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मोदी सरकार की बड़ी पहल, एमएसपी पर समिति के लिए संयुक्त किसान मोर्चा से मांगे पांच नाम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के मुताबिक संसद के दोनों सदन में तीन कृषि कानूनों को रद्द करने वाला विधेयक पारित हो गया है। इसके बाद मोदी सरकार ने किसानों के हित में एक और बड़ी पहल की है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए समिति गठित करने को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा से पांच लोगों का नाम मांगा है। सरकार की ओर से की गई इस पहल के बाद पंजाब के 32 किसान संगठन अपनी तरफ से दो नाम का सुझाव दे सकते हैं। किसान नेता दर्शन पाल ने सरकार के नाम मांगने के बाद बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा 4 दिसंबर की बैठक में नामों को तय करेगा।

गौरतलब है कि 19 नवंबर, 2021 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने एमएसपी से जुड़े मुद्दों पर एक समिति बनाने की भी घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि शून्य बजट आधारित कृषि को बढ़ावा देने, देश की बदलती जरूरतों के अनुसार खेती के तौर-तरीकों को बदलने और एमएसपी को अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति गठित की जाएगी। इस समिति में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, किसानों के प्रतिनिधियों के साथ साथ कृषि वैज्ञानिक और कृषि अर्थशास्त्री भी शामिल होंगे।

 एमएसपी को लेकर मोदी सरकार के अभूतपूर्व कदम

  • मोदी सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू कर उत्पादन लागत पर एमएसपी को बढ़ाकर 1.5 गुना किया।
  • 2021-22 के लिए धान सहित कई खरीफ फसलों के एमएसपी में औसतन 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई।
  • पहली बार मोदी सरकार ने एमएसपी पर उपज खरीद के पैसे को सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजना शुरू किया।
  • रबी मार्केटिंग सीजन 2021-22 में 50 लाख से अधिक किसानों के खाते में सीधे एमएसपी पर गेहूं खरीद का पैसा पहुंचा।
  • बीते 6 वर्षों में एमएसपी पर गेहूं खरीद का लाभ पाने वाले किसानों की संख्या में 240 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • खरीफ मार्केटिंग सीजन 2021-22 में 1.28 करोड़ से अधिक किसानों को एमएसपी पर धान खरीद का लाभ मिला।
  • बीते 6 वर्षों में एमएसपी पर धान खरीद का लाभ पाने वाले किसानों की संख्या में 175 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • मोदी सरकार ने यूपीए सरकार की तुलना में एमएसपी पर खरीद में करीब दोगुना खर्च किया है।
  • मोदी सरकार में दलहन और तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में रिकॉर्ड 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई।

23 फसलों के लिए एमएसपी का निर्धारण

सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश पर साल में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में एमएसपी की घोषणा करती है। गन्ने का समर्थन मूल्य गन्ना आयोग तय करता है। खेती की लागत के अलावा कई दूसरे फैक्टर्स के आधार पर सीएसीपी द्वारा फसलों के लिए एमएसपी का निर्धारण होता है। फिलहाल 23 फसलों के लिए सरकार एमएसपी तय करती है। इनमें अनाज की 7, दलहन की 5, तिलहन की 7 और 4 कमर्शियल फसलों को शामिल किया गया है। वर्ष 1965 में ग्रीन रिवॉल्यूशन के समय एमएसपी को घोषणा हुई थी। साल 1966-67 में गेहूं की खरीद के समय इसकी शुरुआत हुई।

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