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पीएम मोदी के नेतृत्व में इकोनॉमी के मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी: तीसरी तिमाही में GDP 8.4 फीसदी, दुनिया में सबसे तेज गति से तरक्की कर रहा देश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था ऊंची उड़ान भर रही है। दुनिया भर में कोरोना को लेकर जहां हाहाकार मचा है वहीं देश की इकोनॉमी की तेज रफ्तार बड़े-बड़े देशों को भी हैरान कर रही है ये पीएम मोदी की नीतियों का ही नतीजा है कि जीडीपी दिग्गजों के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 8.4 फीसदी पर जा पहुंची है। इस बार देश ने ऐसी छलांग लगाई है की जीडीपी कोविड के पहले के आंकड़ों को पार कर गई है। साल 2019 में  देश की अर्थव्यवस्था 35.61 लाख करोड़ थी, लेकिन कोरोना काल की तमाम तकलीफों को पार करते हुए देश की इकोनॉमी ने दम दिखाया है। अब अर्थव्यवस्था 35.73 लाख करोड़ पहुंच चुकी है। साफ है की पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में देश कोरोना काल की मुश्किलों से बाहर निकलता दिख रहा है।

दुनियाभर में सबसे तेज गति से बढ़ रही इकोनॉमी

2021-22 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच दर्ज की गई ये विकास दर उम्मीद से बेहतर है। अगर दुनिया के देशों से तुलना करें तो 

  • भारत की विकास दर 8.4 फीसदी 
  • तुर्की की विकास दर 6.9 फीसदी 
  • चीन की विकास दर 4.9 फीसदी 
  • अमेरिका की विकास दर 4.9 फीसदी
  • जापान की विकास दर 1.4 फीसदी 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों इकोनॉमी में नई जान फूंकने में कामयाब रही हैं, अगर 2021-22 के तीनों तिमाही पर नजर डालें तो देश के विकास के आंकड़े मोदी सरकार की कामयाबी की नई कहानी कह रहे हैं। तीनों तिमाही में जीडीपी के आंकड़े देश के कारोबार जगत में नया जोश फूंक रहे हैं। 

  • जनवरी से मार्च- 1.6 %
  • अप्रैल से जून-20.8 %
  • जुलाई से सितंबर-8.4 %

नए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में प्राइवेट फाइनल कंजंप्शन एक्सपेंडिचर 19.48 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो पिछली तीमाही में 17.83 लाख करोड़ रुपये था। अगर ग्रोथ को सेक्टर के हिसाब से देखा जाए तो

  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 5.5 फीसदी
  • निर्माण गतिविधियों में 7.5 फीसदी
  • एग्रिकल्चर सेक्टर में ग्रोथ 4.5 फीसदी
  • माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ 15.4 फीसदी

तीसरी तिमाही में माइनिंग सेक्टर में विकास की रफ्तार सबसे तेज रही है, इस सेक्टर में 15.4 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। मोदी सरकार की कोशिशों से एग्रीकल्चर सेक्टर में 4.5% की ग्रोथ रही, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। देश के कृषि क्षेत्र में ऊंची वृद्धि की वजह से ग्रामीण इलाकों में लोगों की खरीददारी की क्षमता बढ़ी है। जिसका लाभ देश की इकोनॉमी को मिल रहा है। 

कोरोना काल में 24.4 फीसदी की दर से गिरी थी इकोनॉमी

कोरोना काल में देश की इकोनॉमी 24.4 फीसदी की रफ्तार से गिरी थी।कोरोना महामारी ने जिस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर डाला था, उसमें कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी शामिल था। 50.3% गिरावट के साथ ये सेक्टर 1.30 लाख करोड़ तक सिमट गया था। अब इसमें सुधार दर्ज किया गया है। कोविड से पहले के स्तर के मुकाबले अब ये महज 660 करोड़ रुपए पीछे रह गया है। वैक्सीनेशन की तेज रफ्तार से कोरोबार जगत में लौटा भरोसा, देश भर में टीकाकरण में तीन गुना उछाल आया है। जो अक्टूबर के अंत तक बढ़कर 89.02 करोड़ पर पहुंच गया। जून के अंत तक यह आंकड़ा 33.57 करोड़ था।

रेटिंग एजेंसियों के अनुमान से आगे निकली इकोनॉमी 

इकोनॉमी के बड़े-बड़े दिग्गजों के अनुमान को भी इस तीमाही में देश की जीडीपी पार कर गई है। इंडिया रेटिंग्स ने अनुमान लगाया था कि देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 9.4 प्रतिशत रहेगी। लेकिन जीडीपी इंडिया रेटिंग्स के अनुमान से ज्यादा रही है। 

 

मोदी सरकार के प्रयास से अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार

इससे पहले जीएसटी कलेक्शन के आंकड़ों ने देश की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लौटने का संकेत दिया था। सितंबर के महीने में 1.17 लाख करोड़ रूपये से अधिक जीएसटी का संग्रह हुआ। मोदी सरकार के प्रयासों से जीएसटी कलेक्शन की रफ्तार बरकरार है। देश की अर्थव्यवस्था को कोरोना महामारी के असर से बाहर निकालने और विकास को तेज रफ्तार देने के लिए मोदी सरकार ने कई अहम फैसले लिए थे। 

महामारी की दूसरी लहर के बाद उपभोक्ता मांग पटरी पर लौटी

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद उपभोक्ता मांग पटरी पर लौट रही है। देश भर में रिटेल स्टोर्स की बिक्री पर नजर डालें तो पिछले साथ सितंबर महीने के मुकाबले इस साल उपभोक्ता मांग में जोरदार इजाफा हुआ है।  

• सितंबर 2021 में इजाफा-46 फीसदी
• सितंबर 2020 में इजाफा-6 फीसदी

देश के 75 लाख रिटेल स्टोर्स को सेल्स ऑटोमेशन सुविधा मुहैया कराने वाली फर्म बिजोम की ताजा रिपोर्ट के आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि कोरोना महामारी के बाद देश की इकोनॉमी तेजी से रफ्तार पकड़ रही है। मोदी सरकार के वक्त पर बाजार खोलने के फैसले से कोरोबार जगत में रौनक लौट रही है। जानकारों का कहना है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक ना दी तो कारोबार को लेकर मोदी सरकार के फैसलों का असर और तेजी से सामने आएगा और देश की इकोनॉमी 2022-2023 तक कोरोना के नकारात्मक प्रभावों से निकल जाएगी।

अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार के फैसलों का बड़ा असर

मोदी सरकार भी देश की अर्थव्यवस्था को कोरोना के असर से बाहर निकालने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रही है 

• चालू वित्त वर्ष में सरकार राजकोषीय घाटे को GDP का 6.8 फीसदी रखना चाहती है।
• जानकारों का कहना है कि इस टारगेट को आसानी से हासिल किया जा सकता है
• पिछले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 9.5 प्रतिशत रहा था।

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