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G-20 के Logo में कमल का फूल हमारी आस्था और बौद्धिकता को कर रहा चित्रित, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जिस भावना को हम जीते आए हैं, वो ही Theme में भी समाहित- PM Modi

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को G-20 शिखर सम्मेलन के नए लोगो, थीम और वेबसाइट का वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि G-20 का ये लोगो केवल एक प्रतीक चिह्न नहीं है, बल्कि ये एक संदेश है। ये एक भावना है, जो हमारी रगों में है। ये एक संकल्प भी है, जो हमारी सोच में शामिल रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के मंत्र के जरिए विश्व बंधुत्व की जिस भावना को हम जीते आए हैं, वो इस Logo और Theme में समाहित है। पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनियाभर में भारत को जानने की अभूतपूर्व जिज्ञासा है। ऐसे में ये हमारा दायित्व है कि हम इन आशाओं-अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा बेहतर करके दिखाएं। ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम भारत की सोच और सामर्थ्य से, भारत की संस्कृति और समाजशक्ति से विश्व को परिचित कराएं।

हमारे पास युद्ध से मुक्ति के लिए बुद्ध के संदेश और हिंसा के प्रतिरोध में गांधी के समाधान
पीएम मोदी ने G-20 का Logo का अनावरण करते हुए कहा कि इसमें कमल का फूल, भारत की पौराणिक धरोहर, हमारी आस्था और हमारी बौद्धिकता को चित्रित कर रहा है। हमारे यहां अद्वैत का चिंतन जीव मात्र के एकत्व का दर्शन रहा है। ये दर्शन, आज के वैश्विक द्वंदों और दुविधाओं के समाधान का माध्यम बने, इस Logo और Theme के जरिए हमने ये संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध से मुक्ति के लिए बुद्ध के जो संदेश हैं, हिंसा के प्रतिरोध में महात्मा गांधी के जो समाधान हैं, G-20 के जरिए भारत उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊर्जा दे रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के मंत्र के जरिए विश्व बंधुत्व की जिस भावना को हम जीते आए हैं, वो विचार इस Logo और Theme में प्रतिबिम्बित हो रहा है।

भारत की सोच और सामर्थ्य से विश्व को परिचित कराना हमारी जिम्मेदारी
पीएम मोदी ने कहा कि ये बात सही है कि दुनिया में जब भी G-20 जैसे बड़े platforms का कोई सम्मेलन होता है, तो उसके अपने diplomatic और geo-political मायने होते हैं। ये स्वाभाविक भी है। लेकिन भारत के लिए ये समिट केवल एक डिप्लोमैटिक मीटिंग नहीं है। भारत इसे अपने लिए एक नई ज़िम्मेदारी और अपने प्रति दुनिया के विश्वास के रूप में देखता है। आज विश्व में भारत को जानने की, भारत को समझने की एक अभूतपूर्व जिज्ञासा है। भारत का नए आलोक में अध्ययन, हमारी वर्तमान की सफलताओं का आकलन किया जा रहा है। इसके साथ ही हमारे भविष्य को लेकर अभूतपूर्व आशाएँ प्रकट की जा रही हैं। ऐसे में ये हम देशवासियों की ज़िम्मेदारी है कि हम इन आशाओं-अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा बेहतर करके दिखाएं। ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम भारत की सोच और सामर्थ्य से, भारत की संस्कृति और समाजशक्ति से विश्व को परिचित कराएं।

 

हमारे पास mother of democracy के रूप में गौरवशाली परंपरा भी है
भारत की हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति की बौद्धिकता और उसमें समाहित आधुनिकता को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये हमारा दायित्व है कि हम इनसे विश्व का ज्ञानवर्धन करें। जिस तरह हम सदियों और सहस्राब्दियों से ‘जय-जगत’ के विचार को जीते आए हैं, आज हमें उसे जीवंत कर आधुनिक विश्व के सामने प्रस्तुत करना होगा। हमें सबको जोड़ना होगा। सबको वैश्विक कर्तव्यों का बोध कराना होगा। विश्व के भविष्य में उनकी अपनी भागीदारी के लिए जागृत करना होगा। प्रधानमंत्री ने कही कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति ने हमें एक और बात सिखाई है। जब हम अपनी प्रगति के लिए प्रयास करते हैं, तो हम वैश्विक प्रगति की परिकल्पना भी करते हैं। आज भारत विश्व का इतना समृद्ध और सजीव लोकतन्त्र है। हमारे पास लोकतन्त्र के संस्कार भी हैं, और mother of democracy के रूप में गौरवशाली परंपरा भी है।

भारत के पास जो विशिष्टता और विविधता है, उसमें G-20  बड़ा अवसर बन सकता है
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास जितनी विशिष्टता है, उतनी ही विविधता भी है। भारत के पास Democracy के साथ Diversity, Indigenous अप्रोच के साथ Inclusive सोच और Local Lifestyle के साथ Global Thoughts भी हैं। आज दुनिया इन्हीं Ideas में अपनी सभी चुनौतियों के समाधान देख रही है और G-20 इसके लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। हम दुनिया को ये दिखा सकते हैं कि कैसे democracy जब एक व्यवस्था की जगह एक संस्कार और संस्कृति बन जाती है, तो conflicts का scope समाप्त हो जाता है। हम दुनिया के हर मानव को आश्वस्त कर सकते हैं कि प्रगति और प्रकृति दोनों एक दूसरे के साथ चल सकते हैं। हमें sustainable development को केवल सरकारों के सिस्टम की जगह individual LiFE का हिस्सा बनाना है। Environment हमारे लिए global cause के साथ साथ personal responsibility भी बनना चाहिए।

अब G-20 समिट के लिए हमारा मंत्र One Earth, One Family, One Future है
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि आज का विश्व हमारी ओर बहुत आशा से देख रहा है। चाहे वो जी-7 हो, जी-77 हो या फिर UNGA हो। इस माहौल में, जी-20 के प्रेसिडेंट के तौर पर भारत की भूमिका बहुत अहम है। भारत एक ओर विकसित देशों से घनिष्ठ रिश्ते रखता है, और साथ ही विकासशील देशों के दृष्टिकोण को भी अच्छी तरह से समझता है, उसकी अभिव्यक्ति करता है। हमारा प्रयास रहेगा कि विश्व में कोई भी first world या third world न हो, बल्कि केवल one world हो। भारत, पूरे विश्व को एक common objective के लिए, एक बेहतर भविष्य के लिए, साथ लाने के विजन पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने One Sun, One World, One Grid के मंत्र के साथ विश्व में Renewable Energy revolution का आह्वान किया। भारत ने One Earth, One Health के मंत्र के साथ global health को मजबूत करने का अभियान शुरू किया और अब जी-20 में भी हमारा मंत्र One Earth, One Family, One Future है। भारत के यही विचार, यही संस्कार, विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

 

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