयार हैं उनकी कीमत करीब 30 लाख रुपए आंकी गई है। इन सारे पौधों को मनरेगा के तहत खरीदने की योजना बन गई है।

महिलाओं की उद्यमशीलता ने किया प्रभावित
प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम तय होने पर उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक सुजीत कुमार ने मंगलवार को कमालपुर जाकर महिलाओं के काम को देखा। निदेशक इनके काम से इतने प्रभावित हुए कि ब्लॉक हलधरमऊ में प्रेरणा कैंटीन का काम इस समूह को देने का फैसला कर लिया। स्कूल ड्रेस सिलाई का काम भी इस समूह को दिया जाएगा।

राज्य के अन्य हिस्सों में भी जाएगा नर्सरी का काम
निदेशक सुजीत कुमार के मुताबिक पौधों के बिकने पर महिलाओं को करीब 3.5 लाख रुपए का शुद्ध लाभ होगा। समूह को स्कूल ड्रेस सिलाई का काम भी देने का फैसला किया गया है। समूह की महिलाएं मछली उत्पादन का काम भी करती हैं। प्रति सदस्य की आमदनी वर्तमान में करीब 10 हजार रुपए महीने की है। नर्सरी का काम बहुत ही फायदे का है। नर्सरी का काम शुरू करने के लिए अन्य जिलों में भी शुरू कराया जाएगा। इसके लिए समूहों की महिलाओं को प्रेरित किया जाएगा।

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