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17 साल बाद मोदी राज में पूरा हुआ अटल बिहारी वाजपेयी का सपना, 85 साल बाद फिर कोसी रेल पुल पर दौड़ी ट्रेन

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बिहार के लोगों खासकर मिथलांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए खुशखबरी है। मोदी सरकार के प्रयासों से उनका 85 साल पुराना सपना जल्द साकार होने जा रहा है। सुपौल जिले के सरायगढ़ स्थित कोसी पुल पर मंगलवार को 85 साल बाद पहली बार निरीक्षण ट्रेन दौड़ी। इससे कोसी पुल पर ट्रेन परिचालन जल्द शुरू होने की संभावना बन गई है। वर्ष 1934 में आए भूकंप में कोसी नदी पर बना रेल पुल क्षतिग्रस्त होने से संपर्क टूट गया था। 

मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने कार्यों का लिया जायजा
निरीक्षण ट्रेन में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण ब्रजेश कुमार, चीफ इंजीनियर ए. के. राय और डिप्टी चीफ इंजीनियर डी. एस. श्रीवास्तव थे। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने ट्रेन से किए गए आमान परिवर्तन कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण ट्रेन ने आसनपुर कुपहा से सरायगढ़ की 13 किमी की दूरी करीब 25 मिनट में पूरी की। हालांकि सहरसा से स्पेशल ट्रेन से जाने के दौरान सीएओ सरायगढ़ से आसनपुर कुपहा तक रुकते हुए निरीक्षण करते गए।

मोदी सरकार ने दिए थे काम जल्द पूरा करने के निर्देश
कुछ दिन पहले रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि जोनल रेलवे को काम तेजी से पूरा करने के लिए कहा गया है और अधिकारियों ने कहा कि यह पुल कमोबेश पूरा हो गया है क्योंकि यह पूर्व मध्य रेलवे की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है। 

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने रखी थी नींव
कोसी नदी पर बना रेल पुल क्षतिग्रस्त होने से उत्तर और पूर्वी बिहार के बीच का रेल संपर्क टूट गया था। बाद के दिनों में दोनों इलाकों के बीच रेल संपर्क कायम तो हुआ, लेकिन कोसी नदी पर पुल निर्माण का कार्य अटका ही रहा। इस कारण दरभंगा और मधुबनी को सीधे सुपौल व सहरसा से जोड़ने वाला मार्ग बंद था। वर्ष 2003 में 6 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस दिशा में पहल की और कोसी नदी पर रेल पुल की नींव रखी गई।

कोसी रेल पुल पर ट्रेन दौड़ने से लोगों में खुशी
कुछ दिनों के बाद कोसी रेल पुल से आम लोगों के लिए ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। सुपौल जिले के सरायगढ़ स्थित कोसी पुल होकर आसनपुर कुपहा तक ट्रेन चलना कोसीवासियों, मिथिलांचल वासियों और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था। करीब 1.88  किलोमीटर लंबे इस पुल पर निरीक्षण ट्रेन के परिचालन से लोगों की उम्मीदें जाग उठी हैं। कोसी नदी पर बने रेल पुल से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने का सबसे ज्यादा लाभ दरभंगा, मधुबनी, सुपौल और सहरसा जिले में रहने वालों को होगा। इससे इस इलाके के लोगों में काफी खुशी है।

पूर्वोत्तर के राज्यों में पहुंचने का वैकल्पिक रास्ता
इस रुट में रेल परिचालन से पूर्वोत्तर तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा और एक वैकल्पिक मार्ग के माध्यम से लोगों और सामानों को लाने और पहुंचाने का एक वैकल्पिक रास्ता भी होगा। सबसे खास बात ये है कि कोसी पर बन रहा यह पुल भारत और नेपाल के बीच करीब 1700 किमी से अधिक की विस्तारित सीमा पर करीब-करीब चारों ओर एक वैकल्पिक मार्ग बनता है। बता दें कि अभी पूर्वोत्तर जिसे हम अक्सर ‘चिकन नेक’ भी कहते हैं, से आने वाली ट्रेनों को कटिहार और मालदा में उतरना पड़ता है। लेकिन, इस रुट पर ट्रेनों के परिचालन शुरू होने के साथ ही पूर्वोत्तर पहुंचना आसान हो जाएगा।  इस रेलवे महासेतु के कारण दरभंगा, निर्मली और अंत में न्यू जलपाईगुड़ी के रास्ते असम का रास्ता खुल जाएगा और वहां आना-जाना सुगम हो जाएगा।

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